(वीवीएस लक्ष्मण का कॉलम)

निडर होकर भारत ने तीसरे टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका को एकतरफा मुकाबले में रौंद दिया। इसी के साथ भारत ने घर में लगातार 11वीं टेस्ट सीरीज जीती और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहली बार क्लीन स्वीप भी किया। दिल से कहूं तो भारत की एक पारी से जीत भी टीम के सामूहिक प्रदर्शन से मिली है, लेकिन रोहित शर्मा सभी में सबसे आगे थे।

अनुभव और परिपक्वता के साथ बल्लेबाजी करते हुए रोहित ने एक सही फैसला लिया था जब कैगिसो रबादा को इस पिच से मदद मिल रही थी और गेंद स्विंग हो रही थी तब रोहित बार-बार गेंद को छोड़ रहे थे और जब उन्हें जरूरत लगी तो उन्होंने अपने शॉट खेलें। वह अधिक रन बनाने के लिए बैकफुट पर खेलने में अधिक विश्वास करते हैं। वह इस सीरीज में अपनी खेल योजना के साथ आए थे और इसके साथ ही उन्होंने अनुशासन भी दिखाया। उन्होंने पहला दोहरा शतक लगाकर सबूत दे दिया था कि वह आसानी से संतुष्ट नहीं होने वाले हैं।

मैच में भारत की पकड़ को मजबूत करने के लिए उन्होंने अपने जोड़ीदार अजिंक्य रहाणे के साथ चौथे विकेट के लिए रिकॉर्ड साझेदारी की। रहाणे ने भी अच्छी शतकीय पारी खेली थी। वह हमेशा टीम की पारी को संभाल लेते हैं। वह अपना खेल खेलते हैं जो भारत की पारी के दौरान भी देखने को मिला जब टीम के 39 रन पर ही तीन विकेट गिर गए थे। स्पिन के खिलाफ उनकी मानसिकता स्पष्ट है और वह फुटवर्क का अच्छा इस्तेमाल करते हैं। वह इस चीज से पिछले कुछ समय में काफी परेशान हुए हैं।

पहली पारी में 500 के करीब स्कोर पहुंचाने के बाद स्पिन के मुकाबले तेज गेंदबाजों ने मेजबान टीम के लिए अच्छा काम किया। मुहम्मद शमी और उमेश यादव को विकेट लेते हुए देखना अच्छा लगता है। 'मैच की गेंद' वहीं थी जब उमेश ने पहली पारी में क्विंटन डिकॉक का विकेट निकाला था। डिकॉक शॉर्ट गेंदों को अच्छी तरह से खेलते हैं, लेकिन उमेश की गेंद का उनके पास कोई जवाब नहीं था। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कई वर्षो तक खेलने के बाद मुझे इस बात की खुशी थी कि शाहबाज नदीम ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। यह एक ऐसा बोनस था जिसमें वह अपने घरेलू मैदान पर पदार्पण कर रहे थे।

 

Posted By: Sanjay Savern

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