रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा को कई कंपनियां और संगठन सोशल कॉरपोरेट रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के तहत नया आकार दे रहे हैं। कोई बच्चों को अंग्रेजी और गणित की किट मुहैया करा रहा है तो कोई संस्थान स्कूलों में ग्रंथालय स्थापित कर बच्चों का ज्ञान बढ़ा रहा है। इनमें कई संस्थान तो ऐसे हैं जो कि शिक्षकों को ट्रेनिंग देने का भी काम कर रहे हैं।

'द टीचर' एप जो कि शिक्षकों को ऑनलाइन ट्रेनिंग देने में मदद करने वाली संस्था है, हुमाना पीपुल टू पीपुल इंडिया के जरिए ड्रॉप आउट बच्चों को मुख्य धारा में लाने की कवायद चल रही है। इंडस संस्था के जरिए आरटीई के तहत बच्चों को दाखिला देने के लिए ऑनलाइन सिस्टम लागू कर दिया गया।

स्कूलों में चाहे ग्रंथालय की किताबें हों या फिर पठन-पाठन की रोचक सामग्री, इन सबमें निजी संस्थानों का दखल है। संपर्क क्लास के जरिए अंग्रेजी और गणित के लिए किट और किताब लेखन के लिए कई निजी संगठनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये संगठन ऐसे दे रहे स्कूली शिक्षा में योगदान

संपर्क फाउंडेशन- बच्चों के लिए गणित और अंग्रेजी दोनों को सरल तरीके से पढ़ाने के लिए किट उपलब्ध कराने और शिक्षकों को ट्रेनिंग देने का काम।
ई-जंक्शन- यह संस्थान राज्य के 2 हजार से अधिक ब्लाइंड चिल्ड्रेन को बोलने वाला टीचिंग मोबाइल उपलब्ध करा रहा है। इससे नेत्र दिव्यांगों की पढ़ाई आसान हो रही है।

लर्निंग लिंक फाउंडेशन: लर्निंग लिंक फाउंडेशन और मैजिक बस फाउंडेशन- दोनों संस्थान मिलकर एक दिशा में कार्यक्रम चला रहे है। राज्य के 89 मिडिल स्कूल में इसमें संज्ञानात्मक और सह संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। साइंस , मैथ्स और हिन्दी में लर्निंग क्षमता बढ़ाने के लिए काम रहे हैं।

'द टीचर' ऐप- दिल्ली का यह संस्थान द टीचर ऐप के जरिए शिक्षकों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दे रहा है। शिक्षक अपनी इच्छा से इससे पंजीकृत हो रहे हैं, अब तक 90 हजार पंजीकृत हो चुके हैं।

हुमाना पीपुल टू पीपुल इंडिया: सर्व शिक्षा अभियान ने हुमाना पीपुल टू पीपुल इंडिया नई दिल्ली के साथ 5 साल के लिए अनुबंध किया है। इसके तहत यह संस्था अब बच्चों के लिए अलग से पाठ्यक्रम बनाकर दे रही है।

एलएलएफ: एलएलएफ यानी लैग्वैंज फाउंडेशन प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों को ट्रेनिंग कराकर सर्टिफिकेट कोर्स कराता है।

रूम टू रीड- यह संस्थान प्राइमरी के बच्चों के लिए कहानी के रूप में बहुत सारी सामग्री और लाइब्रेरी में किताबें उपलब्ध करा रहा है।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन- शिक्षकों को टीचर्स प्रोफेशनल डेवलपमेंट में काम कर रहा है। संस्था के राज्य कोआर्डिनेटर सुनील शह के मुताबिक अभी छह जिले में रायपुर, रायगढ़, बलौदाबाजार, बेमेतरा, धमतरी और जांजगीर चांपा में टीचर्स के लिए प्रोग्राम चल रहे हैं।

आरटीई वॉच: यह संस्थान आरटीई के नियमों पर काम करता है। स्कूलों में इसके नियमों का अमल हो रहा है कि नहीं इसका मूल्यांकन करते हैं। इसे सिलेबस के आधार पर भी देखते हैं।

प्रथम संस्था: यह संस्थान प्राइमरी संस्थानों में काम करके बच्चों की उपलब्धि स्तर को जांचता है।

एकलव्य संस्था: यह डाइट में काम करके डाइट्स में पेडागॉजी के लिए मदद कर रहे हैं।

ये ऐसे कर रहे हैं मदद
इसके अलावा प्रदेश में श्री अरविंदो सोसायटी की ओर से जीरो कास्ट पर इनोवेशन, यूनिसेफ स्पोर्ट एवं क्वालिटी के लिए सपोर्ट, मेलजोल संस्था की ओर से स्कूलों में चाइल्ड कैबिनेट, इंडिया एजुकेशन कलेक्टिव की ओर से टीचर मीट, शिक्षार्थ की ओर से ट्राइबल एजुकेशन, बीबीसी की ओर से फुल ऑन निक्की स्कूलों में रेडियो के जरिये ऑडियो प्रोग्राम, मिलियन स्पार्क फाउंडेशन की ओर से ऑनलाइन टीचर कैपेसिटी बिल्डिंग और लेंड ए हैंड की ओर से वोकेशनल कोर्स में मदद मिल रही है।

गैप को भर रहे निजी संस्थान
- राज्य में कई सारे संस्थान और गैर सरकारी संगठन शिक्षा की गुणवत्ता के लिए काम करना चाह रहे हैं। नि:शुल्क शिक्षा के लिए उनका योगदान महत्वपूर्ण है। जहां शिक्षा में गैप है वहां पर वे काम कर रहे हैं। - एस प्रकाश, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

By Nandlal Sharma