नई दिल्ली, जेएनएन। एक अज्ञात महिला ने बीसीसीआइ सीईओ राहुल जौहरी पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। जौहरी के डिस्कवरी नेटवर्क में कार्यकाल के दौरान उनकी हरकतों पर एक महिला ने आरोप लगाए हैं, लेकिन इस साल फरवरी में इसी तरह के आरोप बोर्ड के एक अधिकारी पर उसकी एक कार्यकारी सहायक ने लगाए थे। हालांकि उस मामले को दबा दिया गया था।

जब आइपीएल याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने इसको लेकर विनोद राय को पत्र लिखा तो समझौते का खेल शुरू हो गया। दैनिक जागरण के पास वर्मा और बीसीसीआइ का पब्लिक रिलेशन देखने वाली कंपनी के अधिकारी जितेंद्र झा के बीच हुई वाट्सएप चैट मौजूद है। इससे पता चलता है कि झा बोर्ड के एक अधिकारी की तरफ से वर्मा को पटाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे वर्मा उस अधिकारी के ऊपर लगे आरोपों को मीडिया में ना उठाएं।

जितेंद्र इसके लिए पटना जाकर वर्मा और बिहार क्रिकेट संघ के पूर्व मीडिया प्रमुख संजीव मिश्र से एक होटल में मिलते हैं। वह बोर्ड अधिकारी की तरफ से आश्वासन देते हैं कि बोर्ड वर्मा के बेटे लखन राजा पर लगे प्रतिबंध को हटा देगा। यही नहीं बिहार क्रिकेट संघ को निलंबित करके एडहॉक कमेटी बनाने को लेकर भी सहमति बनती है। बस उनके हिसाब से वर्मा को चलना होगा। हालांकि ये डील मुकाम तक नहीं पहुंच पाई और वर्मा पटना हाई कोर्ट के जरिये राजा का प्रतिबंध हटवाने में सफल रहे।

अब सवाल है कि क्या बोर्ड ने पब्लिक रिलेशन कंपनी को बीच बचाव के लिए या उसके प्रचार के लिए नियुक्त किया? बोर्ड इस कंपनी को सालाना दो करोड़ रुपये देता है। यही नहीं, इसके करार को आगे बढ़ाने को लेकर जब बैठक होनी थी तो सीओए और सीईओ ने तीनों पदाधिकारियों से चर्चा किए बिना ही इसका करार आगे बढ़ा दिया था।’

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Posted By: Pradeep Sehgal

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