विशेष संवाददाता, लंदन। विश्व कप जीतने का सपना पूरा करने में इंग्लैंड की टीम को 44 साल लग गए। इस बीच 11 विश्व कप का सफर अंग्रेजों ने तय किया। 1979, 1987, 1992 में तो इंग्लैंड फाइनल तक में पहुंचा, लेकिन किसी भी इंग्लिश कप्तान को विश्व कप की ट्रॉफी चूमने का मौका नहीं मिला। क्रिकेट के जन्मदाता इंग्लैंड का सपना पूरा भी हुआ तो एक ऐसी टीम से जिसका कप्तान, मुख्य ऑलराउंडर, मुख्य ओपनर यहां तक कि मुख्य तेज गेंदबाज तक विदेशी मूल के हैं। विश्व कप विजेता इंग्लैंड टीम की यह बेहद रोचक कहानी है।

आयरलैंड के मोर्गन
दरअसल, इंग्लैंड टीम के कप्तान इयोन मोर्गन इस देश में नहीं जन्में हैं। उनका जन्म आयरलैंड में हुआ था। यहां तक कि वह इंग्लैंड के लिए खेलने से पहले आयरलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक खेल चुके हैं। पांच अगस्त 2006 को मोर्गन ने आयरलैंड की ओर से स्कॉटलैंड के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला खेला था। 24 मई 2009 को उन्होंने इंग्लैंड के लिए पहला वनडे वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिस्टल में खेला था। यहां उन्होंने नाबाद दो रन बनाए थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2015 विश्व कप में पहले ही दौर में इंग्लैंड के बाहर होने के बाद चयनकर्ताओं ने मोर्गन को कप्तानी का जिम्मा सौंपा और अब उन्होंने इंग्लैंड का अधूरा ख्वाज पूरा कर दिया।

दक्षिण अफ्रीका के जेसन रॉय

इंग्लैंड के पास आज विश्व कप खिताब है तो उसमें अहम भूमिका जेसन रॉय की ही है। लीग दौर में रॉय चोटिल हुए तो इंग्लैंड का सेमीफाइनल में पहुंचना मुश्किल हो गया था। तब रॉय ने ही वापसी कर टीम को भारत, न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत दिलाई। टीम के मुख्य ओपनर रॉय का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में हुआ था, लेकिन उनके माता-पिता के इंग्लैंड में बसने के बाद उन्होंने इंग्लैंड के लिए वनडे में 2015 में पदार्पण किया था।

अपने ही देश को स्टोक्स ने हराया

यह तो बेन स्टोक्स ने भी नहीं सोचा होगा कि वह इंग्लैंड के लिए विश्व कप जीतेंगे और उस देश को हराकर जीतेंगे जहां उनका जन्म हुआ था। 28 वर्षीय स्टोक्स का जन्म न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुआ था। उनके भी माता-पिता न्यूजीलैंड से इंग्लैंड में आकर बस गए थे, लेकिन अब वह दोनों न्यूजीलैंड में ही रह रहे हैं, लेकिन स्टोक्स इंग्लैंड में ही पले बढ़े और यहीं क्रिकेट शुरू किया। स्टोक्स ने 25 अगस्त 2011 को आयरलैंड के खिलाफ अपना पहला वनडे खेला था।

आर्चर भी इंग्लैंड के नहीं

इंग्लैंड टीम के मुख्य तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर के विश्व कप खेलने का सपना बहुत पास आकर पूरा हुआ। सुपर ओवर में अपनी टीम के लिए गेंदबाजी करने वाले आर्चर मुख्य रूप से कैरेबियाई देश बारबाडोस से हैं। वह क्रिकेट का सपना लेकर ही इंग्लैंड पहुंचे थे। 2016 में पाकिस्तान के खिलाफ ससेक्स की टीम में उन्हें चुना गया और यह उनका पहला प्रथम श्रेणी मैच था। वह लगातार काउंटी में आर्चर अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन नियम के मुताबिक उन्हें इंग्लैंड में पांच वर्ष पूरे करने थे तभी उनका इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम में चयन हो सकता था। विश्व कप शुरू होने से कुछ महीने पहले ही आर्चर की यह समय सीमा पूरी हुई और उन्हें विश्व कप टीम में चुना गया। किस्मत भी उनके साथ रही कि पहली बार टीम में चुने जाने पर ही वह विश्व विजेता टीम का हिस्सा बन गए।

पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों का साथ

पाकिस्तान का विश्व कप जीतने का सपना जरूर अधूरा रहा गया, लेकिन इस देश से ताल्लुक रखने वाले इंग्लैंड के दो खिलाड़ियों ने यह कर दिखाया। आदिल राशिद का जन्म भले ही इंग्लैंड के यॉर्कशायर में हुआ, लेकिन उनके पिता पाकिस्तान से हैं। ऐसी ही कहानी मोइन अली की भी है। मोइन के दादा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मीरपुर जिले से थे। वह इंग्लैंड आकर बस गए थे। मोइन के पिता टैक्सी ड्राइवर जबकि मां नर्स थीं।

Posted By: Digpal Singh