नई दिल्ली, जेएनएन। पद्मश्री सम्मान प्राप्त इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली पर हमला बोला है। उन्होंने अपने एक लेख में बीसीसीआइ में कायम विराट के दबदबे को बताते हुए कहा है कि, ‘विराट की तो बीसीसीआइ इतनी पूजा करता है जितनी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट स्वयं पीएम मोदी की भी नहीं करती होगी।'

विराट कोहली इस समय दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गयी भारतीय टीम की कमान संभाल रहे हैं। जहां 3 टेस्ट मैचों की सीरीज में वो 2-0 से सीरीज गवां चुके हैं। तीसरा और आखिरी टेस्ट मैच जोहानिसबर्ग में 24 जनवरी से खेला जाएगा। इस टेस्ट मैच को जीतकर भारतीय टीम अपनी साख बचाने की कोशिश करेगी। रामचंद्र गुहा ने विराट कोहली की तारीफ करते हुए उन्हें भारत के क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज करार दिया है। लेकिन अपने इस ऑर्टिकल में उन्होंने भारतीय कप्तान पर ढेर सारे सवाल भी खड़े कर दिये हैं।

आपको बता दें कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों को बीसीसीआई में लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो प्रशासनिक समिति की नियुक्त की थी। इस प्रशासनिक समिति में रामचंद्र गुहा भी सदस्य थे। बाद में उन्होंने इस समिति से इस्तीफा दे दिया था।

BCCI के अधिकारी, सेलेक्टर और कोचिंग स्टाफ पर उठाए सवाल

अपने इस लेख में रामचंद्र गुहा ने बीसीसीआइ के अधिकारियों, चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ पर भी सवाल उठाए हैं उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि,'बीसीसीआइ के अधिकारी कोहली की भक्ति में इस तरह चूर हैं कि शायद भारतीय कैबिनेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस तरह नहीं पूजा जाता होगा।' गुहा ने रवि शास्त्री को कमजोर कोच कहते हुए लिखा है, 'रवि शास्त्री सरीखे कमजोर कोच की कमियां घरेलू सीरीज के दौरान छिप गईं, लेकिन अब टीम विदेशी दौरों पर है और सच्चाई सामने आने लगी है।'

विराट के दबदबे के आगे समर्पित था बोर्ड

उन्होंने कोच चयन के मुद्दे पर लिखा, 'सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की मौजूदगी वाली सलाहकार समिति, जिसके कामकाज पर विनोद राय की भी नजर थी। उसने अनिल कुंबले को हटाकर रवि शास्त्री जैसे साधारण क्रिकेटर को इसलिए कोच बना दिया क्योंकि कप्तान उन्हें चाहता था। यह विराट का दबदबा ही था जिसके आगे बोर्ड समर्पित था।'  कोच चुनने के मुद्दे पर हमलावर होते हुए गुहा ने आगे लिखा कि, कोच चुने जाने के दौरान टॉम मूडी जैसे अनुभवी विकल्प भी थे। इसके बावजूद एक ऐसे शख्स को कोच चुना गया, जिसके करियर का प्रदर्शन औसत ही था।

तो ये था कुंबले की विदाई का कारण!

यहीं पर उन्होंने उन्होंने पूर्व टेस्ट कप्तान अनिल कुंबले की तारीफ करते हुए लिखा कि, 'कुंबले भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े मैच विनर गेंदबाज थे। कुंबले अपनी भूमिका और टीम में अपने कद को अच्छी तरह से पहचानते थे। इसलिए वो हर बार कप्तान की बात नहीं मानते थे। कुंबले देश में इकलौते ऐसे शख्स थे, जो रुतबे में विराट की बराबरी पर रहे। शायद यही उनकी विदाई का कारण भी बना।'

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Posted By: Ravindra Pratap Sing

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