(गौतम गंभीर का कॉलम)। सिंतबर का महीना मेरे लिए कुछ खास यादें लेकर आया है। यह साल 2007 के नौवें महीने का वही समय है जब हमने आइसीसी टी-20 विश्व कप जीता था। तब अविश्वसनीय युवराज सिंह अपनी शानदार लय में थे। उस टूर्नामेंट और 2011 विश्व कप में उनके प्रदर्शन के लिए मैं बीसीसीआइ से 12 नंबर की जर्सी को रिटायर करने का आग्रह करता हूं जो उन्होंने पहनी थी। यह ऐसे क्रिकेटर के लिए सही सम्मान होगा।

शायद पहला टी-20 विश्व कप खेलना हमारे लिए काम कर गया। हमें नहीं पता था कि क्या आ रहा था, इसलिए भविष्य के बारे में चिंता करने के बजाय हमने सामने खड़ी अगली चुनौती पर ध्यान केंद्रित किया। मुझे याद है कि मैंने अपने प्रिय मित्र युवराज से इंग्लैंड के खिलाफ उन छह छक्के मारने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा था कि यार गौती बस हो गया, मैंने इसके लिए कभी रणनीति नहीं बनाई।

दरअसल युवराज जो कह रहे हैं वह यह है कि उन्होंने इसे सरल रखा। उन्होंने एक स्पष्ट दिमाग के साथ बल्लेबाजी की, योग्यता के आधार पर और निडर होकर खेले। युवराज के छह छक्कों और अनिल कुंबले के एक टेस्ट पारी में 10 विकेट लेने के रिकॉर्ड को दोहराना असंभव हो जाएगा और अभी तक इन करतबों के पीछे कोई विज्ञान और कोई विश्लेषण नहीं है। युवराज और कुंबले खेल के विशुद्ध दिग्गज हैं। अगर मुझे भारतीय क्रिकेट से कुछ लेना-देना होता तो मैं युवराज, हरभजन, वीवीएस लक्ष्मण, सचिन तेंदुलकर और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों को चुनता और उन्हें खेल की बेहतरी के लिए इस्तेमाल करता।

मेरा मतलब है कि चहल, वाशिंगटन सुंदर या कुलदीप यादव को सुझाव देने के लिए कुंबले या हरभजन से बेहतर कौन है। युवराज, रिषभ पंत को मेंटर क्यों नहीं कर सकते जिनकी अब निडर होकर खेलने की आलोचना हो रही है। युवी आसानी से रिषभ को पारी संवारने का महत्व समझा सकते हैं। दुर्भाग्य से हाल ही में संन्यास लेने वाले क्रिकेटरों के अनुभव में डुबकी लगाने की कोई नीति नहीं है। मेरे हिसाब ये सभी इस तरह की भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त हैं क्योंकि वे हाल ही में ड्रेसिंग रूम से बाहर आए हैं। उम्र का फासला बहुत ज्यादा नहीं है और हाल ही में संन्यास लेने वाले ये क्रिकेटर मौजूदा समय के ड्रेसिंग रूम की मांग और दबाव को समझते हैं।

व्यक्तिगत रूप से मैंने हमेशा विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका के लिए रिषभ से आगे संजू सैमसन का समर्थन किया है, लेकिन टीम प्रबंधन पंत के लिए, निडर से लापरवाह और उनके लिए बैकअप, जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहा है। यह एक युवा खिलाड़ी को संभालने का सही तरीका नहीं है। हर कोई चाहता है कि वह समझदारी भरी क्रिकेट खेले। मुझे नहीं पता कि इसका क्या मतलब है लेकिन मुझे यह पता है कि यह खिलाड़ी अब रन बनाने के बजाय अपना अस्तित्व बचाने के लिए खेल रहा है। बाहर से ऐसा लगता है कि उसकी मानसिकता सभी जगह है। किसी को उसके कंधे के ऊपर हाथ रखने की जरूरत है और उसे बताने की जरूरत है कि वह उसे ड्रेसिंग रूम में देखना चाहता है।

मैं उम्मीद करता हूं कि भारत अंतिम टी-20 में भी जीत हासिल करेगा। मुझे लगता है कि बेंगलुरु की पिच में संतुलन है। बल्लेबाजों के पक्ष में बहुत झुकी हुई पिच एक अच्छा रोमांच नहीं पेश करती है। क्या यह रिषभ के लिए आखिरी मौका होगा? इसमें उलझना भी एक हास्यास्पद बहस है।

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