(क्रिस श्रीकांत का कॉलम)

मुझे लगता है कि दिल्ली में मिली हार को लेकर बहुत ज्यादा हाय-तौबा नहीं होनी चाहिए। टी—20 विश्व कप को देखते हुए इस तरह के प्रयोगों की जरूरत है और अगर आप अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम के साथ नहीं खेल रहे हो, तो हार को एक सीख के तौर पर लेना चाहिए। हालांकि टीम प्रबंधन को सही संयोजन जल्द से जल्द खोजना होगा। काम का बोझ भी एक अहम पहलू है, इसलिए टीम प्रबंधन को इस बारे में भी सोचना होगा। पहले की तरह इस बार भी भारतीय टीम पावरप्ले में रनों की गति को नहीं बढ़ा पाई। रोहित शर्मा जरूर रन गति को रफ्तार देते रहे हैं, लेकिन शिखर धवन तेज नहीं खेल पा रहे हैं, जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ रहा है।

मुझे धवन की एप्रोच देखकर ज्यादा निराशा हुई। सीनियर खिलाड़ी होने के बावजूद वह अपना प्राकृतिक खेल नहीं खेल पा रहे हैं। मैं उनकी जगह सीधे केएल राहुल को टीम में शामिल करता। रोहित और राहुल दोनों आक्रामक बल्लेबाज हैं और पावरप्ले में तेजी से रन बना सकते हैं। नंबर तीन पर विराट कोहली के बाद मैं चौथे नंबर पर रिषभ पंत को रखना चाहूंगा। कम से कम कुछ समय तक उन्हें मौका मिलना ही चाहिए। यह स्पष्ट है कि टी-20 में शीर्ष चार ही अहम भूमिका निभाते हैं। एक बार जब टीम में सभी को अपनी जगह पता होगी, तो विश्व कप में भारत का प्रदर्शन अच्छा ही होगा।

श्रीकांत ने कहा कि मेरे खेल के दिनों में कपिल देव और सुनील गावस्कर हमेशा मेरा समर्थन किया करते थे। वे अक्सर कहते थे कि मैदान में जाओ और खेलो, यह चिंता छोड़ दो कि टीम में तुम्हारी जगह पक्की है या नहीं। मैंने भारतीय क्रिकेट को जो भी योगदान दिया, यह इसी विश्वास का नतीजा था। पंत को भी इसी तरह के समर्थन की जरूरत है। टेस्ट क्रिकेट में साहा को लेकर आने के पीछे की वजह को मैं समझ सकता हूं, लेकिन सफेद गेंद के प्रारूप में पंत पहली पसंद होने चाहिए। धौनी से उनकी तुलना को बिलकुल बंद कर देना चाहिए। धौनी जैसे खिलाड़ी पीढि़यों में एक बार आते हैं और उनसे तुलना युवाओं के लिए ठीक नहीं।

Posted By: Sanjay Savern

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