'कलेक्टर को मंदिर ट्रस्ट का मैनेजर बनाना सही', ठाकुर रामचंद्र स्वामी मठ पब्लिक ट्रस्ट पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 'श्री ठाकुर रामचंद्र जी स्वामी जैतू साव मठ' पब्लिक ट्रस्ट के राजस्व रिकॉर्ड में रायपुर कलेक्टर ...और पढ़ें
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हाई कोर्ट ने रायपुर कलेक्टर को मंदिर ट्रस्ट का मैनेजर माना

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डिजिटल डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राजस्व रिकॉर्ड में रायपुर कलेक्टर को ‘श्री ठाकुर रामचंद्र जी स्वामी जैतू साव मठ’ पब्लिक ट्रस्ट का मैनेजर (सर्वरा कार) बनाने संबंधी आदेश को सही ठहराया है।
जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने 17 सितंबर को बिलासपुर राजस्व बोर्ड के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें भारेंगा और भटगांव गांवों में स्थित ट्रस्ट की संपत्तियों के लिए कलेक्टर का नाम मैनेजर के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
मामले में महंत राम आशीष दास ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत याचिका दायर की थी। उन्होंने दिवंगत महंत राम भूषण दास के शिष्य के रूप में उत्तराधिकार का दावा किया था।
उनका आधार एक वसीयत और गोद लेने संबंधी दस्तावेज थे। याचिका में राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर का नाम दर्ज करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने मात्र से ट्रस्ट के प्रबंधन या मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता।
जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि कलेक्टर का नाम दर्ज करना एक प्रशासनिक व्यवस्था है, जिससे कोई स्वामित्व अधिकार निर्धारित नहीं होते।कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि मैनेजर को ट्रस्ट या देवता की संपत्ति पर कोई मालिकाना हक प्राप्त नहीं होता। यह व्यवस्था केवल संपत्ति के उचित प्रबंधन और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रविष्टि से किसी व्यक्ति या अधिकारी को स्वामी नहीं बनाया जा सकता।इस फैसले से मंदिर ट्रस्टों की संपत्तियों के प्रबंधन संबंधी विवादों में प्रशासनिक भूमिका की सीमा स्पष्ट हुई है। याचिका खारिज होने के साथ ही राजस्व बोर्ड का आदेश प्रभावी रहेगा।
(एजेंसी के इनपुट के साथ)
