नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान व ओपनर बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर शिखर धवन को दूसरे टेस्ट मैच में खेलने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने पूछा कि धवन को टीम से बाहर करने का आधार क्या है जबकि उन्होंने पहले टेस्ट मैच में मुरली विजय व लोकेश राहुल के ज्यादा रन बनाए थे। 

पहले टेस्ट मैच में धवन ने दोनों पारियों में 39 रन बनाए थे। दूसरे टेस्ट में धवन और उमेश यादव को अंतिम ग्यारह में शामिल नहीं किया गया और उनकी जगह चेतेश्वर पुजारा व कुलदीप यादव को खेलने का मौका मिला। हालांकि विराट कोहली ने भी इस बदलाव के पीछे कोई ठोस वजह नहीं बताया। गावस्कर ने कहा कि वो धवन को दूसरे टेस्ट से बाहर किए जाने के फैसले से खुश नहीं हैं। मेरा कहना ये है कि अक्सर एक टेस्ट मैच के बाद धवन को ही क्यों बाहर कर दिया जाता है। दूसरे खिलाड़ियों को दोबारा मौका मिलता है और उन्हें भी दूसरी बार मौका मिलना चाहिए। पहले टेस्ट में देखें तो धवन ने मुरली विजय व लोकेश राहुल के मुकाबले ज्यादा रन बनाए थे। ऐसे में उन्हें टीम के बाहर करने का आधार क्या है। 

इससे पहले भी धवन विदेशी दौरों पर टीम से ड्रॉप किए जाते रहे हैं। वर्ष 2014 में इंग्लैंड दौरे पर भी उन्हें पहले तीन टेस्ट में ओपनिंग करने के बाद आखिरी दो टेस्ट मैच से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2014-15 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी चार टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी मैच में उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया था। इस वर्ष जनवरी में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर भी उन्हें आखिरी दो टेस्ट मैच में मौका नहीं दिया गया था। उन्हें सिर्फ केपटाउन टेस्ट में ही मौका मिला था। 

गावस्कर ने कहा कि धवन के टीम में रहने से बल्लेबाजी में  और वैरायटी आती है। टीम में छह स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों को खेलने का मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा चार गेंदबाज ऑलराउंडर के तौर पर हार्दिक पांड्या को शामिल किया जाना चाहिए। धवन बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और अगर वो दाएं हाथ के बल्लेबाज होते तो फिर ऑप्शन के तौर पर राहुल के नाम पर विचार किया जाना चाहिए था। उन्हें टीम में शामिल रखा जाना चाहिए था जिससे कि बल्लेबाजी को और मजबूती मिलती। 

Posted By: Sanjay Savern