अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका ऐसी टीम है जिसके तेज गेंदबाजी आक्रमण का हमेशा से लोहा माना जाता रहा है। 1992-93 और 1996-97 में जब भारतीय टीम ने वहां का दौरा किया तो एलन डोनाल्ड का खौफ होता था। 2001-02 में भारतीय टीम को शॉन पोलाक ने परेशान किया। इसके बाद डेल स्टेन और वर्नोन फिलेंडर ने अपनी एक जगह बनाई। उसके वर्तमान तेज गेंदबाजी आक्रमण में भी स्टेन और फिलेंडर के अलावा मोर्नी मोर्केल व कैगिसो रबादा के रूप में विश्वस्तरीय तेज गेंदबाज हैं लेकिन शायद यह पहला मौका है जब दक्षिण अफ्रीका पहुंची भारतीय टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण को देखकर हम सीना ठोककर कह सकते हैं, इसमें हमें जीत दिलाने की कूव्वत है।

भारतीय टीम पांच जनवरी से केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट सीरीज की शुरुआत करेगी। इसके बाद उसे छह वनडे और तीन टी-20 मैचों की सीरीज भी खेलनी है। टेस्ट सीरीज के लिए दक्षिण अफ्रीका पहुंची भारतीय टीम में इशांत शर्मा, उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार, मुहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह के रूप में पांच तेज गेंदबाज हैं। इस आक्रमण में अनुभव, तेजी, स्विंग और युवा शक्ति का अद्भुत संगम है। इसके साथ ही रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा के रूप में टीम में दो स्पिनर भी हैं जो अंतिम एकादश को विविधता देंगे।

सधा हुआ आक्रमण

ऐसा माना जाता है कि विदेशी दौरों पर भारतीय टीम इसलिए असफल होती थी क्योंकि हमारे पास अच्छे तेज गेंदबाज नहीं होते थे लेकिन इस बार दक्षिण अफ्रीका पहुंची भारतीय टीम में पांच किस्म के तेज गेंदबाजों के साथ एक मध्यम तेज गति का ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या भी है जिससे कप्तान विराट कोहली को अंतिम एकादश को सही रूप देने में आसानी होगी। भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता एमसएसके प्रसाद ने हाल ही में कहा था कि हमारे पास पांच किस्म के तेज गेंदबाज हैं और हमारा आक्रमण बहुत अच्छा है। भारत को हाल ही में टेस्ट मैचों में जीत मिली है जिससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। खासतौर पर हमारे तेज गेंदबाजों ने टेस्ट से लेकर टी-20 तक अच्छा प्रदर्शन किया है जो भारत को दक्षिण अफ्रीका में पहली बार टेस्ट सीरीज जिताने के दावे को और मजबूत करता है।

पांच किस्म के तेज गेंदबाज 

भारत के पास इस समय पांच तेज गेंदबाज नहीं बल्कि पांच किस्म के तेज गेंदबाज हैं। इशांत, शमी, भुवी, उमेश और बुमराह तेज गेंदबाजी करते हैं लेकिन इनमें विविधता है। जहां उमेश और मुहम्मद 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ स्विंग कराने में माहिर हैं तो भुवनेश्वर गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते हैं। पहली बार टेस्ट टीम में चुने गए बुमराह यॉर्कर फेंकने के साथ विकेट लेने में माहिर हैं। उनमें युवा जोश है। हालांकि यह देखना होगा कि उन्हें किस मैच में अंतिम एकादश में मौका मिलता है। वहीं इशांत लंबे कद के गेंदबाज हैं। वह लंबे स्पैल कर सकते हैं। साथ ही मुफीद कंडीशन में अच्छी बाउंसर फेंक सकते हैं। इशांत और शमी को दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट खेलने का अनुभव भी है। हालांकि उन्हें पिछले दौरों पर खास सफलता नहीं मिली थी लेकिन इस बार वह कमाल कर सकते हैं।

बायें हाथ के तेज गेंदबाज की कमी 

भारतीय टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण में सिर्फ एक कमी दिखाई देती है और वह है उसमें बायें हाथ के गेंदबाज का न होना। इशांत, उमेश, शमी, भुवी और जसप्रीत पांचों ही दायें हाथ से गेंदबाजी करते हैं। बायें हाथ का तेज गेंदबाज हमेशा से ही ज्यादा खतरनाक माना जाता रहा है और इसकी हमेशा से ही भारत में कमी रही है। जहीर खान के संन्यास लेने के बाद से हमें एक अच्छे बायें हाथ के तेज गेंदबाज की जरूरत रही है। हालांकि 2006-07 के दक्षिण अफ्रीकी दौरे में दायें हाथ के तेज गेंदबाज शांताकुमारन श्रीसंत ने सबसे ज्यादा 18 विकेट लेकर मेजबान बल्लेबाजों को खूब छकाया था।

जडेजा कर सकते हैं कमाल

टीम में दो स्पिनर भी हैं लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर अश्विन फीके-फीके से नजर आते हैं जबकि जडेजा विदेशी धरती पर भी कमाल करते हैं। यह दोनों पहले भी दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट मैच खेल चुके हैं। 2013-14 में पिछले दौरे पर जडेजा को एक टेस्ट खेलने को मिला था जिसमें उन्होंने एक पारी में छह विकेट चटकाए थे। हालांकि अश्विन वहां कमाल नहीं दिखा पाए थे। इस बार भी अंतिम एकादश में जडेजा को ही मौका मिलने की संभावना है।

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Posted By: Ravindra Pratap Sing

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