वीबी-जी राम जी: 15 दिनों का वादा, दो साल बाद भी समिति मौन; छत्तीसगढ़ में 12 हजार कर्मचारियों की HR पॉलिसी अटकी
छत्तीसगढ़ में वीबी-जी राम जी (मनरेगा) के करीब 12 हजार कर्मचारियों की मानव संसाधन नीति दो साल से अधिक समय से लंबित है।

वीबी-जी राम जी कर्मचारियों की एचआर नीति लंबित

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, रायपुर। प्रदेश में वीबी-जी राम जी (विकसित भारत–गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण) के करीब 12 हजार कर्मचारियों की मानव संसाधन (एचआर) नीति दो वर्षों से अधिक समय बाद भी अधर में है।
नीति बनाने गठित समिति को 15 दिनों में अनुशंसा देनी थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा से लेकर उच्च अधिकारियों तक कर्मचारी अपनी मांग पहुंचा चुके हैं, इसके बावजूद नीति पर फैसला नहीं हो सका है।
वीबी-जी राम जी कर्मचारियों की HR नीति लंबित
प्रदेशभर में कार्यरत कर्मचारी लंबे समय से सेवा सुरक्षा, स्थायी सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग कर रहे हैं। मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर 29 अगस्त 2024 को मानव संसाधन नीति तैयार करने के लिए आठ सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा की अध्यक्षता में गठित इस समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी थी, ताकि नीति निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
समिति की रिपोर्ट लंबित रहने से कर्मियों में असंतोष व्याप्त है। नीति के अभाव में कर्मचारी असुरक्षा और अनिश्चितता के माहौल में कार्य करने को मजबूर हैं।
कर्मचारी सेवा सुरक्षा और सामाजिक लाभ मांग रहे
छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय क्षत्री ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम परिवर्तन होकर वीबी-जी राम जी हो गया है लेकिन कर्मचारियाें की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया है। कर्मचारी योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
ये ग्रामीणों को रोजगार की गारंटी देने वाले और योजना का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन करने वाले कर्मचारी हैं लेकिन अब तक सेवा एवं सामाजिक सुरक्षा (गारंटी) नीति लागू नहीं की गई है। समिति ने अब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
मंत्री के आवश्वास पर चरबद्ध आंदोलन स्थगित छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी संघ ने विगत एक जुलाई से एचआर पालिसी लागू नहीं होने पर दो जुलाई से चरणबद्ध हड़ताल शुरू किया था। इस दौरान कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री विजय शर्मा और योजना आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं थी।
बैठक में मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 15 दिनों के भीतर एचआर नीति, ग्राम रोजगार सहायकों के संविदा संबंधी मुद्दों, वेतन वृद्धि और अन्य लंबित मांगों पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल को स्थगित कर दिया गया था।
कर्मचारियों ने एचआर पालिसी में इन मांगों को शामिल करने दिया है।
- प्रस्ताव सेवा अवधि व सुरक्षा : 62 वर्ष या योजना पर्यन्त तक सेवा।
- अनुकंपा नियुक्ति : मृत कर्मी के स्वजन के पात्र सदस्य को संविदा पर नियुक्ति।
- स्थानंतरण : मनरेगा कर्मियों का सहमति, शिकायत, बीमार या अत्यावश्यक स्थिति में स्थानांतरण का प्रविधान।
- जांच व निलंबन : अन्य विभागों की तरह जांच और निलंबन का प्रविधान।
- अनुकंपा अनुदान : मृत कर्मी के आश्रित स्वजन को वर्तमान महंगाई को ध्यान में रखते हुए सम्मानजनक अनुकंपा अनुदान राशि का प्रविधान।
- अवकाश व सामाजिक सुरक्षा : अन्य विभागों के कर्मचारियों के अुनसार अवकाश। साथ ही एनपीएस या यूपीएस सुविधा लागू किया जाए।
- यात्रा व अन्य सुविधाएं : महिला एवं बाल विकास विभाग व अन्य कर्मियों की भांति यात्रा व अन्य सुविधाएं।
