रायपुर। राज्य सरकार 15 नवंबर से धान खरीदी करेगी। मंगलवार को राज्य केबिनेट ने धान खरीदी की दर 1470 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित की है। यह कीमत कॉमन ग्रेड के लिए है। ए ग्रेड के धान के लिए 1510 रुपए दिए जाएंगे। खरीदी 31 जनवरी 2017 तक होगी।


संकेत हैं कि पिछले साल की तरह ही इस साल भी किसानों को धान खरीदी पर बोनस नहीं दिया जाएगा, क्योंकि धान खरीदी के बारे में फैसला करते समय कैबिनेट में बोनस पर किसी प्रकार का विचार नहीं किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में मक्का की खरीदी की भी दर तय की गई। इसके लिए 1365 रुपए प्रति क्विंटल दिए जाएंगे। खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहिले ने बताया कि किसानों के धान बीज की खरीदी 1 मार्च 2017 से 30 अप्रैल 2017 तक की जाएगी। पिछले कुछ सालों में यह भी देखा गया है।

65 लाख टन धान खरीदने का है अनुमान
पड़ोसी राज्य से धान लाकर सीमावर्ती जिलों के खरीदी केंद्र में बेचा जाता है। इसलिए ऐसे जिलों के कलेक्टर सीमा पर चेकिंग दल तैनात करेंगे। 1 नवंबर 2016 से 30 अप्रैल 2017 तक दूसरे राज्यों से आयात होने वाला धान आयुक्त, खाद्य विभाग की अनुमति से ही आएगा। सुपर फाइन किस्म के धान के आयात की ही अनुमति दी गई है। यह 1700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। धान खरीदी की अधिकतम सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ रखी गई है। राज्य भर में लगभग 65 लाख टन की धान की खरीदी किए जाने का अनुमान है।

फसल बीमा की राशि तत्काल दी जाएगी :

फसल बीमा योजना के पात्र किसानों को तत्काल बीमा की राशि देने कहा गया है। इसमें 11 जिलों को राशि आबंटित की जा चुकी है। कैबिनेट ने पुलिस पिटाई से दलित युवक सतीश नौरंगे की मौत के मामले की एक सदस्यीय जांच आयोग के गठन को भी मंजूरी दी।


कस्टम मिलिंग नीति में बदलाव नहीं :

कस्टम मिलिंग पालिसी में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। सौ फीसदी प्रतिभूति व कैश गारंटी जमा करने के बाद ही धान दिया जाएगा। मिलर को दो माह की मिलिंग क्षमता के बराबर धान की कस्टम मिलिंग करने पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। क्षमता से अधिक मिलिंग करने पर अरवा चावल के लिए 40 रुपए प्रति क्विंटल और उसना चावल के लिए 10 रुपए प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। अगर मिलर 6 माह की मिलिंग क्षमता से अधिक धान की कस्टम मिलिंग करता है तो उसे अरवा चावल पर 45 रुपए प्रति क्विंटल और उसना चावल पर 15 रुपए प्रति क्विंटल की दर से चावल दिया जाएगा।


मिलर ने धान उठाने से किया मना :

इधर कैबिनेट के फैसले पर राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने कहा है कि पिछले 15 सालों से कस्टम मिलिंग की दर में बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। हर बारदाने में 9 रुपए नुकसान हो रहा है। एक क्विंटल धान में अरवा किस्म का चावल 55 किलो और उसना किस्म का चावल 60 किलो बनता है। मगर सरकार मिलर से 67 किलो चावल लेती है। अरवा में 12 किलो और उसना में 7 किलो प्रति क्विंटल चावल का नुकसान है। बारदाने से 110 करोड़ रुपए सरकार मिलर से कमा रही है। ऐसी स्थिति में मिलर किसी भी हालत में कस्टम मिलिंग नहीं कर सकता।

Posted By: Bhupendra Singh

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