भारतीय टीम इस समय इंग्लैंड में है और 1-3 से सीरीज में पीछे होने के कारण उसकी काफी आलोचना हो रही है। हालांकि टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने इस मैच से पहले कहा कि पिछले 10-15 साल में यह विदेश में प्रदर्शन करने वाली सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम हे। सुनील गावस्कर से लेकर सौरव गांगुली तक इससे इत्तेफाक नहीं रखते। राहुल द्रविड़ और गांगुली की कप्तानी में क्रिकेट खेलने वाले पूर्व भारतीय बल्लेबाज और अभी सोनी पिक्चर्स नेटव‌र्क्स के लिए कमेंट्री कर रहे मुहम्मद कैफ ने भी इसे मानने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि सचिन, गांगुली, द्रविड़ और लक्ष्मण की टीम से इसकी तुलना नहीं की जानी चाहिए। वर्तमान टीम में उस स्तर का सिर्फ एक खिलाड़ी विराट कोहली है। भारत-इंग्लैंड सीरीज को लेकर मुहम्मद कैफ से अभिषेक त्रिपाठी ने विशेष बातचीत की। पेश है मुख्य अंश-

-इंग्लैंड में भारतीय टीम के प्रदर्शन को कैसे आंकते हैं?

-जब टीम इंग्लैंड गई थी तो हमें लगा कि यह बहुत करीबी सीरीज होगी। टीम के पास अच्छे बल्लेबाज थे। टीम शीर्ष रैंकिंग के साथ वहां गई। इंग्लिश टीम के घरेलू हालात अच्छे नहीं थे। वह पाकिस्तान से घर में एक मैच हारे, सीरीज ड्रॉ रही। भारतीय बल्लेबाजों का फॉर्म भी इतना अच्छा था। उम्मीद थी कि भारत अच्छा खेलेगा। जिस तरह बल्लेबाजी हुई उसने हमें नीचा दिखाया। अगर सकारात्मक पहलू की बात करें तो गेंदबाजी अच्छी हुई। बुमराह ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। उन्होंने इससे पहले टेस्ट में ज्यादा गेंदबाजी नहीं की थी लेकिन जिस तरह से उन्होंने यहां प्रदर्शन किया उससे ऐसा लगा कि वह जैसे सब कुछ यहां सीखकर आए हों। शमी ने अच्छी गेंदबाजी की। अश्विन ने पहले टेस्ट में अच्छी गेंदबाजी की। बल्लेबाजी और स्लिप फील्डिंग के कारण हमें दिक्कत हुई। मैं तो यही कहूंगा कि दिक्कत इंग्लैंड को ज्यादा थीं। सीरीज शुरू होने से पहले उनके पास स्पिनर नहीं था। वह राशिद को लाए। मोइन अली को उन्होंने शुरुआत में खिलाया नहीं। कागजों पर भी उनके पास ऐसी टीम नहीं थी कि वह हमें डरा सकें। ओवरऑल हमने सीरीज जीतने का मौका गंवा दिया।

-भारत की ओपनिंग खराब रही। ऐसा क्या हुआ कि विराट के अलावा कोई भी बल्लेबाज ज्यादा स्कोर नहीं कर पाया?

-ओवरऑल अगर सीरीज की बात करें तो गेंद, बल्ले पर हावी रही। चाहे वह इंग्लैंड के बल्लेबाज हों या भारत के। अभी आप यह मैच देख रहे हैं तो यहां 60-70 ओवर के बाद भी गेंद मूव कर रही है। मुश्किल तो होनी ही थी, लेकिन इतनी बुरी तरह होगी इसकी उम्मीद नहीं थी। कोई ओपनर अर्धशतक भी नहीं लगा पाया। इतना खराब मैं नहीं आंक रहा था। परिस्थितियां कठिन थीं। लॉ‌र्ड्स में बारिश के बीच मैच खेला। भारत को एजबेस्टन में पहला टेस्ट जीतना चाहिए था जहां वह 31 रन से हार गए। वहां की पिच लॉ‌र्ड्स या और अन्य मैदानों की तुलना में अच्छी थी। मैं वहां खेला भी हूं। जब आप पहला टेस्ट हार जाते हैं तो आपका मोरल डाउन हो जाता है। हार के बाद आप बदलाव करते हैं। इसको आजमा लो, उसको आजमा लो। मैंने भी घरेलू क्रिकेट में कप्तानी की है। अगर आपको कोई बड़ा टूर्नामेंट जीतना है तो जितना लंबा हो सके एक जैसी टीम खिलाओ, लेकिन यहां वह हो नहीं पाया। पहला मैच हारने के बाद बदलाव करने लगे। पुजारा को पहले टेस्ट में नहीं खिलाया, फिर दूसरे टेस्ट में उनको लेकर आए तो धवन को हटा दिया। मैं यही कहूंगा कि हमने काफी मौके गंवाए हैं।

-विराट पिछले इंग्लैंड दौरे में एक अर्धशतक भी नहीं लगा पाए। उनका सबसे खराब दौरा रहा लेकिन इस सीरीज में वह 600 रन बनाने के करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने अपने अंदर क्या बदलाव किया?

-मैं देख पा रहा हूं कि उन्होंने दो बदलाव किए। एक तो वह अब कवर ड्राइव पर आउट नहीं हो रहे हैं। पिछली बार वह जेम्स एंडरसन की ऑफ स्टंप के बाहर गेंद पर कवर ड्राइव करने जाते या डिफेंस भी करते तो आउट हो जाते। उसकी वजह यह थी कि उनका बॉटम हैंड काफी टाइट जा रहा था। ऑफ स्टंप की बॉल पर जो कवर ड्राइव प्वाइंट की दिशा में मारना चाहिए था वह मिड ऑफ और मिड ऑन की तरफ मार रहे थे। उससे बल्ले का चेहरा बंद हो रहा था। उसमें उन्होंने सुधार किया। अब शॉट को टॉप हैंड से बहुत कंट्रोल कर रहे हैं। टॉप हैंड के अच्छे इस्तेमाल से गेंद को कवर की दिशा में अच्छा खेल रहे हैं। उन्होंने एक और बदलाव किया है बैट टैपिंग में। पिछली बार बैट टैप करके खेलने आने में वह लेट हो रहे थे। तब वह सिर्फ रिएक्शन से खेल रहे थे लेकिन अभी उनको समय मिल रहा है। वह बल्ला थोड़ा पहले से उठाकर खेल रहे हैं। उन्हें गेंद को हवा में पढ़ने का मौका मिल रहा है। हर बल्लेबाज को सीमिंग कंडीशन में इसकी जरूरत पड़ती है। बाकी क्लास और अनुभव तो उनके पास है ही। वह टी-20 और वनडे के मास्टर हैं लेकिन जब आप कभी-कभी थोड़ा सा बदलाव कर लेते हैं तो उससे काफी फर्क पड़ जाता है।

-क्या अंतिम एकादश में लगातार दबाव से टीम इंडिया के प्रदर्शन पर फर्क पड़ा? दक्षिण अफ्रीका में उप कप्तान रहाणे को बाहर करना, यहां पुजारा को बाहर करना?

-सच कहूं तो फर्क पड़ता है, अगर आपकी जगह सुरक्षित नहीं है। दक्षिण अफ्रीका में रहाणे को ही शुरुआत में दो मैच से हटाना। यह वैसा ही है कि आप मैच से पहले कहो, अभी हमारा आपसे काम नहीं पड़ रहा है, आप बाहर बैठो। विशेषकर कठिन दौरों पर यह नीति काम नहीं आती। अगर कोई टीम भारत में खेलने आ रही है, जहां की परिस्थितियों से आप परिचित हैं तो वहां कैसे भी बदलाव कर दो, किसी को भी खिला दो, उसमें आप निकल जाते हो। कठिन दौरे में जहां आपको पता है कि पिछली बार भी हम अच्छा नहीं खेले, सीमिंग कंडीशन है, जहां गेंद दिन भर मूव होता है, अगर वहां आप बल्लेबाज के दिमाग में यह दुविधा पैदा कर देंगे कि उसकी जगह अगले मैच में पक्की है या नहीं तो वह कम स्कोर का पीछा करते समय दिखाई देगा। मुझे तो यही कारण लगता है कि जब दबाव आया तो बल्लेबाज एक्सपोज हो गए। उनके दिमाग में दबाव ज्यादा है, सुरक्षा की भावना नहीं है। जब आप बदलाव करेंगे तो बल्लेबाज आपको बताएगा नहीं। वह कहेगा कि मैं झेल लूंगा, मेरे अंदर क्षमता है लेकिन उसके दिल में कुछ और होता है। उसके दिमाग में कहीं ना कहीं होता है कि अगर स्कोर नहीं करूंगा तो अगले मैच में बाहर हो जाऊंगा। उनमें असुरक्षा की भावना आती है।

-पूरी सीरीज में देखा कि भारतीय गेंदबाज पुछल्ले बल्लेबाजों को आउट नहीं कर पा रहे हैं?

-शीर्ष क्रम के बल्लेबाज जब बल्लेबाजी करते हैं तो आप क्षेत्ररक्षण देखिए। इस मैच में जब इंग्लैंड पहली पारी में 133/1 पर था तो हमें लगा कि टीम बड़ा स्कोर बनाएगी। हमने तब भी क्षेत्ररक्षण में दो स्लिप, गली, प्वांइट, कवर, मिड ऑफ, स्क्वॉयर लेग, मिड ऑन पर क्षेत्ररक्षक लगाया। बुमराह को कुक का विकेट मिला और फिर लगातार विकेट गिरे। जब निचले क्रम का बल्लेबाज आता है तो भारत यह नहीं करता। हमें लगता है कि वह मारेगा। हम फील्ड पीछे कर लेते हैं और वह एक रन ले लेता है। बटलर ने शुरुआत में शॉट नहीं मारा। जब आखिरी नंबर के बल्लेबाज एंडरसन आए तो उसने दो छक्के लगाए। हम पहले से यह अनुमान लगा रहे थे कि वह शुरुआत से मारेगा, लेकिन वह टी-20 स्टाइल में नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके से खेला। भारतीय टीम उसके दिमाग में चल रही रणनीति को समझ नहीं सकी। गेंदबाजी में दिक्कत नहीं थी, लेकिन हमने सही क्षेत्ररक्षण नहीं लगाया। जब ब्रॉड आउट हुआ तो हमारे क्षेत्ररक्षक ऊपर लगे थे। हमने उसको मजबूर किया शॉट मारने के लिए और वह आउट हुआ। वह जडेजा ने कर दिखाया। बाकी गेंदबाजों ने ऐसा नहीं किया।

-टीम के कोच रवि शास्त्री का कहना है कि यह पिछले 15 वर्षो में विदेश का दौरा करने वाली सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम है। आपने द्रविड़, गांगुली की कप्तानी में दौरे किए हैं। क्या रवि की बात सही है?

-देखिए मैं यह तो नहीं जानता, लेकिन अगर आप खिलाडि़यों की तुलना करेंगे तो ऐसा नहीं है। 2002 में जब मैं गांगुली की कप्तानी में इंग्लैंड में था तो हम वहां जीते। अभी के बल्लेबाजी कोच संजय बांगर ने ओपनिंग साझेदारी की। सहवाग भी उस टीम में थे। 2006 में जब हम वेस्टइंडीज में जीते तब राहुल द्रविड़ कप्तान थे। मैं था उस सीरीज में। उस सीरीज और इस सीरीज के खिलाडि़यों में तुलना करेंगे तो बहुत फर्क नजर आएगा। सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण, वे बड़े खिलाड़ी थे। अगर हम तब बाहर जीते तो उनमें वह तकनीक और क्षमता थी वहां खेलने की। अब टी-20 और वनडे का दौर है। अब लोग ज्यादा आक्रामक स्टाइल में खेलना पसंद करते हैं। हम यहां इसलिए आउट हुए। भारत में हम घरेलू विकेट में फ्लैट पिच पर खेलते हैं, यहां सीमिंग विकेट में खेल रहे हैं। उसमें तकनीक में बदलाव की मांग होती है। बड़े खिलाड़ी यह कर लेते हैं और बहुत लोग नहीं कर पाते हैं। उनकी बल्लेबाजी से तुलना मत करें। वह अलग स्तर के खिलाड़ी थे और अभी की टीम में विराट कोहली को छोड़कर उनके आसपास भी कोई नहीं है।

-हनुमा विहारी के चयन पर क्या कहेंगे?

-विहारी के साथ मैं घरेलू क्रिकेट खेला हूं। मैं आंध्र प्रदेश का कप्तान रहा हूं और वह वहीं से खेलते हैं। जब मैं उत्तर प्रदेश से खेलता था तो उनके खिलाफ भी खेला हूं। मैंने उनको आउट करने के लिए बाउंसर प्लान भी बनाया था। मैंने उन्हें करीब से देखा है। अच्छे बल्लेबाज हैं। तकनीकी तौर पर दक्ष हैं और दिमाग को शांत रखते हैं। इंग्लैंड में पैर को आगे लाकर डिफेंस किया, जो हर बल्लेबाज नहीं कर पाया है। उन्होंने अंदर आने वाली गेंद को अच्छी तरह खेला। उनका रिकॉर्ड देख लो, घरेलू क्रिकेट में 59 का औसत है। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में तिहरा शतक बनाया है और लंबे-लंबे रन मारते हैं। आंध्र के लिए पिछले दो साल से अच्छा खेले हैं और फॉर्म में हैं। बहुत सही समय में उन्हें मौका मिला, उन्होंने पहले ही टेस्ट में अर्धशतक लगाया। वह पूर्णत: टेस्ट बल्लेबाज हैं और उन्हें चार दिनी मैच खेलना पसंद हैं। वह पूरा दिन खड़े होकर बल्लेबाजी करना जानते हैं।

Posted By: Sanjay Savern