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बंदूकें वही, पर बस्तर बदल गया… माओवाद के खात्मे के बाद विजय दशमी पर पहली बार हुई शस्त्र पूजा

Published: Tue, 20 Oct 2026 08:53 PM (IST)

माओवाद के खात्मे के बाद बस्तर पुलिस लाइन में पहली बार विजयादशमी पर शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया। यह ...और पढ़ें

माओवाद के खात्मे के बाद विजय दशमी पर पहली बार हुई शस्त्र पूजा

माओवाद के खात्मे के बाद विजय दशमी पर पहली बार हुई शस्त्र पूजा

डिजिटल डेस्क, जगदलपुर । कभी माओवादी हिंसा और मुठभेड़ों के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर में इस बार विजयादशमी का पर्व नए संदेश के साथ मनाया गया। माओवाद के खात्मे के बाद पहली बार बस्तर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ।

जिन हथियारों के दम पर सुरक्षा बलों ने माओवादी चुनौती का मुकाबला किया, विजयादशमी पर उन्हीं शस्त्रों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। यह आयोजन बस्तर में सुरक्षा के बदलते परिदृश्य और शांति की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक बना।

पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में एलएमजी, एके-47, इंसास, एसएलआर, मोर्टार और ग्रेनेड लॉन्चर सहित पुलिस के प्रमुख हथियार पूजा के लिए रखे गए। अधिकारियों ने परंपरागत विधि-विधान से शस्त्र पूजा की। पूजा के बाद अधिकारियों ने हवाई फायरिंग भी की।

पुलिस लाइन में मौजूद इन हथियारों का आवश्यकता के अनुसार अभियानों में इस्तेमाल किया जाता है। इनके रखरखाव और सुरक्षा पर सालभर विशेष ध्यान दिया जाता है।

यह आयोजन केवल शस्त्र पूजा तक सीमित नहीं रहा। माओवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जवानों और अधिकारियों को बधाई दी गई। वहीं, इस संघर्ष में प्राण न्योछावर करने वाले जवानों और अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया।

बस्तर में शांति की राह बनाने के लिए सुरक्षा बलों के संघर्ष और त्याग को भी सम्मान दिया गया। बस्तर एसपी शलभ सिन्हा ने कहा कि माओवाद की समाप्ति के बाद विजयादशमी पर पहली बार पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा की गई है।

पुलिस लाइन में उपलब्ध सभी प्रमुख हथियारों को निकालकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। उन्होंने कहा कि इन्हीं हथियारों के सहारे बस्तर में माओवादी मोर्चे पर अभियान चलाए गए और शांति की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली। उन्होंने माओवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे सभी जवानों और अधिकारियों को बधाई दी तथा शहादत देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।