कोलकाता, प्रेट्र। बीसीसीआइ (BCCI) के भावी अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) से रिश्ते भले ही ठीक न हों लेकिन गांगुली ने कहा है कि कोच को दोबारा नियुक्ति की जरूरत नहीं है। शास्त्री को कोच चुनने वाली क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) को बोर्ड के लोकपाल डीके जैन ने हितों के टकराव में घसीटा था और ऐसी संभावनाएं जताई जा रही थीं कि अगर सीएसी का गठन अवैध घोषित होता है तो रवि शास्त्री की कुर्सी जा सकती है। गांगुली ने कहा है कि ऐसा करने की जरूरत नहीं है।

गांगुली ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इससे रवि शास्त्री के चयन में कुछ परेशानी आएगी। मैं हालांकि आश्वस्त नहीं हूं। जहां तक कि हमने तब भी कोच का चयन किया जब हितों के टकराव का मुद्दा था। वहीं सौरव गांगुली से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने बोर्ड का अध्यक्ष तय होने के बाद शास्त्री से बात की है तो सौरव गांगुली ने हंसते हुए कहा, क्यों? अब उन्होंने क्या किया। अगर लोकपाल सीएसी को हितों के टकराव का दोषी मानते हैं तो रवी शास्त्री को दोबारा नियुक्त करने की जरूरत है या नहीं इस पर प्रशासकों की समिति (सीओए) के अध्यक्ष विनोद राय ने टिप्पणी करने से मना कर दिया था। राय ने कहा था कि पहली बात तो यह काल्पनिक सवाल है। दूसरी बात, मेरा लोकपाल के फैसले से पहले कुछ भी बोलना गलत है।

आपको बता दें कि सौरव गांगुली आधिकारिक तौर पर अपना पद 23 अक्टूबर को ग्रहण करेंगे। बोर्ड की वार्षिक आम बैठक में उन्हें ये जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। गांगुली और शास्त्री के रिश्तों में साल 2016 में  तब तल्खी आ गई थी जब अनिल कुंबले को टीम इंडिया का कोच बना दिया गया था। शास्त्री ने भी इस पद के लिए अपनी अर्जी दी थी लेकिन क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी में शामिल गांगुली, सचिन व लक्ष्मण ने कुंबले को कोच पद के लिए चुना था। इसके बाद शास्त्री ने गांगुली के बारे में कहा था कि वो उनके इंटरव्यू के दौरान मौजूद नहीं थे। इसके बाद दोनों के संबंध तल्ख हो गए।

 

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