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'43 साल पुराने महानदी जल विवाद का शीघ्र होगा समाधान', ओडिशा के सीएम से चर्चा के बाद बोले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

Published: Mon, 21 Sep 2026 03:08 AM (IST)

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात कर 43 साल पुराने महानदी जल विवाद के समाधान पर चर्चा की।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के बीच महानदी विवाद को लेकर हुई बातचीत

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के बीच महानदी विवाद को लेकर हुई बातचीत

HighLights

  1. मुख्यमंत्री साय ने ओडिशा के सीएम माझी से महानदी विवाद पर चर्चा की।

  2. 43 साल पुराना महानदी जल विवाद जल्द सुलझने की उम्मीद है।

  3. डबल इंजन सरकार और केंद्र की सक्रियता से समाधान संभव है।

डिजिटल डेस्क, रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को ओडिशा प्रवास के दौरान वहां के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सहयोग, विकास और जनकल्याण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। यहां दोनों मुख्यमंत्रियों के मध्य विशेष रूप से 43 साल पुराने महानदी जल विवाद के निपटारे के बिंदुओं पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब महानदी जल बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है। दोनों राज्यों में डबल इंजन की सरकार है। ऐसे में महानदी जल के बंटवारे का समाधान शीघ्र ही संभव है, क्योंकि केंद्र सरकार इस दिशा में सक्रिय है। बेहतर समन्वय से नागरिकों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र की प्रगति को नई गति मिलेगी।

भुवनेश्वर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दोनों राज्य सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच भी गहरे संबंध हैं।

मुख्यमंत्री साय ने भुवनेश्वर में भगवान लिंगराज मंदिर जाकर दर्शन-पूजन किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

1983 से चल रहा है विवाद

यह विवाद साल 1983 से चल रहा है। उस वक्त छत्तीसगढ़ राज्य का गठन नहीं हुआ था और यह विवाद मूल रूप से मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच था। साल 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकें हुईं, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।

साल 2016 में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन किया।

केंद्र सरकार की पहल से विभिन्न राज्यों के बीच हुए समझौते

1- किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता (यमुना बेसिन) : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच 32 साल पुराने गतिरोध को समाप्त करने वाला यह समझौता टोंस नदी पर बांध बनाकर सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करता है।
2 - ताजेवाला हेडवर्क्स जल समझौता : हरियाणा और राजस्थान के बीच 29 जून 2026 को हुए ऐतिहासिक यमुना जल समझौते के तहत मानसून के दौरान 577 मिलियन क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र तक पहुंचाया जा रहा है।
3. सोन नदी जल बंटवारा समझौता: 31 अगस्त 2026 को बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिससे 25 साल पुराना विवाद समाप्त हुआ।
4. केन-बेतवा लिंक परियोजना समझौता : 22 मार्च 2021 को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच बुंदेलखंड क्षेत्र की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सहमति बनी है।
5. लखवार और रेणुकाजी बांध परियोजना समझौते : यमुना बेसिन से जुड़े इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौते हुए हैं।
6. शाहपुर कंडी बांध परियोजना समझौता: रावी नदी के पानी के बेहतर उपयोग और बंटवारे को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब और जम्मू-कश्मीर के मध्य समझौता किया गया है।