(वीवीएस लक्ष्मण का कॉलम)

जिस तरह की क्षमता बांग्लादेश की टीम ने टी-20 सीरीज में दिखाई, वह टेस्ट सीरीज में दूर तक भी नहीं थी। यही वजह है कि बांग्लादेशी टीम तीन दिन के अंदर ही पहला टेस्ट हार गई। एक मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने मेहमान टीम पूरी तरह से नौसिखिया नजर आई। उनमें अनुभव की कमी थी और उनके विशेषज्ञों की पोल भी खुल गई।

भारत के तेज गेंदबाजों इशांत शर्मा, उमेश यादव और मुहम्मद शमी ने अच्छा प्रदर्शन किया। साथ ही रविचंद्रन अश्विन ने भी एक सामान्य सी पिच पर काफी अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन सभी का ध्यान पहले टेस्ट में एक युवा ने खींचा, जो पिछले 11 महीनों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार अपनी छाप छोड़ रहा है।

यह सोचते हुए भी अजीब लगता है कि सिर्फ दो वर्ष पहले मयंक अग्रवाल कर्नाटक की रणजी टीम में भी अपने स्थान को लेकर सुनिश्चित नहीं थे। लय से भटके मयंक भटक रहे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपनी मानसिकता, तकनीक में बदलाव किया। इसका नतीजा यह रहा कि उन्होंने एक महीने के अंदर ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक हजार से ज्यादा रन बना दिए।

नवंबर 2017 से अग्रवाल अपनी काबिलियत पर लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक, दक्षिण क्षेत्र और भारत-ए के लिए ढेरों रन बनाए। इससे उनके लिए भारतीय टीम में खेलने के दरवाजे खुल गए। उन्होंने पिछले दिसंबर टीम में स्थान बनाया और सलामी बल्लेबाज के तौर पर उभरते चले गए। अग्रवाल ना सिर्फ शतक, बल्कि शतक को दोहरे और दोहरे शतक को तिहरे शतक में बदलने की काबिलियत रखते हैं। जो भी उन्होंने अपने बुरे दिनों या घरेलू क्रिकेट में सीखा, वह उनके अब काम आ रहा है। पिछले चार टेस्ट में दो बार उन्होंने शतक को दोहरे शतक में तब्दील किया। टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए काफी लंबा इंतजार करने की वजह से वह जानते हैं कि संयम का क्या मोल है। यह उनकी बल्लेबाजी में भी साफ नजर आता है और वह एक अच्छे ढंग से अपनी पारी को आगे बढ़ाते हैं।

एक फ्रंट फुट बल्लेबाज जो हमेशा कवर डाइव पसंद करता है, वह अब अपनी बल्लेबाजी के अन्य हिस्सों में भी सुधार कर रहा है। खास तौर से छोटी गेंद के खिलाफ। एक ओपनिंग बल्लेबाज के तौर पर उनका स्पिन पर संतुलन कमाल का है। उनका फुटवर्क सकारात्मक है। वह ना सिर्फ कदम निकालकर चौका लगाते हैं, बल्कि क्र्रीज में घुसकर दोनों ओर स्क्वॉयर में भी खेलने की क्षमता रखते हैं। लेकिन, उनकी परिपक्वता का नमूना यही है कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुछ नया नहीं कर रहे हैं। वह घरेलू स्तर के तौर पर ही अपने रनों की गति बढ़ाए हैं।

मैं दूसरे टेस्ट का इंतजार नहीं कर सकता, जब भारतीय टीम पहले डे-नाइट टेस्ट में खेलकर इतिहास रचेगी और एक अंजान रास्ते का सफर रोमांचक होगा। तो क्यों नहीं कुछ अलग होना चाहिए?

Posted By: Sanjay Savern

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