सुनील गावस्कर का कॉलम। पूरा देश इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में हम सभी को काफी सतर्क रहना चाहिए और डॉक्टरों से सलाह मशविरा करते रहना चाहिए। इस वायरस से बचाव के लिए बायो-बबल भी ठीक उसी तरह सुरक्षित नहीं है, जैसे कि टी-20 मैच में आप 200 रन बनाने के बाद भी नहीं कह सकते कि आप जीतने वाले हैं। इस वायरस से बचाव के लिए हमें काफी सतर्क और एकजुट होकर लड़ना होगा।

आइपीएल के 14वें सत्र ने अभी आधा सफर भी तय नहीं किया है। ऐसे में मुझे लगता है सभी टीमों के अलावा सनराइजर्स हैदराबाद की टीम की जीत की दिशा से कहीं ना कहीं भटक गई है। हालांकि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और मेरा ऐसा भी मानना है कि उनकी टीम जल्द ही पलटवार करेगी और बाकी सभी मैच जीतकर आइपीएल के मौजूदा सत्र के प्लेऑफ में अपना स्थान पक्का करेगी, क्योंकि हैदराबाद के पास विश्व के सर्वश्रेष्ठ टी-20 गेंदबाज जैसे कि राशिद खान हैं, जबकि बल्लेबाजी में उनके पास डेविड वार्नर, जॉनी बेयरस्टो और केन विलियमसन जैसे धाकड़ खिलाड़ी हैं।

वहीं, मध्यक्रम में उनके पास मनीष पांडे जैसे बेहतरीन मानसिकता वाले बल्लेबाज हैं। वह जबरदस्त खेल रहे हैं, लेकिन गलत समय पर आउट हो रहे हैं। फिनिशर के तौर पर अब्दुल समद जैसा युवा भरतीय बल्लेबाज है, जो शुरू में थोड़ा समय लेता है। हालांकि उसके अंदर बड़े-बड़े शॉट मारने की भरपूर क्षमता है। यहां तक कि आपके बड़े- बड़े हिटर बल्लेबाज जैसे कि क्रिस गेल, कीरोन पोलार्ड और आंद्रे रसेल भी शुरू में समय लेते हैं। कुछ गेंदें खेलने के बाद ये सभी बड़े-बड़े शॉट मारने के लिए खुल जाते हैं और गगनचुंबी छक्के बरसाते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर वे शुरू में थोड़ी डॉट गेंद खेल लेते हैं तो बाद में चौके-छक्के बरसाकर उसकी भरपाई कर लेंगे।

यूएई में हुए पिछले आइपीएल की तुलना में देखें तो अगर पिच थोड़ी भी तेज गेंदबाजी को मदद करती है तो भारतीय बल्लेबाजों के ऊपर बाउंसर की बौछार होने लगती है। यहां पर गेंदबाज अगर बल्लेबाज के सिर के थोड़ी ऊपर भी गेंद करता है तो एक अतिरिक्त गेंद और रन बल्लेबाज को मिलता है। ऐसे में बाउंसर गेंद अगर किसी बल्लेबाज से दूर होती है या वह उसे ऊंचाई की वजह से नहीं खेल पाता है तो वाइड दिया जाना चाहिए। क्योंकि मेरे हिसाब से यह टी-20 क्रिकेट में गेंदबाजों के साथ अन्याय हो रहा है। उनके लिए एक ऐसा नियम बनाना चाहिए।

वहीं, दूसरी चीज मुझे हैरान कर रही है कि ना सिर्फ विदेशी, बल्कि भारतीय बल्लेबाज भी स्पिन गेंदबाजों की रोंगवन और गुगली को नहीं पढ़ पा रहे हैं। मानता हूं कि कुछ नए गेंदबाज हैं जिन्हें उन्होने पहले इतना नहीं खेला है, लेकिन युजवेंद्रा सिंह चहल और अमित मिश्रा जैसे गेंदबाजों का नियमित तौर पर गुगली जैसी गेंदों से विकेट लेना चौंकाने वाली बात है। टूर्नामेंट में बल्लेबाज कट शॉट मारने के चक्कर में बोल्ड या एलबीडब्ल्यू हो रहे हैं।

सबसे अच्छी चीज यह देखने को मिली है कि भारतीय गेंदबाज यॉर्कर का बड़ी चतुराई से इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि वह बात अलग है कि एबी डिविलियर्स और रिषभ पंत जैसे बल्लेबाज गति का इस्तेमाल करके उसे भी बाउंड्री के लिए खेल देते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि गेंदबाजों के लिए सबसे अच्छी गेंद टी-20 क्रिकेट में यार्कर ही है। उन्हें इसका जमकर अभ्यास करना चाहिए क्योंकि मैच में सिर्फ 24 गेंदें डालने के लिए उन्हें करोड़ों की रकम दी जाती है। इसलिए अगर आपको यॉर्कर पर महारथ हासिल है तो इससे फर्क नहीं पड़ता है कि बल्लेबाज कौन है? हालांकि मैं मानता हूं कि यॉर्कर डालना काफी कठिन है, लेकिन उन्हें ऐसा करना सीखना होगा, क्योंकि आखिरकार टी-20 क्रिकेट तो बल्लेबाजों का खेल है।

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