कोलकाता। भारत-पाक द्विपक्षीय सीरीज पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने गेंद बीसीसीआइ के पाले में डाल दी है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) की बैठक में शामिल होने कोलकाता पहुंचे पीसीबी प्रमुख नजम सेठी ने कहा कि उपमहाद्वीप के लोगों की खातिर दोनों देशों के बीच क्रिकेट होना जरूरी है। इस पर बीसीसीआइ को फैसला लेना होगा। मुझे उम्मीद है कि देर-सवेर बेहतर सोच पैदा होगी और दोनों देश फिर से अच्छी क्रिकेट खेलेंगे।'

भारत के द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलने पर समझौते के उल्लंघन का हवाला देकर बीसीसीआइ पर 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर का दावा ठोकने के मामले पर सेठी ने सिर्फ इतना ही कहा कि फैसला उनके पक्ष में आने पर फ्यूचर टूर प्रोग्राम (पीएफटी) में बदलाव करना ही पड़ेगा।' इस मामले पर आइसीसी का तीन सदस्यीय पैनल अक्टूबर में सुनवाई करेगा।

मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग एवं गेंद से छेडखानी के मामले पर सेठी ने कहा कि इन सबके लिए बेहद सख्त सजा होनी चाहिए। हमने दो-तीन खिलाडियों को कड़ी सजा दी है। मुझे उम्मीद हैं कि दूसरे क्रिकेट बोर्ड भी ऐसा ही रुख अख्तियार करेंगे।

पीसीबी प्रमुख ने रोया वीजा का रोना

पीसीबी प्रमुख ने भारत आने में उन्हें वीजा को लेकर काफी परेशानी होने की शिकायत की है। दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए बड़ा मसला मानने से इन्कार किया है। सेठी ने कहा कि हमें लाहौर से कोलकाता आने में 19 घंटे लग गए। हमें लाहौर से दुबई, दुबई से दिल्ली और वहां से कोलकाता आना पड़ा। अगर हमें सही वीजा दिया गया होता तो हम दो घंटे में लाहौर से यहां पहुंच गए होते।' इसका जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि वीजा देने की जो प्रक्रिया है, उसी का पालन किया गया है। दोनों देशों के लोगों को वीजा देने की एक निश्चित प्रक्रिया है। वे (सेठी) एक निर्दिष्ट कारण से कोलकाता में बैठक में भाग लेने आए हैं, इसलिए उन्हें एक शहर के लिए वीजा दिया गया है। वे कुछ भी कह सकते हैं अथवा शिकायत कर सकते हैं लेकिन इसमें कुछ भी नया नहीं है।' गौरतलब है कि 2015 के बाद पहली बार पीसीबी का कोई प्रतिनिधि मंडल भारत पहुंचा है।

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Posted By: Sanjay Savern