नई दिल्ली, जेएनएन। ब्रिस्बेन टेस्ट मैच जीतने के साथ भी भारत ने अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में चार मैचों की टेस्ट सीरीज में कंगारू टीम को उसकी धरती पर लगातार दूसरी बार टेस्ट सीरीज में 2-1 से पटखनी दी। इस बेमिसाल जीत का श्रेय वैसे तो पूरी भारतीय टीम को जाता है, लेकिन ब्रिस्बेन टेस्ट मैच में भारतीय टीम के जीत के सबसे बड़े आधार चेतेश्वर पुजारा ही रहे। चौथी पारी में जब रोहित शर्मा का विकेट जल्दी गिर गया तो टीम इंडिया दवाब में आ गई थी। भारत को मैच के पांचवें दिन 328 रन के बड़े स्कोर को चेज करना था जो आसान तो कहीं से भी नहीं था। 

इस मुश्किल घड़ी में चेतेश्वुर पुजारा ने मुश्किल पिच पर 211 गेंदों का सामना करते हुए टीम के लिए 56 रन की साहसिक पारी खेलते हुए जीत का आधार तैयार किया और फिर भारत को जीत मिली। क्रिकेट पंडितों ने इस जीत को एतिहासिक जीत करार दिया तो वहीं भारत के हाथों गाबा में 32 साल के बाद कंगारू टीम को किसी टेस्ट मैच में हार मिली। पुजारा एक बार फिर से कंगारू बॉलिंग यूनिट के लिए सबसे बड़ी बाधा बने थे। 

बल्लेबाजी के दौरान चेतेश्वर पुजारा को पैट कमिंस ने अपनी घातक गेंदबाजी से कई बार हेलमेट पर गेंद मारी। इसके बाद मैच के पांचवें दिन के 49वें ओवर के दौरान जोस हेजलवुड की 135 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली गेंद पर उनके अंगूठे में भी चोट लगी, लेकिन वो चट्टान की तरह से खड़े रहे और शुभमन गिल के साथ मिलकर 100 से ज्यादा रनों की साझेदारी भी की। इनकी साझेदारी की वजह से भारत और मजबूत स्थिति में पहुंच गया। 

मैच के बाद रवि शास्त्री ने टीम इंडिया को ड्रेसिंग रूम में संबोधित करते हुए कहा कि, पुजारा आप इस मैच में जीत के लिए अल्टिमेट वॉरियर के तौर पर याद किए जाओगे। इसके अलावा रवि ने इस एतिहासिक जीत में पुजारा के रोल के लिए उनकी जमकर तारीफ की। भारत ने अपने कई स्टार खिलाड़ियों के टीम में नहीं होने के बावजूद अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में लगातार दूसरी बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत ली। वहीं रवि शास्त्री ने टीम के अन्य खिलाड़ियों के योगदान की भी जमकर सराहना की। 

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