नईदुनिया, रायपुर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी ) ने बस्तर की 16 आदिवासी नाबालिगों और महिलाओं के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में राज्य सरकार को नोटिस भेजा है। एनएचआरसी ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विवेक ढांड को नोटिस जारी कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
आयोग के मुताबिक, अभी बलात्कार, यौन उत्पीडऩ व शारीरिक उत्पीडऩ की शिकार 20 और आदिवासी महिलाओं का बयान होना बाकी है। आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर नवंबर 2015 में बीजापुर जिले के ग्राम पेगड़ापल्ली, चिन्नागेलूर, पेद्दागेलूर, बुर्गीचेरू और जनवरी 2016 में बीजापुर जिले के ग्राम बेल्लम लेंड्रा, सुकमा जिले के ग्राम कुन्ना और दंतेवाड़ा जिले के छोटेगड़म का दौरा कर पीडि़त आदिवासी महिलाओं से बात की थी। इसके बाद पुलिस में हुई शिकायत और 16 पीडि़तों के बयान के आधार पर रिपोर्ट तैयारी की गई। जिसमें आठ बलात्कार, छह यौन उत्पीडऩ और दो शारीरिक उत्पीडऩ के मामलों की पुष्टि हुई है। आयोग ने राज्य सरकार से बलात्कार पीडि़तों को तीन-तीन लाख, यौन उत्पीडऩ की शिकार महिलाओं को दो-दो लाख और शारीरिक उत्पीडऩ की शिकार महिलाओं को 50-50 हजार रुपये की अंतरिम राहत देने को कहा है।
-------------------
नोटिस के बाद बढ़ी सियासी सरगर्मी
इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बवाल मच गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से इस्तीफे की मांग की है। यही नहीं राज्य सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए जल्द ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करने की भी तैयारी की जा रही है। वहीं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भी राज्य सरकार से दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआइआर और पीडि़तों के लिए तत्काल 20-20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।

आयोग के नोटिस का जवाब दिया जाएगा। इस मामले में पुलिस ने एफआइआर दर्ज की है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जुलाई 2016 में सीआइडी को प्रकरण हस्तांतरित किए गए। सरकार बस्तर में आदिवासियों की सुरक्षा के लिए सजग है : रामसेवक पैकरा गृहमंत्री, छत्तीसगढ़।

Posted By: Bhupendra Singh