नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआइ को पिछले कई सालों से प्रशासकों की समिति (CoA) चला रही थी, लेकिन जैसे ही सौरव गांगुली बीसीसीआइ के अध्यक्ष बने तो फिर ये समिति खत्म हो गई। अब इसी समिति के पूर्व सदस्य रामचंद्र गुहा ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर कुछ बड़े आरोप लगाए हैं। प्रसिद्ध इतिहासकार ने दावा किया है कि भारतीय क्रिकेट में भाई-भतीजावाद एक प्रमुख चिंता है।

2017 में भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीओए के सदस्यों में से एक के रूप में नियुक्त रामचंद्र गुहा ने बीसीसीआइ के प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आधार साझा किया। गुहा ने अपनी नई किताब 'The Commonwealth of Cricket: A Lifelong Love Affair with the Most Subtle and Sophisticated Game Known to Humankind' में अपने कार्यकाल के बारे में भी लिखा है, जब वे प्रशासकों की समिति के सदस्य थे, जो बीसीसीआइ चलाती थी।

गुहा ने दैनिक जागरण के सहयोगी मिड-डे को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि बीसीसीआइ के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और गृह मंत्री अमित शाह 'भारतीय क्रिकेट' को चला रहे हैं। उन्होंने उस प्रणाली की भी आलोचना की जो रणजी ट्रॉफी के खिलाड़ियों को समय पर भुगतान करने में विफल रही है। उन्होंने कहा है, "एन श्रीनिवासन और अमित शाह आज प्रभावी रूप से भारतीय क्रिकेट को चला रहे हैं। राज्य संघ किसी की बेटी, किसी के बेटे द्वारा चलाया जाता है। बोर्ड साजिश और भाई-भतीजावाद में डूबा हुआ है और रणजी ट्रॉफी खिलाड़ियों को उनका बकाया चुकाने में बहुत देरी हो रही है। जिन सुधारों की आशा की गई थी, वे नहीं हुए।"

गुहा ने हितों के मुद्दे के टकराव के बारे में भी बात की और इसे इंडियन क्रिकेट के प्रबंधन में 'अभिशाप' करार दिया। उन्होंने कहा, "सबसे बड़ा अभिशाप नहीं; यह एक अभिशाप है। आज गांगुली को देखो-बोर्ड के प्रमुख और कुछ क्रिकेट फैंटेसी खेल का प्रतिनिधित्व करते हैं।" गुहा ने कहा कि भारतीय क्रिकेटरों के बीच पैसे के लिए इस तरह का लालच चौंकाने वाला है। गुहा ने कहा है, "मेरी किताब में सबसे ज्यादा कहानी बिशन सिंह बेदी के बारे में है, जिसमें कहा गया है कि वह काबुल (अफगानिस्तान के क्रिकेटरों को कोच करने) के लिए खुश हैं। उनको क्रिकेट से मतलब है पैसों से नहीं। गांगुली को थोड़े अतिरिक्त पैसे के लिए ये सब क्यों करना चाहिए? यदि बोर्ड के अध्यक्ष इस तरह का व्यवहार करते हैं तो नैतिक मानक नीचे चले जाते हैं।"

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