(मोहिंदर अमरनाथ का कॉलम)

निसंदेह वेस्टइंडीज की टीम के पास शानदार खिलाड़ी हैं, लेकिन जैसे क्रिकेट का प्रारूप लंबा होता है वह कैरेबियाई टीम के लिए नुकसान से कम नहीं होता। भारतीय टीम इस वनडे सीरीज में दावेदार के साथ उतरेगी। 1980 में कैरेबियाई टीम सीरीज जीतने की प्रबल दावेदार होती थी और तब से अब दोनों टीमों के बीच यह अंतर बदल गया है।

वर्तमान में कुछ होनहार खिलाडि़यों के साथ वेस्टइंडीज की टीम युवा है लेकिन उनके साथ स्थिरता और अनुभव के मुद्दे जुड़े हैं। भारतीय टीम अभी संतुलित है और टीम के कई महत्वपूर्ण खिलाड़ी फॉर्म में हैं जिसकी शुरुआत कप्तान विराट कोहली से होती है। मैं विशेष रूप से मुहम्मद शमी से प्रभावित हुआ हूं जो अच्छी लय में है और अच्छे से गति में बदलाव का प्रयोग कर रहे हैं। जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में यह देखने में अच्छा है कि भारतीय टीम के पास पर्याप्त तेज गेंदबाज हैं। एक हिस्सा है जो चिंतित कर सकता है, वो विकेटकीपिंग है।

रिषभ पंत को शांत रहने की जरूरत है। हर बार उन्हें बल्लेबाजी करते समय बड़े शॉट खेलने के दबाव को महसूस नहीं करना चाहिए। उन्हें कई बार धैर्य रखना भी सीखना चाहिए। उनकी विकेटकीपिंग में भी सुधार की जरूरत है। मैंने कभी भी किसी विकेटकीपर को स्टंप के आगे गेंद को पकड़ते हुए नहीं देखा है। उन्हें अपनी तकनीक को सुधारने और गेंद को जल्दी पकड़ने से पहले उसका इंतजार करना चाहिए। पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन उन्हें अपने खेल में बदलाव करने की जरूरत है। घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने के बाद संजू सैमसन जैसे कई युवा क्रिकेटर अपनी जगह के लिए दस्तक दे रहे हैं।

लोकेश राहुल, मयंक अग्रवाल और रोहित शर्मा के साथ सभी प्रारूपों में टीम की ओपनिंग शानदार लय में है। राहुल वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के अंतिम टी-20 मैच में अपने प्रदर्शन से खुश होंगे। राहुल अब वनडे सीरीज में भी रन बनाते हैं तो उनके लिए अच्छा होगा। वर्तमान में यह भारतीय टीम अच्छी लग रही है और सीरीज जीतने की दावेदार है।

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