(वीवीएस लक्ष्मण का कॉलम)

भारत ने गर्व के साथ बांग्लादेश की टीम के खिलाफ शानदार वापसी करके सीरीज अपने नाम की और ऑस्ट्रेलिया में अगले साल होने वाले टी-20 विश्व कप के लिए संभावित खिलाडि़यों की पहचान करने की टीम प्रबंधन की खोज सही रास्ते पर है। नई दिल्ली में सीरीज के पहले टी-20 मैच में हार के बाद राजकोट मैच की जीत में युजवेंद्रा सिंह चहल और रोहित शर्मा ने अपना अहम योगदान दिया। सीरीज के निर्णायक मुकाबले में भारतीय युवा खिलाडि़यों ने दबाव में अच्छा प्रदर्शन किया और मौके का फायदा उठाया।

लोकेश राहुल ने नागपुर में बेहतरीन पारी खेली और उन्होंने बता दिया कि उन्हें इतना महत्व क्यों दिया जाता है। श्रेयस अय्यर ने भी ऐसी ही शानदार पारी खेली और नंबर चार के स्थान पर खुद को स्थापित किया। जब राहुल गेंदबाजों पर आक्रमण कर रहे थे तब अय्यर क्रीज पर जमने की कोशिश कर रहे थे। फिर इसके बाद जब अय्यर को खराब फॉर्म से जूझ रहे रिषभ पंत का साथ मिला तो वह मुख्य भूमिका में आ गए और आक्रामक अंदाज में खेलना शुरू कर दिया। उन्होंने न केवल अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि छठे गेंदबाज को भी निशाना बनाकर बुद्धिमत्ता दिखाई।

तीसरे मैच में टीम प्रबंधन ने क्रुणाल पांड्या को अंतिम एकादश से बाहर कर दिया था। भारी ओस के बाद 174 का स्कोर ऐसा नहीं था कि बांग्लादेश की टीम इसे हासिल नहीं कर पाती। एक समय मेहमान टीम दो विकेट पर 110 रन बनाकर मजबूत स्थिति में दिख रही थी, लेकिन इसके बाद रोहित ने अपने नेतृत्व कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मिथुन के आउट होने के बाद उपलब्ध विकल्पों का अच्छे से इस्तेमाल किया।

शिवम दुबे का केवल तीसरा अंतरराष्ट्रीय मैच था और वह बल्लेबाजी ऑलराउंडर हैं। उन्होंने अपनी गेंदबाजी की गति में मिश्रण किया और इसके बदले उन्हें तीन विकेट मिल गए, लेकिन असली स्टार दीपक चाहर थे जिन्होंने हैट्रिक लेकर टी-20 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। चाहर की अब तक की प्रगति आकर्षक रही है। वह अब पारी के किसी भी समय में विकेट लेने में सक्षम है। उनके पास बल्लेबाजों के दिमाग को पढ़ने की क्षमता है। उन्होंने मुख्य गेंदबाज की भूमिका को स्वीकार दिल से स्वीकार किया है और उनके प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन को बहुत खुशी दी होगी।

Posted By: Sanjay Savern

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप