नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। कावेरी विवाद का असर चेन्नई सुपरकिंग्स के घरेलू मैचों पर पड़ा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने तय किया है कि उसके बाकी छह घरेलू मैच अब चेन्नई की जगह पुणे में आयोजित होंगे। कावेरी जल विवाद के कारण तमिलनाडु के राजनेता शुरू से आइपीएल मैचों के चेन्नई में आयोजन का विरोध कर रहे थे। स्पॉट फिक्सिंग मामले में दो साल के निलंबन के बाद आइपीएल में वापसी करने वाली सीएसके के मालिकों और प्रशंसकों के लिए यह जोरदार झटका है। पहले बीसीसीआइ चेन्नई से मैचों को शिफ्ट करने के पक्ष में नहीं था, लेकिन तमिझागा वझुवुरिमाई काची और प्रदर्शन कर रहे लोगों की एक धमकी के बाद चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिकों, आइपीएल गवर्निग काउंसिल और बीसीसीआइ के लोगों को ये फैसला लेना पड़ा।

बीसीसीआइ सूत्रों के मुताबिक चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिकों, आइपीएल गवर्निग काउंसिल और बीसीसीआइ ने मिलकर तय किया है कि सीएसके के बचे हुए मैच पुणे में आयोजित किए जाएं। पुणे में ही प्लेऑफ के दो मैच आयोजित हो रहे हैं और इस कारण इस स्टेडियम को वरीयता दी गई क्योंकि यहां पहले से ही मैचों को लेकर तैयारियां चल रही थीं। पुणे में 23 मई को एलिमिनेटर और 25 मई को क्वालीफायर-2 आयोजित होना था।

तो छोड़ देंगे स्टेडियम में सांप 

मंगलवार को तमिझागा वझुवुरिमाई काची (टीवीके) के समर्थकों और तमिल निर्देशकों के नए फोरम ने आइपीएल का विरोध करने का फैसला किया। टीवीके के कार्यकर्ताओं ने स्टेडियम का घेराव करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें तत्काल हटा दिया। इस दौरान टीवीके कार्यकर्ताओं ने आइपीएल मैच नहीं कराने के नारे लगाए। आइपीएल मैच का विरोध कर रहे कार्यकर्ता अपने हाथों में बैनर लिए थे जिन पर लिखा था कि हम आइपीएल नहीं चाहते, हम कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड चाहते हैं। इन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य में कावेरी जल विवाद से ध्यान भटकाने के लिए मुकाबलों का आयोजन कराया जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखकर मई 2015 के बाद पहली बार आइपीएल मुकाबले को आयोजित कर रहे चेपक स्टेडियम की सुरक्षा के लिए करीब 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। इसके अलावा कमांडो और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी मौजूद थे। इस संगठन के लोगों का कहना था कि अगर यहां अब और मैच आयोजित कराए गए तो वे स्टेडियम में सांप छोड़ देंगे।’

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पहले चार स्टेडियमों को चुना गया था

मंगलवार को चेपक स्टेडियम में सीएसके व केकेआर के मुकाबले के विरोध में जमकर प्रदर्शन हुए थे। कुछ दर्शकों ने मैच के बीच में सीएसके के खिलाड़ी फाफ डु प्लेसिस व रवींद्र जडेजा पर जूता भी फेंका था। इसको देखते हुए घरेलू फ्रेंचाइजी और बीसीसीआइ सकते में आ गया था। बुधवार की सुबह विशाखापत्तनम, त्रिवेंद्रम, पुणे और राजकोट में से किसी एक स्टेडियम में इन मैचों को कराने का निर्णय लिया गया। रात होते-होते पुणे के नाम पर मुहर लग गई। तमिलनाडु में कई संगठनों ने पहले ही चेन्नई से आइपीएल के मैचों की मेजबानी न करने को कहा था। वहां की परिस्थितियों के बाद बीसीसीआइ को अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बीसीसीआइ के एक पदाधिकारी ने कहा कि हमें राज्य के राजनीतिक माहौल और सुरक्षा की स्थितियों को दिमाग में रखकर ही आगे बढ़ना है। 20 अप्रैल से पहले चेन्नई को घरेलू मैदान पर किसी टीम से नहीं भिड़ना था और यही कारण है कि सीएसके के पास सारा सामान पुणे में शिफ्ट करने के लिए पर्याप्त समय है।

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Posted By: Pradeep Sehgal