सेंचुरियन, अभिषेक त्रिपाठी। भारतीय टीम इस समय दक्षिण अफ्रीका में है और वहां पर सिर्फ तेज गेंदबाजी की बात चल रही है। भारत ही नहीं दक्षिण अफ्रीका की भी टीम केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में हुए पहले टेस्ट मैच की दोनों पारियों में कुछ खास नहीं कर पाई थी। दक्षिण अफ्रीका ने जहां पहली पारी में 285 रन बनाए थे तो दूसरी पारी में वे 130 रन ही बना सके। भारतीय टीम पहली पारी में 209 और तो दूसरी पारी में 135 पर ऑलआउट हो गई। कुल मिलाकर दोनों टीम के बल्लेबाज तेज गेंदबाजों के सामने नतमस्तक हो गए। पहले टेस्ट के 40 में से 37 विकेट तेज गेंदबाजों को मिले। एक रनआउट हुआ तौर दो विकेट सिर्फ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को मिले।

एक बार फिर से दोनों टीमें सेंचुरियन के सुपर स्पोर्ट्स पार्क स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। उम्मीद की जा रही है कि यहां पर भी बाउंस होगा। इस मैच में जहां एक तरफ से मोर्नी मोर्केल, कैगिसो रबादा, वर्नोन फिलेंडर और क्रिस मौरिस जैसे गेंदबाज खेलेंगे, तो दूसरी ओर से इशांत शर्मा, भुवनेश्वर, शमी और बुमराह में से कोई तीन अंतिम एकादश का हिस्सा होंगे। ऐसे में दोनों टीमों के कप्तान से जब तेज गेंदबाजी पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें तेजी से नहीं, बल्कि बाउंस से डर लगता है।

150 किमी की रफ्तार पर होगी परेशानी 

जब द. अफ्रीकी कप्तान फाफ डु प्लेसिस से पूछा गया कि कितनी तेजी से आती गेंद आपको परेशान करती है तो उन्होंने कहा कि तेजी डराती नहीं है, जब तक कोई गेंद 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से न आए। अगर पिच में असमान उछाल हो और फुल लेंथ गेंद बाउंस करे और शॉर्ट पिच गेंद नीची रहे तो उसे खेलना कठिन होता है। ऐसे समय आपको कुछ अलग सोचना होता है।

असमान्य उछाल करेगी परेशान 

जब भारतीय कप्तान विराट से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जब विकेट कठिन हो और उस पर गेंदबाज 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी गेंद फेंक कर स्विंग करा रहा हो तो वह भी 150 किमी प्रति घंटे की तरह लगती है, लेकिन तब 140-150 किमी की रफ्तार से आती गेंदें भी मायने नहीं रखती।

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Posted By: Pradeep Sehgal