मुंबई, पीटीआइ। इंटरनेशनल क्रिकेट में जब से तकनीक का इस्तेमाल शुरू हुआ है इसमें गलती की गुंजाइश कम हुई है। फील्ड अंपायर के फैसले को अब खिलाड़ियों के पास चुनौती देने की सुविधा है। इससे कई बार मैच में अहम फैसले को बदला जा सकता है। पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले का मानना है कि तकनीक से खेल और बेहतर हुआ है और अगर हम इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे को पीछे रह जाएंगे।

दिग्गज लेग स्पिनर और भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले का मानना है कि भविष्य में फैसलों पर तकनीक का प्रभाव और अधिक होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कोई भी खिलाड़ी कृत्रिम बुद्धि (डाटा इंटेलीजेंस) की मौजूदगी को खारिज नहीं कर सकेगा। टीम इंडिया के पूर्व कोच कुंबले ने डीआरएस का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे इसने फैसले लेने की प्रक्रिया बदल दी है।

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उन्होंने कहा, 'क्रिकेट में डीआरएस का प्रभाव है और मुझे यकीन है कि आने वाले समय में फैसलों पर तकनीक का प्रभाव और बढे़गा। इसके अलावा इस पहल का हिस्सा बनने के लिए खिलाड़ियों की स्वीकृति भी अहम है, वरना आप पीछे रह जाते। मुझे पता है कि इस पर अभी भी बहस जारी है कि खेल में तकनीक का इतना इस्तेमाल होना चाहिए या अपने विश्वास से काम लेना चाहिए कि मैंने गेंद को देखा और मारा।

यह सरल तरीका है, लेकिन मुझे लगता है कि अगर हमने खेल को बेहतर बनाने के लिए मौजूद तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया तो हम पीछे रह जाएंगे। मुझे नहीं लगता कि सिर्फ प्रसारक ही खेलों में तकनीक का इस्तेमाल करेंगे, बल्कि महासंघ भी खेलों में तकनीक के समावेश के नए तरीके तलाशेंगे। अब ओटीटी प्लेटफार्म के आने से इसकी संभावना बढ़ गई है।' 

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Edited By: Viplove Kumar