नई दिल्ली, आइएएनएस। बीसीसीआइ और आइसीसी के बीच भारत में होने वाले आइसीसी टूर्नामेंट में टैक्स में छूट हमेशा से मुद्दा रहा है और, अब चीजों ने एक अलग खराब रुख ले लिया है क्योंकि आइसीसी ने भारतीय बोर्ड से इस बात के सबूत मांगे हैं कि उसने इस मुद्दे पर सरकार के साथ काम करने की कोशिश की थी। इस मामले से संबंध रखने वाले बीसीसीआइ के एक अधिकारी ने कहा कि इस समय जब पूरा विश्व कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहा है, तब इस तरह के ईमेल भेज कर भारतीय बोर्ड पर दबाव बनाना बेहद दुखद है।

अधिकारी ने कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इस समय जब सभी कुछ कोरोना वायरस की गिरफ्त में आ रहा है, तब ऐसी चीजें कैसे हो सकती हैं। यह आइसीसी के नेतृत्व की विफलता है और साफ संकेत है कि बदलाव निकट है। यह समय है जब शशांक मनोहर को जाना चाहिए और बीसीसीआइ को ऐसे किसी भी शख्स का साथ नहीं देना चाहिए जिसको उनका (मनोहर का) समर्थन प्राप्त हो।

बीसीसीआइ को भारत में 2021 में होने वाले टी-20 विश्व कप को लेकर 18 महीने पहले टैक्स में छूट को लेकर अपनी बात रखनी थी, इसका मतलब है कि अंतिम तारीख अप्रैल की थी, लेकिन कोरोना वायरस के कारण पूरा विश्व इस समय लॉकडाउन में है और इसी कारण भारतीय बोर्ड ने 30 जून तक का समय मांगा था।

आइसीसी के मुताबिक, आइसीसी बिजनेस कॉरपोरेशन (आइबीसी) तारीख को आगे बढ़ाने को लेकर राजी नही हुआ। आइबीसी में आइसीसी के सदस्य देशों के निदेशक होते हैं और रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं है। बीसीसीआइ अधिकारी ने कहा है कि अगर यह स्थिति है तो चैयरमेन शशांक मनोहर को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

अधिकारी ने कहा कि अगर यह सच है कि कुछ निदेशकों को इस बारे में जानकारी नहीं है तो यह काफी गंभीर मुद्दा है और यह आइसीसी/आइबीसी के बोर्ड स्तर पर अपराध है जिसकी जिम्मेदारी चेयरमैन को लेनी चाहिए। एक और अधिकारी ने कहा कि यह पूरा वाकया हैरानी वाला है खासकर आइसीसी का यह कहना कि आइबीसी तारीख बढ़ाने को लेकर राजी नहीं है।

उन्होंने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि उनके वकील जोनाथन हॉल ने लिखा है कि आइबीसी ने बीसीसीआइ की अपील को खारिज कर दिया है। अब सवाल यह है कि बोर्ड के बिना देखे और इसके लिए वोटिंग हुए बिना यह हुआ कैसे?

 

Posted By: Viplove Kumar

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