Yashasvi Jaiswal के कोच ज्वाला सिंह का छलका दर्द, बोले- 'मैं सचिन और विराट के कोच जितना लकी नहीं'
यशस्वी जायसवाल के राष्ट्रीय टीम में आने से पहले तक करीब एक दशक तक कोच रहे ज्वाला सिंह का एक पाडकास्ट में दर्द फूटा है।
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यशस्वी जायसवाल

समय कम है?
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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारतीय बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल के राष्ट्रीय टीम में आने से पहले तक करीब एक दशक तक कोच रहे ज्वाला सिंह का एक पाडकास्ट में दर्द फूटा है। यशस्वी के करियर को चार चांद लगाने पर श्रेय न मिलने पर उन्होंने कहा कि यशस्वी अच्छा खेलता रहे, मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह विराट के कोच राजकुमार शर्मा और सचिन के बचपन के कोच रहे आचरेकर सर की तरह भाग्यशाली नहीं रहे, क्योंकि सचिन और विराट हर मंच पर अपने कोचों को सम्मान देते रहे हैं।
यशस्वी के करियर की शुरुआत पर बात करते हुए ज्वाला सिंह ने कहा कि वह यशस्वी को 2012 में मुंबई के आजाद मैदान से अपने मुंबई के सेंटा क्रूज स्थित घर लेकर आए थे। वह वहां के स्थानीय मैदान में कई परेशानियों के चलते खेल नहीं पाता था। पानी-पूरी व अन्य समानों की दुकानदानों पर काम करता था। यह सब सच है, लेकिन आज जिस तरह से इसे पेश किया जाता है, वह सही नहीं है।
मैंने 2012 से 2023 तक उसे अपने घर में परिवार के सदस्य की तरह रखा, इसलिए कोच से ज्यादा मैं उसके लिए एक अभिभावक था। ज्वाला सिंह ने कहा कि जब वह खुद गोरखपुर से मुंबई आए थे और चाहकर भी बड़े क्रिकेटर नहीं बन सके तो युवा क्रिकेटरों का भला करने में ही अपनी सफलता समझी। इसके चलते ही उन्होंने यशस्वी का सहयोग किया। आज यह सब कोई बोले या न बोले इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि पूरी दुनिया को पता है।
उन्होंने कहा कि यशस्वी के पिता की बात करूं तो उन्हें पता भी नहीं था कि यश्वस्वी मेरे घर पर था, उन्हें यह भी नहीं पता था कि वह कहां खेलता है, किस तरह करियर बना रहा है।
अब मुझसे बेहतर लोगों से ले सुझाव
ज्वाला सिंह ने वर्तमान में यशस्वी की खराब फार्म को लेकर यह भी कहा कि अब वह भारतीय टीम में खेलता है, मुझसे ज्यादा समझदार लोगों के बीच रहता है, तो बेहतर है कि अब उनसे ही सुझाव ले ले। हालांकि मुझे कोई पूछे तो कहूंगा कि वह अपने फुटवर्क पर काम करके और लेग में अधिक शॉट न खेलने की रणनीति पर काम करके फिर से बेहतर फार्म हासिल कर सकता है। उसमें प्रतिभा की कमी नहीं है, वह आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर रह चुका है। खराब फार्म का दौर सभी बल्लेबाजों का आता है।
