नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। भारतीय क्रिकेट टीम आजादी के तुरंत बाद अपने पहले विदेशी दौरे पर ऑस्ट्रेलिया गई थी, लेकिन उसे ऑस्ट्रेलिया का दूसरा दौरा करने के लिए 20 साल का इंतजार करना पड़ा।

20 साल बाद ऑस्ट्रेलिया गई भारतीय टीम

भारतीय टीम भले ही 20 साल तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर नहीं गई, लेकिन इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम ने तीन बार भारत का दौरा किया। भारत में खेली गई इन तीन टेस्ट सीरीज में पहली दो सीरीज ऑस्ट्रेलिया ने जीतीं, लेकिन तीसरी सीरीज ड्रॉ रहीं।

दोनों देशों के बीच भारत में हुईं लगातार तीन सीरीज के बाद अगली सीरीज की मेजबानी 1967-68 में ऑस्ट्रेलिया ने की। इस सीरीज में चार टेस्ट मैच खेले गए और इन चारों टेस्ट को ऑस्ट्रेलिया ने जीतकर सीरीज पर 4-0 से कब्जा जमाया। पहला टेस्ट एडिलेड में खेला गया, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने 146 रन से जीता। दूसरा टेस्ट मेलबर्न में हुआ, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने पारी और चार रन से अपने नाम किया। ब्रिसबेन में खेले गए तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को भारत ने टक्कर दी, लेकिन आखिरकार भारत को इस टेस्ट में भी 39 रन से शिकस्त का सामना करना पड़ा। सीरीज का चौथा और अंतिम टेस्ट सिडनी में हुआ, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने 144 रन से जीतकर सीरीज में क्लीन स्वीप किया।

दो-दो कप्तान

इस दौरे के लिए मंसूर अली खान पटौदी (टाइगर पटौदी) को भारत का और बॉब सिंपसन को ऑस्ट्रेलिया का कप्तान नियुक्त किया गया था। हालांकि, सीरीज के पहले टेस्ट में पटौदी उपलब्ध नहीं हो सके, ऐसे में उस मैच में भारत की कप्तानी चंदू बोर्डे ने की। वहीं, सिंपसन के तीसरे टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं होने की वजह से उस मैच में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी बिल लॉरी ने की। इस तरह से इस सीरीज में दोनों टीमों की ओर से दो-दो खिलाड़ियों ने कप्तानी की।

दो-दो बॉब छाए 

इस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के दो बॉब छाए रहे। बल्लेबाजी में दोनों टीमों की ओर से सबसे ज्यादा रन ऑस्ट्रेलिया के बॉब कूपर ने बनाए। उन्होंने चार टेस्ट की सात पारियों में 69.28 की औसत से 485 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने दो शतक और दो अर्धशतक जड़े। सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले दूसरे बॉब ऑस्ट्रेलियाई कप्तान सिंपसन थे। उन्होंने तीन टेस्ट की पांच पारियों में 58.80 की औसत से 294 रन बनाए। दोनों बॉब ने गेंदबाजी में भी कमाल दिखाते हुए सीरीज में 13-13 विकेट अपने नाम किए।

प्रसन्ना की फिरकी 

सीरीज में दोनों टीमों की ओर से सबसे सफल गेंदबाज ईरापल्ली प्रसन्ना रहे। उन्होंने अपनी ऑफ स्पिन का कमाल दिखाते हुए चार मैचों में 25 विकेट विकेट अपने नाम किए। इस दौरान उन्होंने दो बार पारी में पांच विकेट झटके, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 104 रन देकर छह विकेट रहा, जो उन्होंने ब्रिसबेन में खेले गए सीरीज के तीसरे टेस्ट की दूसरी पारी में किया।

भारत की ओर से सबसे सफल बल्लेबाज रूसी सुरती रहे, जिन्होंने चार टेस्ट में 45.87 की औसत से 367 रन बनाए। वह शतक तो नहीं बना सके, लेकिन उन्होंने चार अर्धशतक जड़े। उनके अलावा कप्तान पटौदी ने भी चार अर्धशतकों के साथ 56.50 की औसत से 339 रन बनाए। भारत की ओर से एकमात्र शतक एमएल जयसिम्हा ने जड़ा। उन्होंने ब्रिसबेन में 101 रन की पारी खेली।

आबिद का पदार्पण 

 

सीरीज का पहला टेस्ट एडिलेड में खेला गया। पदार्पण टेस्ट खेलने वाले भारतीय तेज गेंदबाज आबिद अली (6/55) ने कमाल की गेंदबाजी करते हुए मेजबान को पहली पारी में 335 रन पर समेट दिया। आबिद पदार्पण टेस्ट की एक पारी में पांच या ज्यादा विकेट लेने वाले तीसरे भारतीय बने थे, लेकिन उनका यह प्रदर्शन उस समय तक ऐसा प्रदर्शन करने वाले भारतीयों में सर्वश्रेष्ठ था। आबिद ने सीरीज में 37.37 की औसत से 299 रन भी बनाए।

 

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Posted By: Pradeep Sehgal

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