शहर के बीचोबीच स्कॉय वॉक काफी हद तक ट्रैफिक का दबाव कम करेगा, लेकिन बाकी हिस्से में भी पैदल चलने वालों के लिए जगह सुनिश्चित होनी चाहिए। आर्किटेक्ट मनीष पिल्लीवार का कहना है कि भीड़भाड़ वाले हिस्से में खासकर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मल्टीलेवल पार्किंग वाली जगहों में फुटपाथ होना चाहिए। केनाल रोड पर बनाए गए फुटपाथ में उस तरह से भीड़ नहीं है, जिस तरह से ट्रैफिक का दबाव दूसरे हिस्सों में है। कई बार भीड़भाड़ वाले हिस्से में नजारे आम रहते हैं, जहां बंधक सड़कें मुसीबत बढ़ाती हैं।

एक्सपर्ट पिल्लीवार के अनुसार शहर में आबादी बढ़ रही है, गाड़ियों की आवाजाही कंट्रोल करने की जरूरत पड़ेगी। जब लोग गाड़ी छोड़कर पैदल चलने की आदत डालेंगे, उनके सामने जगह की कमी की बड़ी समस्या सामने होगी। 15 लाख की आबादी वाले शहर में 12 लाख से वाहनों का दबाव है। आमतौर पर व्यक्ति जिस जगह के स्टॉपेज में गाड़ी खड़ी करता है, वहीं से पैदल चलता है। ऐसे में चिन्हित एरिया में फुटपाथ की बड़ी जरूरत होगी।

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शहर में दर्जनों सर्वे एजेंसियों ने जगह की कमी बताई है, जिस वजह से निर्माण नहीं हो सका है। नई राजधानी में जहां सड़कों पर फुटपाथ और साइकिल ट्रैक बनाया जा रहा है, उसी तर्ज पर पुरानी रायपुर में स्थिति संभालने की दरकार है, लेकिन इसके लिए उपयोगी जगहों का चुनाव जरूरी है।

एक्सपर्ट पिल्लीवार ने बताया कि फुटपाथ निर्माण के लिए भी नियम बने हुए हैं। इलाके में व्यक्ति के चलने की दूरी के हिसाब से निर्माण होना चाहिए। एक व्यक्ति 5 किमी नहीं चल सकता। चलने की दूरी कम होती है, इसलिए पैदल चलने और बाकी ट्रैफिक की चाल की मॉनिटरिंग करने के बाद फुटपाथ बनाया जाना चाहिए।

शहर में दो तरह से ट्रैफिक की व्यवस्था तय की जाती है, जिसमें मोटराज्ड और नान मोटराइज्ड व्यवस्था है। रिक्शे, ऑटो रिक्शे और साइकिल वाले हिस्सों को नान मोटराइज्ड हिस्से में शामिल किया जाता है, जबकि गाड़ी मोटर दौड़ने वाला हिस्सा मोटराइज्ड व्यवस्था का हिस्सा है। इसका गहन अध्ययन कर फुटपाथ बनाया जाना चाहिए। रेजिडेंशियल एरिया में ट्रैफिक का दबाव कम होगा, जबकि कमर्शियल एरिये में भीड़भाड़ की स्थिति होगी।

जिन जगहों पर गाड़ियां खड़ी करने की पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित है, वहां से फुटपाथ के इंतजाम होने चाहिए। गाड़ी रखने के बाद भीड़ वाले हिस्से में लोगों का मूवमेंट बढ़ता है। बराबर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के लिए भी यही व्यवस्था बनती है। ज्यादातर पैदल चलने वाले यहां से मिलते हैं।

By Nandlal Sharma