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छत्तीसगढ़: बूढ़ापारा में पुराना मकान ढहा, 50 से ज्यादा घरों की बिजली गुल

Published: Mon, 26 Oct 2026 10:23 PM (IST)

रायपुर के बूढ़ापारा में एक पुराने मकान को तोड़ते समय वह ढह गया, जिससे रास्ते बंद हो गए और 50 से अधिक घरों की बिजली गुल हो गई।

बूढ़ापारा में पुराना मकान ढहने से रास्ते बंद

बूढ़ापारा में पुराना मकान ढहने से रास्ते बंद

HighLights

  1. बूढ़ापारा में पुराना मकान ढहने से रास्ते बंद

  2. 50 से अधिक घरों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई

  3. जर्जर भवनों पर निगम की कार्रवाई पर सवाल

डिजिटल डेस्क, रायपुर। राजधानी में जर्जर मकानों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बूढ़ापारा इलाके में सोमवार को पुराने मकान को तोड़ने के दौरान उसका हिस्सा भरभराकर गिर गया।

मलबे के कारण आसपास के कई रास्ते बंद हो गए, वहीं 50 से ज्यादा घरों की बिजली गुल हो गई। घटना के बाद स्थानीय रहवासियों में नाराजगी है। आरोप है कि मकान तोड़ने में लगे मजदूर और ठेकेदार मौके से चले गए। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।

जानकारी के अनुसार, बूढ़ापारा में डा. कुकरेजा के पुराने मकान को राजधानी ज्वेलर्स ने खरीदा था। मकान को तोड़ने का काम चल रहा था, इसी दौरान वह ढह गया। मलबा सड़क पर फैलने से आवागमन प्रभावित हुआ।

बिजली आपूर्ति बाधित होने से आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना के बाद लोगों ने नाराजगी जताते हुए मकान तोड़ने के दौरान सुरक्षा इंतजामों और जिम्मेदारों की मौजूदगी पर सवाल उठाए।

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150 से ज्यादा जर्जर भवन, 35 से ज्यादा अति जर्जर

राजधानी में जर्जर भवनों का खतरा पहले से सामने है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर में 150 से ज्यादा जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे, जिनमें 35 से ज्यादा अति जर्जर और तत्काल हटाए जाने योग्य हैं।

इनमें सदर बाजार, मालवीय रोड-गोलबाजार, फूल चौक, सद्दानी चौक-बूढ़ापारा, सत्ती बाजार और बैजनाथपारा जैसे व्यस्त इलाके भी शामिल हैं।

निगम की कार्रवाई अब तक नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने और भवन मालिकों को अपने खर्च पर मकान हटाने के निर्देश देने तक सीमित रहती है।

खर्च बचा रहा निगम

अधिकारियों ने पहले यह भी कहा था कि निगम के पास जर्जर भवनों को गिराने के लिए अलग बजट नहीं है। ऐसे में बूढ़ापारा में मकान ढहने की घटना ने फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि खतरा बने भवनों को हटाने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा।

नोटिस के बाद भी यदि भवन नहीं हटाए जाते, तो उनकी निगरानी और समय पर कार्रवाई की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह जांच का विषय है।

मकान तोड़ने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

बूढ़ापारा में मकान तोड़ने के दौरान उसके ढहने से रास्ते बंद होने और 50 से ज्यादा घरों की बिजली गुल होने की जानकारी सामने आई है।

अब यह जांच जरूरी है कि ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं और बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति क्यों बनी।

निगम को जर्जर भवनों की सूची की समीक्षा के साथ ऐसे भवनों को हटाने की प्रक्रिया और ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर भी स्पष्ट कार्रवाई करनी होगी।