(सुनील गावस्कर का कॉलम)

चेन्नई की टीम के लिए टूर्नामेंट का ये सीजन अजीबोगरीब रहा है। मार्च से टूर्नामेंट के स्थगित होने और छह महीने के लॉकडाउन की वजह से टीम के खिलाड़ी खासकर सीनियर्स को मुश्किल से ही बल्ले और गेंद को पकड़ने का मौका मिला। ऐसी स्थिति से आकर सीधे लय हासिल करना दुनिया के अच्छे से अच्छे खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होता। हम टूर्नामेंट के शुरुआत में रोहित शर्मा, डेविड वॉर्नर और विराट कोहली के उदाहरण से इस बात को अच्छी तरह समझ सकते हैं। जब आप उम्रदराज होते हैं जो एक चीज खोते चले जाते हैं, वो है टाइमिंग। हालांकि इसे काफी हद तक लगातार प्रतियोगी क्रिकेट खेलकर कायम रखा जा सकता था, लेकिन लॉकडाउन के चलते ऐसा नहीं हो सका।

इसके बाद टीम ने अपने दो बड़े खिलाड़ी सुरेश रैना और हरभजन सिंह को गंवा दिया। वो भी टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले। इतने कम समय में इस तरह की प्रतिभा और अनुभव का विकल्प तलाशना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में टूर्नामेंट में एक भी गेंद फेंके बिना ये टीम बैकफुट पर आ गई। बावजूद इसके चेन्नई ने गत चैंपियन मुंबई को हराकर टूर्नामेंट का शानदार आगाज किया, लेकिन उसके बाद अपने रास्ते से भटक गई और अब ऐसी स्थिति में खुद को ले आई है जहां से प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करने की उम्मीद बहुत कम नजर आती है। क्वालीफाई करने के दबाव के बिना चेन्नई की टीम आजादी से खेल सकती है और बाकी बचे मैचों में अन्य टीमों का खेल खराब कर सकती है।

वहीं मुंबई की टीम धीमी शुरुआत करने के बाद लय पकड़ने के लिए जानी जाती है मगर इस बार टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है और पिछले मुकाबले में मिली हार विजयी लय हासिल करने की एक सूचक भर है। मुंबई टूर्नामेंट की सबसे संतुलित टीम है और उनका बदलाव सिर्फ गेंदबाजी में देखने को मिलता है। टीम को कप्तान रोहित शर्मा और सूर्य कुमार यादव से बड़े रनों की आस होगी। अकेले दम पर टीम को जीत के मुहाने पर ले आने वाली पारी खेलने के बाद इशान किशन वही गलतियां दोहराते नजर आ रहे हैं, जो पृथ्वी शॉ, रिषभ पंत जैसे अन्य युवा बल्लेबाज कर रहे हैं। ये सभी बल्लेबाज रन बनाने का सिर्फ एक तरीका जानते हैं और वो है पारी की शुरुआत से ही हवाई शॉट खेलना।

ये प्रयास एक बार तो सफल हो सकता है, लेकिन पिच को पढ़कर हालात के हिसाब से बल्लेबाजी करना ज्यादा फायदे का काम है। बुमराह ने अपनी घातक यॉर्कर की फिर से खोज कर ली है और ये खबर सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी अच्छी है। दो सुपरओवर वाले मैच में शमी ने भी बल्ला तोड़ने वाली यॉर्कर गेंदें की थीं।

अगर गति आपकी ताकत है तो एक गेंदबाज को यही काम करना चाहिए और यही वह नेट प्रैक्टिस के दौरान करते हैं। वह धीमी गेंदों का कितना अभ्यास करते हैं। जवाब है बहुत कम और यही वजह है कि उन पर उतना अधिक नियंत्रण नहीं रहता जितना कि तेज गेंदों पर रहता है। जब मैदान में दो ऐसी टीमें भिड़ रही हों, जिन्होंने 12 में से 7 खिताब जीते हैं तो ये मुकाबला हमेशा ही दर्शनीय होता है। ये मैच भी ऐसा ही जानदार होने वाला है। 

Edited By: Sanjay Savern