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कभी मीलों दूर से पानी लाती थीं महिलाएं, अब साय सरकार में घर की चौखट तक पहुंचा 'नल से जल'

Published: Mon, 21 Sep 2026 06:13 PM (IST)

छत्तीसगढ़ में साय सरकार के 'हर घर जल' संकल्प ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन को बदल दिया है, जहां अब ...और पढ़ें

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HighLights

  1. महिलाओं को पानी के लिए मीलों दूर जाने से मिली मुक्ति।

  2. घर में नल से स्वच्छ जल, समय की बचत और सुविधा।

  3. बच्चों की पढ़ाई और परिवार के अन्य कार्यों पर ध्यान बढ़ा।

डिजिटल टीम, रायपुर। कभी सुबह की पहली किरण के साथ ही सिर पर बर्तन रखकर मीलों दूर पानी की तलाश में निकलना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों की नियति बन चुका था। घंटों इंतजार और भीषण जद्दोजहद के बाद मिलने वाला पानी न केवल समय लेता था, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार की दिनचर्या को भी बुरी तरह प्रभावित करता था। हालांकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प को धरातल पर उतारकर ग्रामीण जिंदगी की इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के ग्राम पंडरी से उठी बदलाव की नई बयार

आदिवासी बहुल जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के मरवाही विकासखंड का ग्राम पंडरी आज इस ऐतिहासिक कायाकल्प का जीवंत उदाहरण पेश कर रहा है। गांव की शीला केवट जैसी अनगिनत महिलाओं के लिए घर के आंगन में लगा नल अब केवल पानी का साधन नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और सुविधा का प्रतीक बन चुका है।
 
शीला केवट ने कहा कि पहले घर के सारे जरूरी काम छोड़कर पानी लाने के लिए दूर जाना पड़ता था और पूरी सुबह इसी में निकल जाती थी। अब घर में ही नल से स्वच्छ जल मिल रहा है। बचे हुए समय का उपयोग हम बच्चों की परवरिश, पढ़ाई और परिवार के अन्य जरूरी कामों में कर पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। उस समय देश के 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 17 प्रतिशत (लगभग 3.23 करोड़) के पास ही नल से जल की सुविधा थी। पिछले सात वर्षों की निरंतर यात्रा में इस योजना ने न केवल पाइपलाइन बिछाने का काम किया, बल्कि इसे जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और 'ग्रे-वॉटर मैनेजमेंट' के साथ एक जन आंदोलन का रूप दे दिया है।

महिलाओं के जीवन में आया यह बदलाव केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार का है। घर-घर सुरक्षित पेयजल पहुंचने से जल जनित बीमारियों का खतरा कम हुआ है। दूर से पानी ढोने की कठिन शारीरिक मेहनत से राहत मिलने से महिलाओं को आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। पानी लाने की मजबूरी खत्म होने से बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की स्कूल उपस्थिति और खेलकूद का समय बढ़ा है।

जल जीवन मिशन 2.0: दिसंबर 2028 तक दीर्घकालिक स्थिरता का लक्ष्य

केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल और छत्तीसगढ़ की साय सरकार के प्रभावी क्रियान्वयन से यह योजना अब अगले पड़ाव में प्रवेश कर चुकी है। केंद्र सरकार ने इस मिशन को दिसंबर 2028 तक विस्तार देते हुए 'जल जीवन मिशन 2.0' के तहत जलापूर्ति सेवाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है।
 
आज ग्राम पंडरी के आंगन में नल से बहती पानी की धार सिर्फ प्यास नहीं बुझा रही, बल्कि यह साय सरकार के उस कुशल सुशासन की कहानी बयान कर रही है, जिसने ग्रामीण भारत में 'सहज और सुगम जीवन' की एक नई इबारत लिख दी है।