छत्तीसगढ़ झीरम घाटी नरसंहार: 10 दोषी माओवादियों को मौत की सजा, HC में अपील के लिए मिले 30 दिन
एनआईए की विशेष अदालत ने झीरम घाटी नरसंहार मामले में दोषी पाए गए 10 माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

झीरम घाटी नरसंहार में 10 दोषी माओवादियों को मृत्युदंड की सजा।
HighLights
एनआईए कोर्ट ने 10 माओवादियों को मृत्युदंड दिया।
झीरम घाटी नरसंहार मामले में आया बड़ा फैसला।
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुआ था हमला।
डिजिटल डेस्क, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बुधवार को 10 दोषी माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने यह निर्णय सुनाया।
अदालत ने 24 धाराओं में से सात धाराओं में सभी अभियुक्तों को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा दी। अन्य धाराओं में दोषियों को उम्रकैद, जुर्माना सहित अन्य सजा सुनाई गई है।
13 साल पहले 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा सहित 32 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 38 लोग घायल हुए थे।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मृत्युदंड का निष्पादन तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट यह निर्धारित नहीं कर देता कि यह सजा उचित है। सभी अभियुक्त फिलहाल जेल में रहेंगे और उन्हें फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
सजा सुनाए जाने के दौरान अभियुक्तों के स्वजन अदालत कक्ष के बाहर मौजूद रहे। बीजापुर और दंतेवाड़ा से भी अभियुक्तों के स्वजन जगदलपुर पहुंचे थे। सभी 10 दोषी वर्तमान में जगदलपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
विशेष अदालत ने पांच सितंबर को प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नाग को दोषी ठहराया था। इस मामले में 101 लोगों की गवाही हुई थी।
बस्तर के दरभा क्षेत्र में झीरम घाटी के पास माओवादियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला किया था। यह काफिला सुकमा से लौट रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया।
बड़े माओवादियों से पूछताछ तक नहीं : कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन घटना के बड़े षड्यंत्रकारियों तक जांच एजेंसी नहीं पहुंच पाई। एनआईए ने छोटे स्तर पर शामिल माओवादियों को आरोपित बनाया, जबकि बड़े माओवादी नेताओं से पूछताछ नहीं की गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच में 200 माओवादियों के शामिल होने की बात सामने आई और 39 लोग नामजद थे, तो आरोप सिद्ध होकर सजा केवल 10 को क्यों मिली। उन्होंने बड़े माओवादी नेताओं गणपति, रमन्ना के नाम चार्जशीट से हटाए जाने और आत्मसमर्पण करने वालों से पूछताछ नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए।
हमारा बयान तक दर्ज नहीं किया: प्रत्यशदर्शी
हमले के प्रत्यक्षदर्शी व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव डॉ. शिवनारायण द्विवेदी ने कहा कि हम इस घटना के पीड़ित हैं। हमें गोलियां लगी थीं और हम घायल हुए थे, इसके बावजूद जांच एजेंसी ने हमारा बयान तक दर्ज नहीं किया। ऐसे में एनआईए की जांच पर संदेह होना स्वाभाविक है।
हम अपने हक और न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। आवश्यकता पड़ने पर आगे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
दस माओवादियों को मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत: विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दस माओवादियों को मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।
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