11 साल से नदी पार कर बच्चों को पढ़ा रहीं दो शिक्षिकाएं, अब बलरामपुर कलेक्टर ने मांगी रिपोर्ट
बलरामपुर जिले के धौरपुर गांव में दो शिक्षिकाएं 11 साल से नदी पार कर बच्चों को पढ़ाने पहुंच रही हैं। ...और पढ़ें
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11 साल से नदी पार कर बच्चों को पढ़ा रहीं शिक्षिकाएं (स्क्रीनग्रैब- सोशल मीडिया)
HighLights
शिक्षिकाएं 11 साल से नदी पार कर बच्चों को पढ़ा रही हैं।
नईदुनिया की खबर के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया।
कलेक्टर ने गांव के विकास और समाधान पर विचार शुरू किया।
डिजिटल डेस्क, अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में धौरपुर गांव की दुर्गम राह अब प्रशासन की नजर में है। 11 साल से इरिया और मोरन नदी के बीच स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं कर्मिला टोप्पो और संध्या हालदार के जज्बे पर नई दुनिया की खबर के बाद प्रशासन ने गांव की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है।
बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से गांव की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
कलेक्टर ने कहा कि शिक्षिकाओं की कर्मठता प्रेरक है। उनकी परेशानी दूर करने के साथ गांव के लिए जो बेहतर विकल्प होगा, उस पर काम किया जाएगा। सड़क और पुल निर्माण, पुनर्वास से लेकर बच्चों को आश्रम या छात्रावास में रखने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
इसके लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। शिक्षिका कर्मिला टोप्पो वर्ष 2014 से धौरपुर के स्कूल में पदस्थ हैं। वह पिछले 11 वर्षों से नदी पार कर बच्चों को पढ़ाने पहुंच रही हैं।
अब प्रशासन पुरुष शिक्षकों की पदस्थापना सहित बच्चों को आश्रम या छात्रावास में रखने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शिक्षिकाओं के समर्पण से अब धौरपुर तक विकास की राह भी पहुंचेगी।
आज ही अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गांव के लिए जो भी बेहतर विकल्प हो, उसकी समीक्षा कर मुझे अवगत कराएं। इसके आधार पर कार्ययोजना बनाकर अमल किया जाएगा। राज्य शासन और स्थानीय स्तर पर क्या-क्या किया जा सकता है, इसका विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।- चंदन संजय त्रिपाठी, कलेक्टर, बलरामपुर
