अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। ये भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड या दक्षिण अफ्रीका नहीं है बल्कि ये इंग्लैंड है। यहां पर तेज गेंदबाजों को अन्य क्रिकेट खेलने वाले देशों से ज्यादा स्विंग मिलती है। यहां गेंद इतनी स्विंग होती है कि पूरे दिन विकेटकीपर के साथ तीन स्लिप और गली पर क्षेत्ररक्षक नजर आते हैं। भले ही पिछले कुछ सालों में स्थितियां बदली हों लेकिन इंग्लैंड अभी भी स्विंगिस्तान के रूप में ही विख्यात है और एक अगस्त से भारत के खिलाफ शुरू होने वाली पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल सकता है। भारत को बर्मिघम में इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट खेलना है। हालांकि उसे अपने सर्वश्रेष्ठ स्विंग गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की कमी यहां खलेगी क्योंकि वह चोट के कारण शुरुआती तीन टेस्ट मैचों के लिए घोषित टीम में नहीं हैं।

इसके अलावा अनफिट जसप्रीत बुमराह भी पहले मैच में नहीं खेल पाएंगे। पहले टेस्ट में भारत की तेज गेंदबाजी इशांत शर्मा, उमेश यादव और मुहम्मद शमी पर ही निर्भर रहेगी। वहीं इंग्लैंड के पास जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्रॉड और क्रिस वोक्स जैसे गेंदबाज हैं।

लाल गेंद ज्यादा स्विंग करती है

लॉर्डस में 1983 विश्व कप खिताब जीतने वाली भारतीय टीम के मुख्य सदस्य मदन लाल ने कहा कि हाल ही में खत्म हुई वनडे और टी-20 सीरीज के प्रदर्शन को देखते हुए स्विंग का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। इंग्लैंड में टेस्ट में स्विंग होती है क्योंकि उसमें लाल ड्यूक गेंद का इस्तेमाल होता है। वनडे और टी-20 में सफेद गेंद का इस्तेमाल होता है। इंग्लिश पिचों में काफी नमी होती है और वहां के मैदान काफी अच्छे व हरे हैं। यहां की कंडीशन के कारण लाल ड्यूक गेंद देर से पुरानी होती है इसलिए तेज गेंदबाजों को ज्यादा स्विंग मिलती है। यही कारण है यहां रिवर्स स्विंग हासिल करना काफी मुश्किल होता है। लाल गेंद आसानी से मूव करती है।

हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि पहले को देखते हुए अब यहां की परिस्थितियां काफी बदल गईं हैं। अब बल्लेबाजों को उतनी परेशानी नहीं होती और पहले की तरह ग्रीन टॉप विकेट नहीं दिया जाता। इस बार गर्मी भी ज्यादा है, उससे भी थोड़ा असर देखने को मिलेगा। जहां तक दोनों टीमों की बात है तो दोनों के ही पास विश्व स्तरीय गेंदबाज हैं। भारत के पास उमेश, इशांत, शमी और बुमराह हैं जबकि इंग्लैंड के पास ब्रॉड, एंडरसन और क्रिस वोक्स हैं। निश्चित ही अच्छा मुकाबला देखने को मिलेगा।

एक दिन में 19 विकेट

17 से 19 अगस्त 2017 को बर्मिघम में हुए डे-नाइट टेस्ट मैच के तीसरे दिन 19 विकेट गिरे। इंग्लैंड ने मैच के दूसरे दिन 514/8 पर पहली पारी घोषित की और दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक वेस्टइंडीज ने एक विकेट पर 44 रन बनाए लेकिन तीसरे दिन पूरा खेल ही बदल गया। तीसरे दिन इंग्लिश गेंदबाजों ने वेस्टइंडीज के 19 विकेट गिराकर मैच जीत लिया। इस 19 में से 14 और पूरे मैच में 15 विकेट इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने लिए। हालांकि वह डे-नाइट मैच था और उसमें परिस्थितियां ज्यादा कठिन होती हैं लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत को अपना पहला टेस्ट उसी मैदान पर खेलना है।

एंडरसन और ब्रॉड पर निगाहें

इंग्लैंड की टेस्ट टीम अभी घोषित नहीं हुई है लेकिन ये अनुमान लगाया जा रहा है कि उसके दो सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड अपने करियर के अंतिम पड़ाव में भारत के खिलाफ जरूर खेलेंगे। एंडरसन इंग्लैंड की ओर से सबसे ज्यादा 540 और ब्रॉड उनके बाद 417 टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। पिछले तीन सालों में एंडरसन ने 21 टेस्ट में 137 और ब्रॉड ने 27 टेस्ट में 130 विकेट हासिल किए हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछली एशेज में एंडरसन ने 27 के औसत से 17 विकेट लिए थे। ये दोनों भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

काउंटी में एक दिन में 85 विकेट

अप्रैल में इंग्लैंड का प्रथम श्रेणी सत्र शुरू हुआ और उसके अगले ही दिन देश भर में चल रहे अलग-अलग काउंटी मैच में 85 विकेट गिरे। एक ही दिन इतने विकेट गिरना आश्चर्यजनक था। इस साल इंग्लैंड काउंटी चैंपियनशिप के दूसरे दिन ही लॉर्डस में मिडिलसेक्स और नॉर्थेपटनशर के बीच डिवीजन टू के मैच में 26 विकेट गिरे। इसमें तेज गेंदबाज जेम्स हैरिस ने सिर्फ पांच रन खर्चकर नौ विकेट लिए। नॉर्थेपटनशर की टीम जहां 21.2 ओवर में 71 रनों पर ऑलआउट हुई तो मिडिलसेक्स 38.3 ओवर में 151 रनों पर ऑलआउट हो गई। इसमें अधिकतर विकेट तेज गेंदबाजों को ही मिले।

जब हैरिस गेंद फेंक रहे थे तो बल्लेबाजों को समझ ही नहीं आ रहा था। गेंद दोनों ओर मूव कर रही थी और गिल्लियां उखड़ती जा रही थीं। इसी दिन ग्लूसेस्टरशर ने केंट की पारी को सिर्फ 64 रन पर धराशायी कर दिया। बायें हाथ के तेज गेंदबाज मैट टेलर ने 20 रन पर ही चार विकेट चटकाकर केंट को 19 ओवर के अंदर ऑलआउट कर दिया। काउंटी क्रिकेट में इस बार भी तेज गेंदबाजों का बोलबाला रहा। ये आंकड़े इंग्लैंड की परिस्थितियों को बताने के लिए काफी हैं।

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Posted By: Ravindra Pratap Sing

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