राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों की स्थापना कर रही है, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल रहे। अब डॉक्टर कहां से लाएं तो स्थापित मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टर्स का तबादला किया जाता है, जिससे दोनों जगह डॉक्टर्स का संकट खड़ा हो जाता है। अब अगर तबादले हो भी जाते हैं तो कुछ समय बाद डॉक्टर तबादला रद्द करवा लेते हैं, क्योंकि उन्हें रायपुर पसंद है। इसलिए तबादला हल नहीं है। मेरे हिसाब से प्रॉपर ट्रांसफर की पॉलिसी बननी चाहिए।

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अगर रायपुर से डॉक्टर को बीजापुर, अंबिकापुर भेज रहे हैं तो वहां उन्हें अच्छा वेतन, क्वार्टर, बच्चों के लिए स्कूल की सुविधा, सुरक्षा तो मुहैया करवानी होगी। हमने तो अपनी रिसर्च में ये भी पाया है कि रिमोट एरिया में बढ़ा हुआ वेतन मिलता है, लेकिन वह राशि छह-छह महीने नहीं मिलती, तो मनोबल कैसे बढ़ेगा। अगर रायपुर जिला अस्पताल की बात करें तो यहां बहुत एक्सपर्ट हैं, वर्षों से हैं। सवाल है क्यों?

पुराने संस्थानों को करें सुविधा सम्पन्न
यह बिल्कुल सही है कि आबादी बढ़ने के साथ-साथ नए संस्थानों की जरुरत पड़ती है, लेकिन पहले हम अपने स्थापित संस्थानों को सुविधा सम्पन्न कर लें फिर नए की योजना बनाएं। अभी रायपुर की बात कर लें तो 100-100 बिस्तर के अस्पताल प्रस्तावित हैं, निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन सेटअप को लेकर कोई कवायद नहीं है। भर्तियां नहीं होगी तो कैसे संभव है इन्हें चला पाना।

शहर में दो जिला अस्पताल हैं, लेकिन एक के लिए डॉक्टर ही नहीं हैं। नर्सों के कोर्स संचालित हैं, लेकिन जितनी नर्स निकल रही हैं उनके लिए नौकरी नहीं है। सरकार को चाहिए की भर्ती करें। इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के साथ-साथ इसे चलाने के लिए मैनपॉवर तो चाहिए ही।

निजी अस्पताल जैसा देना होगा वेतन
वेतन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। हां, निजी अस्पताल के समतुल्य वेतन नहीं दे सकते, लेकिन इसके करीब तो देना ही चाहिए। देखने में आया है कि सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर्स प्राइवेट प्रैक्टिस पर ज्यादा फोकस करते हैं, इस पर भी नियंत्रण होना चाहिए।

आखिर क्यों जानी चाहिए निजी हाथों में स्वास्थ्य व्यवस्था
सरकार शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में है। कई सुविधाएं तो दी जा चुकी हैं, लेकिन इससे बेहतर होगा कि सरकारी पदों को सृजित किया जाए। इसके दो फायदे हैं, पहला जिम्मेदारी तय होगी, दूसरा रोजगार भी बढ़ेगा।

- सुलक्षणा नंदी
(सुलक्षणा 1998 से स्वास्थ्य, महिलाओं के अधिकार, पोषण आहार को लेकर काम कर रही हैं। 2002 से छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं, सरकारी की कई योजनाओं में सुझाव दिए हैं।)

By Nandlal Sharma