(गावस्कर का कॉलम )

दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में अपने बल्लेबाजी प्रदर्शन से श्रीलंका आत्मविश्वास हासिल करना चाहेगा। जिस पिच पर गेंद काफी टर्न कर रही थी, वहां पर कुशल मेंडिस और दिमुथ करुणारत्ने के नेतृत्व में उन्होंने अच्छा जवाबी हमला किया। दोनों ने शतक लगाया, लेकिन अन्य खिलाड़ी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। कैंडी मैदान पर करुणारत्ने ने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 176 रनों की शानदार पारी खेली थी। इसी पारी के दम पर श्रीलंका ने शानदार जीत दर्ज की थी। लंका न सिर्फ इस बल्लेबाज से बड़ी पारी की उम्मीद कर रहा होगा बल्कि वह यह भी चाहेगा कि कोहली टॉस हार जाएं ताकि इस सपाट पिच पर उन्हें पहले बल्लेबबाजी का मौका मिले।

हालांकि जिस ढंग से पिछले दो टेस्ट मैचों में भारत का प्रदर्शन रहा, यह प्रयास भी शायद काफी नहीं रहेंगे। सीरीज में अब तक भारत को कुछ संघर्ष नहीं करना पड़ा है। लंका के पास ऐसे गेंदबाज नहीं हैं, जो टीम इंडिया को दो बार आउट कर सकें। अगर वे ऐसा कर भी पाते हैं, तो भारतीय गेंदबाज छोटे स्कोर की भी रक्षा करने में सक्षम हैं। भारत की बल्लेबाजी शानदार रही है, हालांकि आलोचक ये कह सकते हैं कि वे कमजोर गेंदबाजी आक्रमण का सामना कर रहे हैं। पर सच्चाई यह है कि साधारण आक्रमण के सामने भी बल्लेबाज को रन बनाने ही पड़ते हैं।

पुजारा के रूप में भारत के पास ऐसा बल्लेबाज है, जिन्हें लंबे समय तक बल्लेबाजी करना पसंद है। अन्य बल्लेबाजों को यह पता है कि अगले दो साल काफी मुश्किल मुकाबलों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए वे पिच पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। निश्चित ही जडेजा की कमी खलेगी। अच्छी पिच पर भी उनकी गेंद पर बल्लेबाज खुलकर नहीं खेल सकते। इससे एक छोर से रन आने बंद हो जाते हैं। कुलदीप के आने से टीम में एक अच्छी वैरायटी शामिल होगी। भारत को स्लिप में कैंचिंग को सुधारना होगा, जब तक सीधे व नीचे की ओर झुककर नहीं खड़े होंगे, वे जूतों के पास आने वाले कैचों को छोड़ते रहेंगे। (पीएमजी)

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Posted By: Pradeep Sehgal

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