अभिषेक त्रिपाठी, कोलकाता। सिटी ऑफ जॉय नहीं, अब इसे पिंक सिटी कहिए जनाब क्योंकि खुशियों का शहर कोलकाता कुछ दिनों के लिए गुलाबी हो गया है। ईडन गार्डेस ही नहीं, आसपास के क्लबों, स्मारकों और बड़ी-बड़ी इमारतों को भी गुलाबी रोशनी से सराबोर कर दिया गया है। गली-गली में पुचका (गोलगप्पे), झालमूड़ी और सिंघाड़ा (समोसे) बेचने वालों के साथ-साथ रसोगुल्ला (रसगुल्ला) की दुकानों और यहां की प्रचलित पीली टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के बीच सिर्फ एक ही चर्चा है और वह है शुक्रवार से गुलाबी गेंद से भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाला टेस्ट मैच।

जहां भारत और बांग्लादेश की टीम के सदस्य बुधवार को गुलाबी गेंद से खेलने का अभ्यास करते रहे तो बीसीसीआइ के अध्यक्ष सौरव गांगुली मुख्य पिच को निहारकर तैयारियों का जायजा लेते रहे। भारतीय टीम के मैदान में घुसने से पहले ही सैकड़ों प्रशंसक ईडन के बाहर जमा थे और उनके शोर से यह समझने में कोई दिक्कत नहीं हुई कि भारत में होने वाला पहला डे-नाइट टेस्ट इतिहास रचने जा रहा है। 

गुलाबी ईडन : 1987 विश्व कप फाइनल और 2016 टी-20 विश्व कप फाइनल सहित दर्जनों ऐतिहासिक मैच आयोजित करने वाला ईडन गार्डेस स्टेडियम भारत का पहला डे-नाइट टेस्ट आयोजित करने जा रहा है। खास बात यह है कि भारतीय टीम भी पहली बार डे-नाइट टेस्ट खेलेगी। उसे पिछले साल एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गुलाबी गेंद से खेलना था, लेकिन उसने इन्कार कर दिया था। बांग्ला खेल पत्रकार संदीपन बनर्जी ने कहा कि इस शहर के लोगों को हर काम पहले करने में मजा आता है। आज भी यहां के लोग खुश होकर बताते हैं कि भारत में सबसे पहला मेडिकल कॉलेज यहां बना और सबसे पहली मेट्रो यहां चली। इसी तरह अब हम लोग गर्व से कहेंगे कि भारत में पहला डे-नाइट टेस्ट कोलकाता में आयोजित हुआ।

गुलाबी रंग का प्रयोग : ईडन के अंदर सिर्फ गेंद ही गुलाबी नहीं होगी, बल्कि दर्शक दीर्घा के खंभों को भी गुलाबी कपड़े से सजाया गया है। दर्शक दीर्घा में विशेष गुलाबी रोशनी का इंतजाम किया गया है। स्कोर बोर्ड में नाम काले की जगह गुलाबी रंग से लिखे जाएंगे। मैदान में लगी बड़ी स्क्रीन को चारों तरफ से गुलाबी विज्ञापन से सजाया गया है। मैदान के अंदर जो भी विज्ञापन लगेंगे उनमें अधिकतर का बेस भी गुलाबी ही रहेगा। ईडन के बाहर और अंदर इंडियन आर्ट कॉलेज के बच्चों ने पेंटिंग बनाई है। मैदान का बाहरी हिस्सा गुलाबी रोशनी से जगमगा रहा है। मैदान के अंदर एक बहुत बड़ा गुलाबी गुब्बारा लगाया गया है जो दूर से ही दिखाई देता है। यह मैच के खत्म होने तक लगा रहेगा।

शहर भी हुआ गुलाबी : भारत और बांग्लादेश मैच के लिए विशेष तौर पर पिंकू-टिंकू मस्कट बनाए गए हैं जो पूरे शहर में घूम-घूमकर इस मैच का प्रचार कर रहे हैं। शहर में दर्जनों बिलबोर्ड लगाने के साथ छह एलईडी बोर्ड लगाए गए हैं जिसमें मैच के बारे में बताया जा रहा है। यही नहीं, कई सरकारी बसों में भी डे-नाइट टेस्ट का प्रचार किया जा रहा है और उसका अच्छा रिस्पांस भी मिला है। कोलकाता की सबसे बड़ी इमारत 'द 42', शहीद मीनार और कुछ पार्को को भी गुलाबी रोशनी से सराबोर किया गया है। 16 नवंबर से मैच खत्म होने तक शाम को गंगा नदी में हावड़ा ब्रिज से विद्यासागर सेतु तक कुछ नावों में गुलाबी रोशनी का प्रयोग करके इस मैच का प्रचार किया जा रहा है। कुछ मिठाई की दुकानों में गुलाबी रंग की मिठाइयां बनाई गई हैं, जबकि धर्मतल्ला के पास विधान चंद्र राय मार्केट के पास जर्सी बाजार में गुलाबी रंग की जर्सियां खूब बिक रही हैं।

यहां खेला जा चुका है गुलाबी गेंद से मैच : एशिया का पहला पिंक बॉल मैच ईडन गार्डेस में कोलकाता सुपर लीग में खेला गया था। 2016 में यहां कोलकाता सुपर लीग का चार दिवसीय फाइनल मैच मोहन बागान और भवानीपुर के बीच खेला गया था। वर्तमान टीम के दो खिलाड़ी मुहम्मद शमी और रिद्धिमान साहा उसमें खेले थे। वह मैच मोहन बागान जीता था। उस मुकाबले में शमी ने पांच विकेट लिए थे। यही नहीं, 2016 में ही ग्रेटर नोएडा के स्पो‌र्ट्स कांपलेक्स में 23 अगस्त से 14 सितंबर के बीच दलीप ट्रॉफी के चार डे-नाइट मैच गुलाबी गेंद से खेले गए थे। वर्तमान भारतीय टीम में शामिल कुलदीप यादव, मयंक अग्रवाल, रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा उस सीरीज में खेले थे। मयंक ने उसमें शतक भी लगाया था।

क्यों अलग है डे-नाइट टेस्ट

-पहली बार भारत में दूधिया रोशनी में खेला जाएगा टेस्ट मैच। 

-अब तक सिर्फ 11 डे-नाइट टेस्ट मैच पूरी दुनिया में खेले गए हैं। 

-भारत और बांग्लादेश दोनों ही टीमें पहली बार डे-नाइट टेस्ट मैच खेलेंगी।

-इसमें लाल की जगह गुलाबी गेंद से खेला जाता है मैच। 

-एसजी की गुलाबी गेंद का पहली बार डे-नाइट टेस्ट में हो रहा है प्रयोग। इससे पहले जो भी डे-नाइट टेस्ट हुए हैं उसमें कूकाबुरा और ड्यूक गेंद का इस्तेमाल हुआ। 

-भारत की वर्तमान टीम में सिर्फ कुलदीप यादव, मयंक अग्रवाल, रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा, रिद्धिमान साहा और मुहम्मद शमी इससे पहले गुलाबी गेंद से प्रथम श्रेणी और क्लब स्तरीय मैच खेल चुके हैं। 

-सौरव गांगुली के बीसीसीआइ अध्यक्ष बनने के कारण यह संभव हो सका। 

-गांगुली 2016 में बीसीसीआइ की तकनीकि समिति के प्रमुख थे, तभी दलीप ट्रॉफी गुलाबी गेंद से खेली गई थी।

-इसके जरिये टेस्ट मैचों में दर्शकों की वापसी होगी क्योंकि पिछले कुछ वर्षो में मैदानी दर्शक टेस्ट क्रिकेट से दूर हुए हैं। 

Posted By: Sanjay Savern

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप