नई दिल्ली, पीटीआइ। इंडियन प्रीमियर लीग के 14 सीजन की शुरुआत से पहले हुई नीलामी में साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों की उंची बोली लगी। क्रिस मौरिस, ग्लेन मैक्सवेल, झाय रिचर्डसन जैसे खिलाड़ियों काफी महंगे बिके। न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज साइमन डूल ने कहा है कि आइपीएल में ऑस्ट्रेलिया के दूसरे दर्जे के खिलाड़ियों के सामने उनके देश के क्रिकेटरों को हमेशा से नजरअंदाज कर दिया जाता रहा है।

डूल ने यह टिप्पणी डेवोन कॉनवे के आइपीएल नीलामी में नहीं चुने जाने के कुछ दिन बाद धमाकेदार बल्लेबाजी के संदर्भ में की। दक्षिण अफ्रीका में जन्में कॉनवे की 59 गेंदों पर खेली गई 99 रन की धमाकेदार पारी से न्यूजीलैंड ने क्राइस्टचर्च में सोमवार को पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 53 रनों से जीत दर्ज की। लेकिन डूल का मानना है कि न्यूजीलैंड के क्रिकेटरों का अच्छा प्रदर्शन भी मायने नहीं रखता।

भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कॉनवे की प्रशंसा में लिखा था कि कॉनवे केवल चार दिन की देरी हुई, लेकिन क्या शानदार पारी थी। इस पर डूल ने ट्वीट किया, 'पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि यह मायने रखता है। आइपीएल में वर्षो से दूसरे दर्जे के ऑस्ट्रेलियाई खिलाडि़यों के सामने न्यूजीलैंड के खिलाडि़यों को नजरअंदाज किया जाता रहा है। लगता है कि आइपीएल के बाहर केवल बिग बैश प्रतियोगिता ही ऐसी है जिसके प्रदर्शन पर गौर किया जाता है।'

कॉनवे का आधार मूल्य 50 लाख रुपये था, लेकिन किसी भी टीम ने उनमें दिलचस्पी नहीं दिखाई जबकि वह अपनी राष्ट्रीय टीम और अन्य टी-20 टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन कर रहे थे।

डूल ने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'मैंने किसी के नाम का जिक्र नहीं किया इसलिए ट्रोलिंग बंद करो। आइपीएल जब से शुरू हुआ तब से 94 ऑस्ट्रेलियाई खिलाडि़यों को 886 करोड़ रुपये में चुना गया जबकि न्यूजीलैंड के 31 खिलाड़ी ही चुने गए और उन पर 212 करोड़ रुपये खर्च किए गए। दोनों देशों के छह प्रथम श्रेणी टीमें हैं और दोनों की घरेलू टी-20 प्रतियोगिताएं हैं। यह बीबीएल के समय और उसे देखने से जुड़ा है।'

 

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