रायपुर, नई दुनिया प्रतिनिधि। शहर का प्रत्येक नागरिक, संस्था, कारोबारी-व्यापारी, उद्योगपति सभी सिर्फ और सिर्फ अपने रायपुर के विकास के लिए सोचते हैं। हर कोई विकास के लिए अपना हाथ बढ़ाना चाहता है। बशर्तेउन्हें एक मंच मिले। 'नईदुनिया" और जागरण समूह के 'मॉय सिटी मॉय प्राइड" अभियान सभी को एक सूत्र में बांध रहा है। शासन-प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों और जनता के सहयोग से समस्याओं के समाधान की ओर आगे बढ़ रहे हैं। हाथ बंटाने के लिए हाथ आगे आ रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों को कमी है तो कोई अपने खर्च पर शिक्षक रखने का सहमति दे रहा है, तो किताब-कॉपी मुहैया करवाने की। अस्पतालों में व्हील चेयर, स्ट्रेचर नहीं है तो संस्थाएं ये देने तैयार हैं। किसी का कहना है कि सफाई के लिए निगम के कंधे से कंधा मिलकर चलेंगे। स्मार्ट सिटी के बाजारों में टॉयलेट की समस्या दूर होगी,टॉयलेट बनेंगे। प्लास्टिक के कचरे से मुक्ति मिलेगी। शनिवार को हुई राउंड टेबल कांफ्रेंस की जिम्मेदारी ली रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने। उन्होंने न केवल मीटिंग का संचालन किया, बल्कि अहम मुद्दों पर अपना सुझाव भी रखा।

क्या है 'मॉय सिटी मॉय प्राइड" कांसेप्ट
'नईदुनिया" ने इस अभियान के तहत शहर से जुड़े मुद्दे उठाए और समस्याएं सामने रखीं। यह भी बताया कि कैसे व्यक्ति विशेष, शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाएं, उद्योग से लेकर व्यापारी संघ अपने-अपने स्तर शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। एक विषय पर पूरे हफ्ते खबरें प्रकाशित की, इसके बाद राउंड टेबल कांफ्रेंस (आरटीसी) में विशेषज्ञों को आमंत्रित कर गहराई से चर्चा की और समाधान पर गौर किया गया। अब 'नईदुनिया" समस्याओं के समाधान की तरफ आगे बढ़ रहा है। जनता, जनप्रतिनिधि, शासन-प्रशासन, सरकार सब साथ आ चुके हैं...।

 

आज ही शपथ लें
अगर आप रायपुर की बदलती हुई तस्वीर में अपनी हिस्सेदारी देखना चाहते हैं तो कोई एक काम अच्छा काम करने का बीड़ा उठाएं। जरूरी नहीं कि वह काम पैसों से ही हो, आप लोगों को कचरा न फैलाएं, खुले में कचरा न फेंक जागरूक करना शुरू करें। टॉयलेट का ही इस्तेमाल करें, जागरूक करें। ट्रैफिक नियमों का पालन करें, जागरूक करें। सड़क पर बैठी गायों को हटाएं। घायलों की मदद कर करें। एक कोशिश बदलाव ला सकती है। अगर कोई आइडिया है पर कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं है तो 'नईदुनिया" से संपर्क करें, हम उचित व्यक्ति तक आपको पहुंचाएंगे।

यह अभियान इसलिए आज अपने अंजाम तक पहुंच रहा है क्योंकि इसमें हर तबके के लोगों ने बढ़-चढ़कर न सिर्फ हिस्सा लिए बल्कि हर एक काम करवाने के लिए तैयार हैं। लोगों की जान बचाने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल की एनिस्थिसियो लॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा जैन शाह 'नईदुनिया" के साथ कॉर्डियो पर्लमोनरी रीस्सिटेशन (सीपीआर) के लिए कांफ्रेंस कर लोगों को प्रशिक्षित करेंगी। यह बदले हुए रायपुर की एक सुंदर तस्वीर बन रही है। हम स्मार्ट रायपुर के साथ-साथ स्मार्ट सॉलुएशन की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।

ये दिखे नए रास्ते
निगम बजट का कुछ हिस्सा जनता की मर्जी से खर्च करने पर विचार- नगरीय प्रशासन विभाग का नियम है कि प्रत्येक नगरीय निकाय के बजट का कुछ हिस्सा ऐसा होता है जिसका खर्च जनता तय करती है। लेकिन यहां जनता को जानकारी ही नहीं है। ऐसे में जनता को जानकारी दी जाए, उनसे सुझाव लिए जाएं। सुझावों पर सहमति बने और फिर उन कामों को करवाया जाए।
अब सख्ती से लगेगा कचरे पर यूजर चार्ज- निगम डोर टु डोर कचरा कलेक्शन की सुविधा दे रहा है। बहुत जल्द अब हर स्तर पर यूजर चार्ज वसूला जाएगा। कॉलोनियों से शिकायतें यह है कि वे कचरा रखना नहीं चाहतीं, ऐसी स्थिति में यूजर चार्ज लगेगा। अगर वे कचरा डिस्पोज करती हैं 20 फीसदी यूजर चार्ज ही लगेगा। ऐसे बहुत से प्रावधान है जिन्हें जल्द लागू किया जाएगा।

गौशाला में छोड़े जाएं आवारा मवेशी 
इन दिनों शहर की बड़ी समस्याओं में से एक है आवारा मवेशी। गोकुल नगर बसने के बाद आज भी शहर के कुछ हिस्सों में डेयरियां संचालित हैं, पुरानी बस्ती और कुशालपुर क्षेत्र उनमें से एक है। यहां डेयरियां हैं ही हैं, इनकी बदबू से आस-पास के लोग परेशान हैं। गोबर को खुले में फेंका जा रहा है, मल-मूत्र नालियों में बहाया जा रहा है। डेयरी मालिक मवेशियों को खुला छोड़ दे रहे हैं, जो सड़कों पर बैठते हैं। यही हादसों की वजह बनते हैं। आरडीए अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने निगम अफसरों को सुझाव दिया कि वे गौशालाओं से अनुबंध करें, आवारा मवेशी उन्हें दें। साथ ही सब्जी बाजारों से निकलने वो वेस्ट का इस्तेमाल गाय के चारा के लिए किया जा सकता है। दूसरा डेयरी मालिक पर कार्रवाई निरंतर चले।

प्लास्टिक होगा रिसाइकिल
बहुत जल्द सभी 70 वार्डों में डोर टु डोर कचरा कलेक्शन शुरू हो जाएगा, लगभग 40 वार्डों में शुरू हो चुका है। शास्त्रीय बाजार को हाइजिनिक मार्केट में तब्दील किया जा रहा है, स्मार्ट सिटी से इसकी फुलप्रूफ योजना है। तब यहां से गंदगी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। जहां तक सवाल प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग का है तो इसके लिए योजना है। हर तरह के प्लास्टिक को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। जो प्लास्टिक जब्त होगा उसे नियमानुसार फैक्टरियों को दिया जाएगा। इस फोरम से सुझाव आया है कि एमजी रोड में बायो टॉयलेट बनाया जाए, वहां जगह नहीं है। हां, यहां के कॉम्प्लेक्स में टॉयलेट मॉय राइट्स के बोर्ड जल्द लगेंगे।
-हरेन्द्र साहू, नोड्ल अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन, नगर निगम रायपुर

शिक्षा में सुधार के लिए पूरा सहयोग
हमारा एनजीओ शिक्षा के क्षेत्र में दो तरह से काम कर रहा है। शाला त्यागी छात्रों को वापस स्कूलों में लाना, शिक्षा में शून्य निवेश इसकी अवधारणा है। दूसरा कॉप्रेहेंसिव मेंटल हेल्थ एजुकेशन प्रोग्राम के तहत हर तरह से दिव्यांग बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाना। मानसिक तौर पर दिव्यांग बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाने से इसका बड़ा फायदा हुआ है। इनके बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिसके अच्छे परिणाम आए हैं। अभी तक तीन हजार से अधिक मानसिक दिव्यांग बच्चों को ढूंढा जा चुका है, उन्हें शिक्षा प्रदान की जा रही है। भविष्य में जहां भी हमारे एनजीओ की आवश्यकता होगी, शिक्षा के क्षेत्र में पूरा सहयोग करेंगे।
-अमित रंजन प्रसाद, प्रतिनिधि, अरविंदो शिक्षण संस्थान

बच्चों को पढ़ाने आएं लोग
स्मार्ट सिटी ने यह पाया कि शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, इसलिए हमनें टीच रायपुर कांसेप्ट की शुरुआत की। 'नईदुनिया" ने इसमें पूरा सहयोग किया। शहर के ऐसे लोगों से संपर्क किया गया, जो अपनी दैनिक दिनचर्या में कम से कम एक घंटे का समय निकाल सकते हैं। आज सरकारी स्कूलों में योगा, इंग्लिश, जुलॉजी जैसे विषयों को पढ़ाने के लिए हाउस वाइफ, रिटायर्ड पर्सन, प्रोफेशनिस्ट समेत कई लोग जुड़ रहे हैं। इस फोरम के जरिए मैं एक अपील करता हूं कि लोग हमसे एप्रोच करें कि उन्हें भी पढ़ाना है, बिल्कुल उन्हें मौका दिया जाएगा। नए भारत को गढ़ने की बात है, क्योंकि शिक्षा से पीढ़ियों का विकास है।
-आशीष मिश्रा, जनरल मैनेजर, कम्प्यूनिकेशन, स्मार्ट सिटी लिमिटेड

जान बचाने के लिए सिर्फ तीन मिनट
देखिए, किसी भी सड़क हादसे में घायल तक एंबुलेंस पहुंचने में कम से कम 5 से 10 मिनट तक लग सकते हैं। हार्ट फेल्योर की स्थिति में जान बचाने के लिए सिर्फ तीन मिनट मिलते हैं। ऐसी स्थिति में आस-पास के लोग ही घायलों को कॉर्डियो पर्लमोनरी रीस्सिटेशन (सीपीआर) देकर जान बचा सकते हैं। इसलिए सीपीआर के बारे में जानकारी अहम है। खुदा-न खास्ता कभी हमारे अपनों के साथ घटना घट जाए, जान बचा सके। एनेस्थिसिया विभाग लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, 'नईदुनिया" के साथ मिलकर आगे अभियान चलाएंगे। खासकर हाइवे के पास के स्वास्थ्य केंद्रों में, यहां प्रशिक्षण की सर्वाधिक जरुरत है।
डॉ. रोहित कुमार गुप्ता, रेसीडेंट, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग, डॉ. आंबेडकर अस्पताल

 

स्वास्थ्य के लिए बताएं, दूर करेंगे खामियां
शहर में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कमियां आने पर व्यापारिक संगठनों की भी उपयोगिता तय की जा सकती है। टाटीबंध क्षेत्र में रायपुर ऑटो मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन ने अहम भूमिका निभाई है जिससे समाज में लोगों के बीच मदद के लिए सकरात्मक वातावरण बन सका है। एसोसिएशन प्रदेश के सबसे बड़े भीमराव आंबेडकर अस्पताल में भी सहयोग करेगा। दस व्हील चेयर और इतने ही स्ट्रेचर उपलब्ध कराए जाएंगे। ऑटो मोबाइल कारोबार से जुड़े रहने के साथ रोड सेफ्टी के लिए भी हम कार्यरत हैं। समाज के विकास में और भी संगठनों को सामने आना चाहिए। शहर के लिए ट्रैफिक भी एक बड़ी समस्या है। बाजारी क्षेत्र में मौजूद कांप्लेक्सों में टॉयलेट की सुविधाएं आम लोगों के लिए भी तय करने होंगे। भीड़ भाड़ वाले हिस्से में परेशानियां दूर होगी।
- मनीषराज सिंघानिया, अध्यक्ष रायपुर ऑटो मोबाइल डीलर्स

डूमरतराई जैसा हो सब्जी मंडी का मॉडल
शास्त्री बाजार की दशा को लेकर हमेशा से चिंता रही है। सरकारी तंत्र में बड़े स्तर पर प्रयोग करने की जरूरत है। ठीक वैसे ही जब सब्जी कारोबारियों ने अपने फैसले पर प्राइवेट सब्जी मंडी का विकास किया है। हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करने के साथ गंदगी से छुटकारे के लिए वहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम तय किए हैं। महीने में 60 हजार रुप्ाये की लागत से बाजार का कचरा सुव्यवस्थित ढंग से बाहर किए जाते हैं। व्यापारी अपने मतलब की सोचते हैं कई बार आम लोगों में यह मंशा रहती है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। थोक सब्जी व्यवसायी संघ की ओर से सामाजिक सरोकार के कार्य से जुड़ते हुए दस बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया गया है। गंदगी से दूर श्रीराम मंडी समिति आदर्श माहौल दे रहा है। शास्त्री बाजार के लिए भी कुछ इसी तरह से काम करने की जरूरत है।
-श्रीनिवास रेड्डी, अध्यक्ष थोक व्यवसायी संघ

शिक्षा का स्तर सुधारने की जरूरत
शहर के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बीच ऐसा वातावरण बनाने की जरूरत है जहां पर खुलेपन में शिक्षा ग्रहण कर सके। अभी नगर निगम ने पब्लिक के साथ मिलता-जुलता प्रयास शुरू किया है, जिससे निश्चित ही लाभ मिल रहा है। भाषा ज्ञान के लिए स्कूलों के लिए विशेषज्ञों को समय निकालना चाहिए, ताकि बच्चों में बुदि्ध का विकास तेजी से हो सके। बतौर अतिथि शिक्षक के रूप में सप्रे शाला में इंग्लिश पढ़ाने के साथ योग और मेडिटेशन प्रशिक्षण के कार्य से जुड़कर योगदान तय किया है। शहर के लिए दूसरी बड़ी समस्या ट्रैफिक के लिए नियमों का पालन करवाने लोगों में अवेयरनेंस अभियान की जरूरत है। कई बार देखा गया है जब रांग साइड से गाड़ी चलाकर वाहन चालक अपने साथ दूसरों के लिए भी जोखिम पैदा कर देते हैं।
- विद्यापति शुक्ला, अतिथि शिक्षक सप्रे शाला

स्मार्ट फोन टीचरों को बनाएगा एक्सपर्ट
अक्सर देखा गया है कि स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर्स अपने योग्यता साबित करने में फेल हो जाते हैं। इसका असर बच्चों की पढ़ाई में भी पड़ता है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत अब टीचरों को एक्सपर्ट बनाने नए तरीके का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें टीचरों को पढ़ाई जाने वाले विषय संबंधी जानकारी फोन में वीडियो के जरिए दी जाएगी। स्मार्ट फोन में जानकारी देखकर अगले दिन वे बच्चों को पढ़ाएंगे। शिक्षा का स्तर सुधारने 300 सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू किया गया है। हालांकि किताबें समय पर नहीं पहंुच सकीं लेकिन पढ़ाई का माहौल बनते ही सीधे बच्चों को इसका लाभ मिल सकेगा। शिक्षा की बेहतरी के लिए जरूरी है कि स्कूल में टीचरों की कमी दूर करने जानकार, बुद्धिजीवी वर्ग के लोग भी स्कूलों के लिए समय निकालें। सरकार की तरफ से विद्यांचल कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बाकायदा इसके लिए वेबसाइट भी बना हुआ है। ऑप्शन तय कर एक्सपर्ट स्कूल पहंुच सकते हैं।
-डा, एम सुधीर, सहायक संचालक एवं इनोवेटिव प्राध्यापक

स्कूलों में जरूरतों के हिसाब से साधन नहीं
देहात के हिस्से में चल रहे स्कूलों में साधनों की कमी होने से बच्चों का विकास नहीं हो पा रहा है। 1800 प्राथमिक शालाओं में पहंुचने के बाद स्थिति सामने आई है। चार बड़ी जरूरतों में शिक्षकों की कमी, फंड की कमी, अच्छी प्लानिंग की कमी और बेहतर माहौल देने सेटअप का अभाव कहीं न कहीं व्यवस्था को प्रभावित कर रहा। स्कूलों में बड़े अधिकारियों को मॉनिटरिंग का सिस्टम तय किया जाना चाहिए। इससे शिक्षकों में भी उत्सुकता बनी रहती है। बात अगर शहर में ट्रैफिक की हो तो आवारा पशुओं से बड़ा खतरा देखने को मिलता है। मोवा के भीतर दलदल सिवनी रोड में आए दिन हादसे की आशंका बनी रहती है। कॉलोनी के बाहर मुख्य सड़क पर मवेशियों के जमावड़े से कई बार हादसे हुए हैं। औसतन हर दिन एक सड़क दुर्घटना होती है।
-रंजू, रूमटूरीड संस्था 

By Gaurav Tiwari