विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

छत्तीसगढ़: CGPSC भर्ती छोटाला मामले में ED का एक्शन, पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी सहित छह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

Published: Wed, 23 Sep 2026 09:56 AM (IST)

ईडी ने छत्तीसगढ़ में हुए सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत छह आरोपियों के खिलाफ विशेष कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया है।

ED ने दाखिल किया आरोप पत्र।

ED ने दाखिल किया आरोप पत्र।

HighLights

  1. ईडी ने सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में आरोप पत्र दाखिल किया।

  2. पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी समेत छह आरोपी नामजद किए गए।

  3. प्रश्नपत्र लीक, रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप है।

डिजिटल डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुए सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में ईडी ने मंगलवार को पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत छह आरोपियों के खिलाफ विशेष कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया। 99 पेज के सारांश के साथ करीब 3700 पेजों का आरोप पत्र पेश किया गया है।

आरोप पत्र में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने, रिश्तेदारों को चयन में लाभ पहुंचाने, अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये लेने और रकम के लेनदेन के आरोपों का पूरा ब्योरा दिया गया है।

ईडी ने बताई आरोपियों की भूमिका

ईडी के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष ने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए नियम बदले। 14 जुलाई 2021 की बैठक में ‘रिलेटिव’ की जगह ‘फैमिली’ किया गया और ‘नेफ्यू’ को परिवार की परिभाषा से बाहर किया गया। आरोप है कि टामन ने भतीजों नितेश और साहिल को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया। नितेश डिप्टी कलेक्टर और साहिल डीएसपी बने।

प्रश्नपत्र की गोपनीयता तोड़ने में सहयोग

तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने टामन के साथ मिलकर प्रश्नपत्र श्रवण गोयल तक पहुंचाने में सहयोग किया। इसके बाद प्रश्नपत्र उनके बेटे शशांक और बहू भूमिका तक पहुंचा, दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ।

66.64 लाख रुपये नकद जमा होने का आरोप

चेतन बोरघरिया ने ओएसडी पद के नाम और प्रभाव का उपयोग कर अभ्यर्थियों को नौकरी व प्रश्नपत्र दिलाने का भरोसा दिया। उनके खाते में 170 लेनदेन से 66.64 लाख रुपये नकद जमा हुए।

तीन करोड़ से अधिक की रकम जुटाने का आरोप

उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने लीक प्रश्नपत्र दिलाने के भरोसे पर अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। उत्कर्ष पर केके चंद्रवंशी और मुख्यमंत्री कार्यालय के तत्कालीन ओएसडी के नाम व प्रभाव के उपयोग का आरोप है। जुटाई गई रकम में से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए। एजेंसी ने रकम के आगे के लेनदेन की भी जांच की।