नई दिल्ली, पीटीआइ। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर ने आज की युवा पीढ़ी के दुर्भाग्यशाली बताया है। वेंगसरकर का मानना है कि आजकल इतनी ज्यादा इंटरनेशनल क्रिकेट खेली जाती है कि उनको घरेलू टूर्नामेंट में खेलने का मौका नहीं मिलता है। वेंगसरकर ने कहा वो टीम इंडिया में जगह बनाने के बाद भी घरेलू क्रिकेट में खेलते थे। 

पूर्व चयनकर्ता ने अपने जन्मदिन पर पीटीआइ से बात की और आज की पीढ़ी के क्रिकेटरों के ज्यादा क्रिकेट खेलने पर दुख जताया। उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से आज की इस पीढ़ी को घरेलू क्रिकेट में खेलने का मौका ही नहीं मिल पाता। अगर आप घरेलू क्रिकेट में नहीं खेलते हैं तो फिर आपको संयोजन बिठाना पड़ता है। तेज गेंदबाजी और स्पिनर गेंदबाजी यह सबकुछ बस समायोजित करने पर होता है। सबसे अहम बात यही है कि आपको रन बनाना है चाहे आप लॉर्ड्स, हेडिंग्ले या फिर इडेन गार्डन्स मे खेलते हैं।" 

"आज कल के दिनों में बहुत ज्यादा इंटरनेशनल क्रिकेट खेली जाती है। मेरे वक्त में मेरे पास घरेलू क्रिकेट में खेलने का बहुत सारा वक्त होता था, जैसे कि रणजी ट्रॉफी और दलिप ट्रॉफी। मैंने दादर यूनियन की तरफ से क्लब क्रिकेट काफी खेला है। मैं तो जब भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बना चुका था तब भी ऑफिस क्रिकेट खेला करता था।" 

"घरेलू क्रिकेट में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्पिन गेंदबाजों को खेलने की वजह से ही वेंगसरकर इसने बेहतरीन बल्लेबाज बन पाए। उन्होंने बताया कि कैसे उनको रणजी के सीजन में अपनी ही टीम के सबसे बेहतरीन स्पिनर गेंदबाजों का सामना करने का मौका मिलता था।" 

"घरेलू सीजन में हमें बिशन सिंह बेदी, इरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर और रजिंदर गोयल जैसे गेंदबाजों को रणजी मुकाबलों में खेलने का मौका मिलता था। आपको उन वर्ल्ड क्लास गेंदबाजों के आगे अपनी बल्लेबाजी का स्तर काफी उंचा करना पड़ता था।" 

 

Posted By: Viplove Kumar

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