नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जाने वाले बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच से पहले टीम इंडिया के लिए अच्छी खबर आई है। 26 दिसंबर से मेलबर्न में खेले जाने वाले इस टेस्ट मैच से पहले रवींद्र जडेजा फिट हो गए हैं।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) ने एक बयान जारी कर कहा कि जडेजा कंधे की चोट से उबर चुके हैं और अब वह मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच के लिए टीम चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे। बीसीसीआइ ने कहा कि जडेजा को इस साल वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज के दौरान कंधे में चोट लग गई थी और फिर इसके बाद पिछले महीने दो नंबवर को उन्हें इंजेक्शन लेने की सलाह दी गई थी। जडेजा की इसी चोट की वजह से ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एक विवाद भी हुआ।

चोटिल जडेजा को लेकर हुआ विवाद

शास्त्री ने रविवार को रहस्योद्घाटन किया कि जब जडेजा ऑस्ट्रेलिया आए उससे पहले उन्होंने कंधे में अकड़न महसूस की। उन्हें भारत में भी ऐसा महसूस हुआ था लेकिन उन्होंने इसके बाद वहां घरेलू क्रिकेट खेला। यहां पर भी उन्हें ऐसा महसूस हुआ और उन्हें फिर इंजेक्शन लगाया। इसमें हमारी अपेक्षा से अधिक समय लगा। हम सावधान रहना चाहते हैं। अब फिर सवाल उठता है कि जो खिलाड़ी फिट ही नहीं था, वह ऑस्ट्रेलिया क्यों आया?

टीम इंडिया तीन स्पिनर लेकर ऑस्ट्रेलिया आई थी और शास्त्री की मानें तो जडेजा आने से पहले ही अनफिट थे, जबकि अश्विन पहले टेस्ट के बाद अनफिट हो गए और कुलदीप यादव को फिट होने के बावजूद अंतिम एकादश में जगह नहीं दी जा रही है। जडेजा को लेकर जब विवाद ज्यादा बढ़ा तो बीसीसीआइ ने एक लंबा-चौड़ा स्पष्टीकरण जारी करते हुए जडेजा को फिट भी घोषित कर दिया।

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इस वजह से और बढ़ा विवाद

पर्थ में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में जडेजा को नही खिलाया गया था। दूसरा टेस्ट हारने के बाद जब विराट प्रेस कांफ्रेंस में आए तो उनसे पूछा गया था कि आपने जडेजा को क्यों नहीं खिलाया तो भी उन्होंने चोट का हवाला नहीं दिया, बल्कि कहा कि हमें अपने चार तेज गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी और इसीलिए हमने स्पिन गेंदबाज के चयन पर विचार ही नहीं किया।

कोहली से जब पूछा गया था कि क्या पर्थ की पिच पर जडेजा को मौका दिया जाना चाहिए था तो उन्होंने कहा कि पिच देखने के बाद मुझे ऐसा नहीं लगा। जब हमने पहली बार पिच देखी तो हमें लगा तेज गेंदबाज काफी होंगे, लेकिन नाथन लियोन ने इस विकेट पर काफी अच्छी गेंदबाजी की। जब टीम चयन को लेकर आलोचना हुई तो शास्त्री कह रहे हैं जडेजा फिट नहीं थे।

यही नहीं, शास्त्री ने रविवार को एमसीजी में कहा कि पर्थ टेस्ट में जडेजा 70-80 प्रतिशत फिट था और हम उसको लेकर रिस्क नहीं लेना चाहते थे। यदि वह यहां 80 फीसद फिट होते हैं तो वह खेलेंगे। अब सवाल उठता है कि जब पर्थ मे 70-80 फीसद फिट होने पर जडेजा को नहीं खिलाया गया तो यहां पर 80 फीसद फिट होने पर उसे कैसे खिलाएंगे? अगर जडेजा पूरी तरह फिट नहीं थे तो उन्हें पहले दो टेस्ट में 12वें खिलाड़ी के तौर पर फील्डिंग में क्यों उतारा गया। दूसरे टेस्ट की दोनों पारियों में उन्होंने करीब 20-20 ओवर क्षेत्ररक्षण किया, बाउंड्री के पास से थ्रो फेंके। अगर उनके हाथ में अकड़न ही थी तो फील्डिंग में लगाकर क्यों रिस्क लिया गया?

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Posted By: Pradeep Sehgal

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