रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि : राजधानी में सिटी बसों के साथ ही अब ऑटो रिक्शों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थलों पर व्यवस्थित ऑटो स्टैंड की जरुरत महसूस की जा रही है। इसके अभाव में ऑटो चालक ऑटो खड़ा कर यातायात को प्रभावित कर रहे हैं। ऑटो स्टैंड बन जाने से उन्हें केवल उसी स्थान पर सवारी लेने के लिए बाध्य किया जा सकेगा। इससे बेतरतीब यातायात की समस्या काफी हद तक दूर होगी। 'माय सिटी माय प्राइड' की राउंड टेबल कॉन्‍फ्रेंस में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था, इसमें विशेषज्ञों ने व्यवस्था में सुधार की जरुरत बतायी। 

राजधानी में इस समय 10 हजार से अधिक ऑटो रिक्शा हैं। यातायात सुधार के लिए ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ मिलकर करता आया है। इसके लिए कई नियम भी बनाए, लेकिन हर बार नियमों का पालन कराने में पुलिस और आरटीओ फेल रहे। जब भी पुलिस ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने की कोशिश करती है, सामने ऑटो यूनियन आड़े आ जाता है। यूनियन के विरोध व दबाव में आखिरकार पुलिस को अपने कदम पीछे हटाने को मजबूर होना पड़ता है। इस तरह सारे आदेशों की हवा निकलती गई।

रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ने में सबसे बड़ा हाथ ऑटो रिक्शा का है। चालक कहीं भी ऑटो खड़े कर सवारी बैठाते-उतारते हैं। इसकी वजह से हर जगह जाम लग रहा है। ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ ने ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए सालों से कोशिश की है। ऑटो चालकों का वेरिफिकेशन, ऑटो स्टैंड, 10 साल से अधिक पुराने ऑटो को परमिट जारी न करने और सड़क से हटाने, जारी परमिट के अनुसार शहरी व ग्रामीण ऑटो का रूट तय करने तक की बात की थी। सारे प्लान ऑटो यूनियन के विरोध के आगे लागू नहीं हो सके।

नहीं बन पाया स्थायी ऑटो स्टैंड

सालों पहले ऑटो रिक्शा के लिए शहर में शहर के प्रमुख चौक-चौराहों के आस-पास स्थायी ऑटो रिक्शा स्टैंड का प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन इस पर अब तक कोई काम नहीं किया गया। नतीजन आटो रिक्शा को चालक कहीं भी खड़ी कर सवारी उतारते और बैठाते हैं, इससे जाम के हालात निर्मित होते हैं।

धरा रह गया प्लान
राजधानी में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, ऑटो, मिनीडोर केअलावा सिटी बस शहर के मध्य से चल रहे हैं। अन्य जिलों से संचालित बसों को शहर के बाहर ही बस स्टैंड बनाकर रोका जा सकता है और वहीं से वापस भेजा जा सकता है। सिटी बस, ऑटो बस स्टैंड पर रुके। शहर के भीतर आने से जितने वाहनों को रोका जाएगा, उतना ही दबाव कम होगा और यातायात सुगम होगा।

ऑटो जब्ती के बाद भी मनमानी
रायपुर में ऑटो रिक्शा, मिनीडोर की संख्या 10 हजार से अधिक है। शहर के अलावा ग्रामीण परमिट वाले ऑटो भी शहर के भीतर दौड़ रहे हैं। चालक कहीं भी ऑटो पार्क कर देते हैं। हालांकि पिछले छह महीने से पुलिस ने अभियान चलाकर बेतरतीब ढंग से पार्क करीब ढाई सौ ऑटो रिक्शा को जब्त करने के साथ ही चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, बावजूद इसके ऑटो चालकों की मनमानी जारी है।

5 हजार ऑटो अवैध बिगाड़ रहे व्यवस्था
आरटीओ पुलक भट्टाचार्य ने बताया कि शहर में 10 हजार से अधिक ऑटो रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन परमिट लेने व फिटनेस जांच कराने 3 हजार ऑटो ही 3 साल से दफ्तर आ रहे हैं। यानी 5 हजार ऑटो रिक्शा 15 साल पुराने होने के साथ अवैध रूप से सड़क पर दौड़ रहे हैं।

चलाएंगे जांच अभियान-एएसपी ट्रैफिक
एएसपी ट्रैफिक अभिषेक वर्मा का कहना है कि हर साल ऑटो रिक्शा और चालकों का जांच व प्रशिक्षण शिविर लगाया जाता है। शिविर में चालकों के दस्तावेजों की जांच कर उन्हें यलो कार्ड दिया गया है। यह यलो कार्ड जांच के समय चालक दिखा सकते है। जांच अभियान चलाकर ऑटो रिक्शा व उनके चालकों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जिनके पास यलो कार्ड नहीं होगा, उन पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

ऑटो के लिए सरकार बनाएं स्थायी नीति-कमल पांडेय
ऑटो यूनियन के अध्यक्ष कमल पांडेय का कहना है कि छत्तीसगढ़ बनने के 18 साल बाद भी ऑटो रिक्शा के लिए स्थाई नीति नहीं बन पाई। जबकि दूसरे राज्यों में नीति बनी हुई है। यहां अफसरों के फरमान के बाद ऑटो चालकों को अपराधी की दृष्टिकोण से देखकर परेशान किया जाता है। प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से ई-रिक्शा चलाया जा रहा है।

यह केवल पांच से दस किमी तक ही चल सकता है जबकि आटो 20 से 25 किमी चलती है। सीएनजी ऑटो चलने से चालकों की आय भी बढ़ेगी और प्रदूषण कम होगा। परमिट में ऑटो का रेंज 16 किमी निर्धारित कर रखा गया है। इसे बढ़ाकर 40 किमी करना चाहिए। सरकार चाहे तो एक समिति बनाकर बेहतर व्यवस्था बना सकती है। इस समिति में जनप्रतिनिधि, अफसर, आटो चालक तथा अन्य को शामिल कर प्लान तैयार करना चाहिए।

By Krishan Kumar