नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय टीम ने साल 2014 में इंग्लैंड का दौरा किया था, जिसमें टीम को 5 टेस्ट मैचों में मेजबान टीम का सामना करना था। भारतीय बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन के कारण भारतीय टीम वो सीरीज 3-1 से हार गई थी। इस सीरीज में भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली शतक तो छोड़िए एक अर्धशतक तक नहीं जड़ पाए थे। उस सीरीज में उन्होंने 5 मैचों की 10 पारियों में 13.40 के औसत से सिर्फ 134 रन बनाए थे।

विराट कोहली ने अब इसी दौरे पर रही उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी असफलता का जिक्र मयंक अग्रवाल के साथ बीसीसीआइ के लिए की गई बातचीत के दौरान किया है। हालांकि, साल 2018 में इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम विराट कोहली ही सबसे सफल रहे थे। यहां तक कि वे उस सीरीज में दोनों टीमों की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे, लेकिन 2014 की खराब सीरीज के बाद वे कैसे इससे उबरे इसका खुलासा उन्होंने किया है।

मयंक के साथ बातचीत में विराट ने कहा है, "मैं 2018 की सीरीज में बतौर कप्तान और बतौर बल्लेबाज काफी नर्वस था, लेकिन मेरे लिए 2014 का इंग्लैंड दौरा मील का पत्थर था। कुछ लोग अच्छे दौरे को माइलस्टोन की तरह देखते हैं, लेकिन मेरे लिए बुरा दौरा माइलस्टोन था, क्योंकि मेरे लिए बहुत सारी चीजें खराब होती चली गई थीं। मैंने बिना किसी डर के टेस्ट सीरीज शुरू की थी, क्योंकि मैं उस समय व्हाइट बॉल क्रिकेट में अच्छा खेल रहा था, लेकिन टेस्ट में ऐसा नहीं हुआ।"

विराट ने आगे कहा, "उस दौरे के बाद मुझे आभास हुआ कि इसमें शांत और एकाग्र रहने की जरूरत है, लेकिन अगर वो दौरा मेरा खराब नहीं होता तो मैं अपने आप(बैटिंग पोजिशन) में शायद इतना बदलाव नहीं करता। ऐसा नहीं था कि मैं वहां की परिस्थितियों से वाकिफ नहीं था। मैंने पाया कि कठोर होने में कोई फायदा नहीं है। मैंने सीखा कि मेरी राइट हिप बाहर है, जिसकी वजह से मैं वो शॉट नहीं खेल पा रहा हूं, जो मुझे खेलने चाहिए।"

विराट ने बताया कि वे इंग्लैंड दौरे के बाद जब मुंबई आए तो सचिन तेंदुलकर से मिले थे। कुछ सेशन उनके साथ बिताने के बाद मुझे फर्क महसूस हुआ था और सचिन ने जो बताया था मैंने वो माना था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरा मेरे लिए अच्छा गया। वहीं, जब उनसे 2018 में इंग्लैंड दौरे पर बतौर बल्लेबाज मिली सफलता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मेरे दिमाग में 2014 का दौरा नहीं था, लेकिन मैं शुरुआत में ही प्रैक्टिस सेशन में गलती कर रहा था।"

विराट ने आगे कहा, "मैं जब प्रैक्टिस कर रहा था तो रवि भाई(रवि शास्त्री भारतीय टीम के कोच) ने देखा और बताया कि क्या करना। क्रीज से आगे खेलना है। फिर मुझे याद आया कि 2014 के दौरे के बाद रवि शास्त्री ने मुझे और धवन को अपने कमरे में बैट के साथ बुलाया था। उस समय उन्होंने कुछ छोटी-छोटी चीजें बताई थीं, जो बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं।" यही फायदा विराट कोहली को हुआ था और उन्होंने 2018 में इंग्लैंड दौरे पर 2 शतक और 3 अर्धशतकों के साथ 593 रन बनाए थे। विराट ने ये भी बताया कि उनको तत्कालीन कोच डंकन फ्लेचर ने भी बल्लेबाजी में सुधार के सुझाव दिए थे। 

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