(सुनील गावस्कर का कालम)

एक हफ्ते से भी कम समय में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज के बाद वनडे सीरीज भी गंवा दी। टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका के इस अंतिम मोर्चे पर फतह हासिल करने की शुरुआत क्या सपनों सरीखे प्रदर्शन से की थी। लेकिन, ये शुरुआत एक बुरे सपने के तौर पर खत्म हुई क्योंकि टीम को नहीं पता था कि उसे मंजिल तक कैसे पहुंचना है। कई क्रिकेटीय कारणों के अलावा निश्चित तौर एक सबसे अहम बात तैयारियों की कमी भी रही। उपमहाद्वीप से दूर किसी भी विदेशी दौरे, खासकर एसईएनए (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया) देशों में ये बेहद अहम और जरूरी है कि टीम वहां जल्दी जाए और कुछ अभ्यास मैच खेले ताकि पिच, मौसम और वहां के वक्त के साथ तालमेल बैठा सके।

जब भारतीय टीम ने पिछले साल आस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक सीरीज जीती थी तब टीम इंडिया वहां काफी पहले पहुंच गई थी और प्रथम श्रेणी मैच में हिस्सा लिया था। आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में हिस्सा लेने से पहले टीम इंडिया वहां सफेद गेंद सीरीज भी खेल चुकी था। ऐसे में भारतीय खिलाड़ी अच्छी तरह तैयार हो गए थे। इसी वजह से गुलाबी गेंद टेस्ट में करारी शिकस्त के बाद भी वापसी करने में कामयाब रहे और भारतीय क्रिकेट इतिहास की महान सीरीज जीत दर्ज कर पाए। हो सकता है कि कोविड महामारी के चलते इस बार दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज से पहले कोई मैच आयोजित न कराया गया हो, ताकि कम से कम लोगों से खिलाड़ियों का संपर्क हो। हो सकता है कि दक्षिण अफ्रीका को हल्के में आंका गया हो। नतीजा चाहे जो हो, हकीकत यही है कि अंतिम मोर्चा इस बार भी फतह नहीं हो सका।

अब सीरीज में एक मुकाबला बचा है और अपने लाखों प्रशंसकों के लिए भारतीय टीम को इसमें हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी। अगर इसके लिए टीम में बदलाव की जरूरत है तो वो होने चाहिए। टीम में नई ऊर्जा लानी होगी। ऐसे खिलाड़ी जो हारने वाली टीम का हिस्सा नहीं हैं और न ही उनकी मानसिकता पर हार हावी है, वो तीसरे मैच का नतीजा भारत के पक्ष में करने में सबकुछ झोंकना चाहेंगे। अब वक्त आ गया है कि कमियों पर पर्दा डालने की बजाय इनमें सुधार करना होगा। 

Edited By: Sanjay Savern