नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैचों की सीरीज को 2-1 से जीतकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। यह इस इसलिए संभव हो पाया क्योंकि सिडनी में खेले गए तीसरे टेस्ट में चोट के बाद भी हनुमा विहारी ने मैदान पर आर अश्विन के साथ टिककर मैच को ड्रॉ करवाया। हनुमा ने अपनी चोट के बारे में बात करते हुए बताया कि पेनकिलर लेने के बाद उनका पैर सुन्न हो गया था और वह कुछ भी महसूस नहीं कर रहे थे।

हनुमा ने सिडनी में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में चोट के बाद पेनकिलर लेकर ढाई घंटे से ज्यादा बल्लेबाजी की। हनुमा ने बताया, "मैंने एक पेनकिलर इंजेक्शन लिया था और फिर तैयार हो गया। मेरे दिमाग में यह चल रहा था कि यही वो पारी है जो टीम से हर चीज को लौटाने का मौका है। मैं अपने मन में सोच रहा था कि मुझे कुछ तो करना होगा। अपना असली चरित्र दिखाना होगा, अपने धैर्य और दृढ़ निश्चय को दिखाना होगा। मुझे अलगे ढाई घंटे तक बल्लेबाजी करना होगा।"

आगे उन्होंने कहा, "टी ब्रेक के दौरान मैंने इंजेक्शन लिया था। चाय काल के बाद मुझे दर्द होना बंद हो गया लेकिन मुझे दाएं पैरों में कमजोरी सी महसूस होने लगी थी। मैं अपने दाएं पैर को बिल्कुल भी महसूस नहीं कर पा रहा था। पेनकिलर ने पैर को सुन्न कर दिया था जिसका मतलब था कि जब मैं खड़ा हो रहा था तो मुझे दर्द महसूस नहीं हो रही थी लेकिन साथ ही मैं पैर को महसूस ही नहीं कर पा रहा था और ऐसे में जब मैं दौड़ रहा था तो दर्द होता था।।"

"मुझे तभी पता चल गया था कि मेरे लिए सीरीज खत्म हो गया। मुझे मालूम हो गया था कि कोई क्रैंप नहीं था। मुझे साफ पता चल गया था कि मेरा हैम्पस्ट्रिंग फट गया है क्योंकि मुझे ऐसा पहले भी हो चुका था। मैं जानता था कि कैसा महसूस होता है। मैं चल और दौड़ नहीं सकता।"

 

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