यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 14, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
EXCLUSIVE INTERVIEW: राहुल द्रविड़ के साथ पहले से जुड़े होने का फायदा मिलेगा : अक्षर पटेल
अक्षर पटेल ने कहा कि मेरा मानना है कि उससे मुझे आत्मविश्वास मिला है। मैं इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज ...और पढ़ें

न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल हुए बायें हाथ के आर्थोडाक्स स्पिनर अक्षर पटेल ने टीम को नवनियुक्त मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के साथ काम करने को लेकर कहा कि वह उनके साथ इंडिया-ए के लिए खेल चुके हैं इसलिए उन्हें द्रविड़ के साथ संयोजन बैठाने में समय नहीं लगेगा। अक्षर ने कहा कि द्रविड़ को पता है कि वह अपनी लय कैसे सेट करते हैं। अभिषेक त्रिपाठी ने अक्षर से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :
-न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे और टेस्ट टीम में आपका चयन हुआ। इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज खेली और आइपीएल में आपने अच्छा प्रदर्शन किया। इस प्रगति को व्यक्तिगत रूप से कैसे देखते हैं?
- जैसे कि आपने कहा मैं एक के बाद एक आगे बढ़ता रहा। व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि उससे मुझे आत्मविश्वास मिला है। मैं इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में टेस्ट के लिए चुना गया जहां मैंने प्रदर्शन किया। जब आप भारतीय टीम में लगातार रहते हैं तो आत्मविश्वास बढ़ता है और यह विश्वास आपके प्रदर्शन पर भी दिखता है। इसके बाद आपको आइपीएल को लेकर चिंता नहीं रहती कि आपका चयन होगा कि नहीं क्योंकि आपने उस स्तर पर प्रदर्शन किया और आगे के लिए तैयार रहते हैं। यह आत्मविश्वास ही मेरे काम आया।
- आप कुछ साल पहले टीम में आए लेकिन एक ऐसा समय भी आया जहां आपको बाहर होना पड़ा। यह दौर कैसे बिता और उस समय आपकी सोच क्या थी?
- मैं चोटिल होने के कारण भारतीय टीम से बाहर हुआ और ऐसा नहीं था कि प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण बाहर हुआ। मैंने तीन-चार महीने रीहेब किया और जब रवींद्र जडेजा को मौका मिला तो उन्होंने पीछे मुढ़कर नहीं देखा। जाहिर है कि टीम से बाहर रहने पर बुरा लगता है तो और आप सोचते हैं, मैंने ऐसा गलत क्या किया है जिस कारण मैं बाहर हूं। कई बार आपको टीम के संयोजन के कारण जगह नहीं मिलती है। मैं यही सोच रहा था कि चयन मेरे हाथ में नहीं है। बस मैं मेहनत कर सकता हूं और अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी पर कैसे ध्यान दे सकता हूं। इन्हीं सब चीजों पर काम कर रहा था। इंडिया-ए में मैं लगातार खेलता रहा और राहुल द्रविड़ से इस पर बात होती रहती थी। वह कहते थे कि आपको मौके के लिए तैयार रहना होगा। मैं इसी के लिए अपना काम कर रहा था और जैसे ही मुझे मौका मिला मैंने अपनी रणनीति के अनुसार काम किया।
- इंडिया-ए में आप द्रविड़ से सलाह लेते थे और अब द्रविड़ टीम इंडिया के मुख्य कोच होंगे और आप उनके साथ खेलेंगे?
- हमने इंडिया-ए के लिए काफी दौरे किए। उन्हें पता है कि मैं अपने खेल को कैसे लेता हूं और किस तरह अपनी लय सेट करता हूं। मुझे लगता है कि यह संयोजन काम आएगा क्योंकि नए कोच के साथ अपना संजोयन बैठाना जरूरी है और वह यह बात पहले से ही जानते हैं। द्रविड़ मुझे बता सकते हैं कि मैं क्या गलत कर रहा हूं और मुझे सलाह दे सकते हैं कि मैं कैसे कर सकता हूं। उनके साथ पहले से जो बांडिंग है उसका फायदा मिलेगा।
-आजकल बायो-बबल (खिलाडि़यों के लिए बनाए गए सुरक्षित माहौल) पर बहुत बात हो रही है। एक सीनियर खिलाड़ी और एक ऐसे खिलाड़ी जो टीम में अपनी जगह पक्की करना चाहता है, उसके लिए इसके क्या मायने हैं?
- मेरे ख्याल से यह महज दिमाग की चीज है। जो खिलाड़ी टीम में जगह बनाना चाहता है और वो सोचता है कि मुझे बस खेलना है तो वो इस पर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका दिमाग सेट है और वो उत्साहित रहता है। लेकिन जब कोई खिलाड़ी लगातार खेल रहा होता है तो उसे बायो बबल के बारे में पता चलता है कि क्या हो रहा है और क्या नहीं हो रहा। एक-दो महीने बायो बबल में रहने के बाद आदत हो जाती है कि आपको सीमित लोगों को देखना है। ना कोई आ रहा है, ना ही कोई जा रहा है। एक ही तरीके की चीज देखकर आपका दिमाग थक जाता है। मैच के बाद भी कुछ करने के लिए नहीं रहता। नया खिलाड़ी भी कुछ महीने बाद बायो बबल से ऊब जाता है।
-इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में आपने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन जब टीम विदेश में खेलने गई तो आपको अंतिम एकादश में मौका नहीं मिला। क्या यह टैग लगा दिया जाता है कि ये खिलाड़ी देश में अच्छा कर रहा है, ये विदेश में अच्छा करेगा। अश्विन ने भी एक बार कहा था कि भारतीय क्रिकेट नजरिये से चलता है?
-सबका अनुभव अलग होता है। अगर मैं हूं तो मेरी सोच अलग है और कोई कप्तान होता है तो उसकी सोच अलग होती है। टीम का संयोजन बैठाने के लिए जो होना चाहिए वो महत्वपूर्ण होता है क्योंकि बाहर आपको तीन तेज गेंदबाजों की जरूरत होती है और आपका पांचवां गेंदबाज आलराउंडर की तरह होना चाहिए। तेज गेंदबाजी आलराउंडर अच्छा होता है लेकिन अभी हमारे पास ऐसा कोई नहीं है। इसी हिसाब से यह लोग रणनीति बनाते हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसा टैग लगा है कि मैं भारत में मैच होंगे तो खेलूंगा। टीम संयोजन का साथ देना पड़ता है जो सामने वाली टीम के हिसाब से तय किया जाता है।
-ऐसा कुछ दिमाग में चलता रहता है कि आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड में भारतीय टेस्ट एकादश में जगह बना पाएं?
- जाहिर है कि मैं यही चाहूंगा कि जब भी मुझे मौका मिले मैं अच्छा करूं। मैं टी-20 में नहीं खेल रहा था लेकिन जब न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलूंगा तो यहीं सोच रहा हूं कि जो आइपीएल में किया है उसे फालो करूंगा और जो कर रहा था वो करूंगा। अगर मैं यह सोचूंगा कि मुझे मौका मिला है और मुझे साबित करना पड़ेगा तो ऐसा नहीं है क्योंकि मैंने साबित किया है इसलिए टीम में हूं। मुझे बस अपना 100 फीसद देना है। अगर मुझे एकादश में मौका मिला तो मैं अच्छा करने की कोशिश करूंगा जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ेगा। टेस्ट सीरीज भी आ रही है और उसमे मौका मिला तो आटोमेटिक जगह बनती जाएगी। अगर मैं सोचूं कि मुझे अवसर मिला है तो अच्छा करना ही, इससे खुद पर दबाव ले आऊंगा। मैं चीजों को सामान्य रखना चाहता हूं और अगर मुझे एकादश में शामिल होने के मौका मिला तो इसके लिए तैयार रहूंगा।
- आप और जडेजा दोनों गुजरात से हैं और बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी बेहतर करते हैं। इस प्रतिस्पर्धा को कैसे देखते हैं और आपस में बात करते समय क्या कहते हैं कि अब तुम्हें देख लूंगा?
- ऐसा तो नहीं होता है (हंसते हुए)। हमारी अच्छी दोस्ती है और दोनों गुजराती हैं तो एक बांडिंग होती है। अगर हम बाहर जाते हैं तो जब भी गुजराती मिल जाए तो आटोमेटिक ही गुजराती में बातें शुरू हो जाती हैं। हमारा अच्छा संयोजन है। जब भी अभ्यास में हमारी बात होती है तो यही बोलते हैं कि आप क्या सोचते हैं, आप इस स्थिति में क्या करते हैं। उसी हिसाब से हम गेंदबाजी पर बात करते हैं। बात करें प्रतिस्पर्धा की तो हमारे बीच मजबूत प्रतिस्पर्धा है। मुझे लगता है कि जब आपके सामने चुनौती है तो आप सोचते हैं कि मुझे सुधार करना है। इस मैच में अगर मैंने थोड़ा भी हल्के में लिया तो मेरी जगह जा सकती है। आपको हमेशा हर मैच में 100 फीसद देना होता है और आप हल्के में नहीं ले सकते क्योंकि आपको पता होता है कि आपकी जगह जा सकती है।
- कभी-कभी ऐसा भी होता होगा कि आप में से कोई कहता होगा मेरे थेपले खत्म हो गए आपके पास है क्या?
- वो कभी-कभी हो जाता है (हंसते हुए)।। अगर बाहर के दौरे पर जाते हैं तो हमारा कोई गुजराती दोस्त हमें थेपले या गुजराती खाना दे जाता है तो हम आपस में बांट लेते हैं लेकिन अब वो भी नहीं हो पा रहा क्योंकि आप बायो बबल के कारण किसी से मिल नहीं सकते।
- न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 में रोहित शर्मा कप्तानी करेंगे। एक टेस्ट में अजिंक्य रहाणे कमान संभालेंगे फिर विराट कोहली कप्तान होंगे। इन तीनों के बारे में आप क्या सोचते हैं। एक खिलाड़ी के रूप में आप कैसा महसूस करते है?
- मैं रहाणे भाई के साथ दिल्ली कैपिटल्स में रहा हूं तो उन्हें पता है मेरा माइंडसेट क्या है। मैं तीनों कप्तानों के साथ खेला हूं। मुझे उनका स्वभाव पता है इसलिए आपको ज्यादा परिवर्तन नहीं लगता क्योंकि आप यह भी जानते हैं कि कप्तान टीम के बारे में अच्छा सोचेगा। हो सकता है कप्तान आपकी भूमिका बदल दे। यह सब थोड़ा बदलाव होता है और तीनों कप्तान ऐसे हैं कि उनसे बात करने पर ही आपको पता चल जाएगा आपको क्या करना है क्या नहीं। वे खुद बताते हैं कि मैं आपकी भूमिका के बारे में यह सोचता हूं और आपको ऐसा करना है।
- दिल्ली कैपिटल्स के बारे में क्या कहेंगे? टीम के माहौल और रिषभ पंत के बारे में बताएं?
- जब मैं पंजाब से आया तो मैं भारत के लिए खेल रहा था और उस समय पंत और श्रेयस अय्यर काफी अच्छे दोस्त थे। मैं काफी आश्र्वस्त था क्योंकि युवा टीम थी और सभी साथ में खेलने वाले थे। हमारी बांडिंग अच्छी हो रही थाी। मेरा स्वभाव ऐसा है कि मैं जहां रहता हूं हंसी-मजाक करता हूं। दिल्ली कैपिटल्स का माहौल था कि सब साथ में रहते थे और इससे मदद मिलती है। मैं तीन साल से दिल्ली के लिए खेल रहा हूं और प्रदर्शन कर रहा हूं जिस कारण लोग मुझे पसंद भी कर रहे हैं। रिकी पोंटिंग का भी इसमें बहुत बड़ा योगदान रहा है। वह टीम को काफी अच्छी तरह बांध के रखते हैं कि आपको ये करना है। ऐसा नहीं है कि आप भारतीय खिलाड़ी हो तो यह नहीं कर सकते हो। वह सभी खिलाड़ी को एक ही तरह रखते हैं। ऐसा नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ही पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी करेगा। वह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की तरह ही घरेलू खिलाड़ियों को देखते हैं। दिल्ली में सब एक दूसरी की सफलता का आनंद लेते हैं। इसी कारण टीम अच्छा कर पाई।
